ईरान में फाँसी इज़रायल के लिए जासूसी के आरोप पर मामला

सितंबर 2025 में ईरानी सरकार ने एक व्यक्ति बाबक शाहबाज़ी (Babak Shahbazi) को फाँसी देने की घोषणा की है। आरोप है कि वह इज़रायल की जासूसी एजेंसी मोस्साद (Mossad) के लिए काम कर रहा था। इस फाँसी ने मानवाधिकार संगठनों, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनैतिक विरोधियों में गंभीर विवाद को जन्म दिया है। यह मामला सिर्फ एक जासूसी आरोप नहीं है, बल्कि न्याय प्रक्रिया, मानवाधिकारों, और राज्य की सुरक्षा नीति के बीच संतुलन की बहस को नई गति दे रहा है।
आरोपी और आरोप (Who & What)

-
नाम बाबक शाहबाज़ी (Babak Shahbazi)। उम्र लगभग 44 वर्ष; पिता हैं, दो बच्चे हैं।
-
व्यवसाय इंडस्ट्रियल कूलिंग/एयर कंडीशनिंग सिस्टम के ठेकेदार।
-
अभियोग
-
आरोप है कि उन्होंने इज़रायल की जासूसी एजेंसी मोस्साद को संवेदनशील सूचनाएँ बेचीं।
-
आरोप है कि उन्होंने सुरक्षा-संस्थानों से जुड़ी जानकारी (senior Iranian officials etc.) देने की योजना बनाई थी।
-
-
गिरफ्तारी: दिसंबर 2023 में गिरफ्तार किए गए थे।
न्याय प्रक्रिया और फाँसी
-
गिरफ़्तारी और आरोप
-
आरोपी (जैसे बाबक शाहबाज़ी) को ईरान की खुफ़िया एजेंसियों ने यह कहते हुए पकड़ा कि वह इज़रायली खुफ़िया एजेंसी मॉसद (Mossad) से जुड़ा था।
-
आरोपों के अनुसार उसने सुरक्षा प्रतिष्ठानों, संवेदनशील डेटा केंद्रों और सरकारी संस्थानों से जानकारी हासिल कर इज़रायल को पहुँचाई।
-
-
मुकदमा और सुनवाई
-
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी कोर्ट (Islamic Revolutionary Court) में इस तरह के मामलों की सुनवाई होती है।
-
मुकदमा प्रायः बंद कमरे (Closed Court) में चलता है और मीडिया या जनता को इसकी विस्तृत जानकारी नहीं मिलती।
-
अभियोजन पक्ष का दावा था कि आरोपी के खिलाफ पुख़्ता सबूत मौजूद थे।
-
-
स्वीकृति (Confession) पर विवाद
-
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि आरोपी से ज़बरदस्ती कबूलनामा (forced confession) कराया गया।
-
अदालत में पेश किए गए बयान आरोपी के दबाव में दिए गए कथनों पर आधारित हो सकते हैं।
-
-
सुप्रीम कोर्ट की मंज़ूरी
-
ईरान में मौत की सज़ा को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अंतिम मंज़ूरी ज़रूरी होती है।
-
इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फ़ैसले को बरकरार रखा।
-
फाँसी (Execution)
-
फाँसी की सज़ा आधिकारिक तौर पर 17 सितंबर 2025 को दी गई।
-
ईरानी मीडिया ने कहा कि यह सज़ा “क़ानूनी प्रक्रिया” के तहत हुई और इसका उद्देश्य “राष्ट्र की सुरक्षा” की रक्षा करना है।
-
लेकिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों का मानना है कि यह सज़ा जल्दबाज़ी में दी गई और आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) का अधिकार नहीं मिला।
विवाद का कारण
-
ईरान का कहना है कि उसने “राष्ट्रीय सुरक्षा और इज़रायल के जासूसी नेटवर्क” को नष्ट करने के लिए यह कदम उठाया।
-
लेकिन आलोचकों का तर्क है कि ईरान इन मामलों का इस्तेमाल अपनी आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “सख़्त छवि” दिखाने के लिए करता है।
-
कोर्ट: उन्हें Revolutionary Court में पेश किया गया और उच्च न्यायालय (Supreme Court) ने भी मौत की सजा को बरकरार रखा।
-
फाँसी की तिथि: 17 सितंबर 2025 को उन्हें Qezelhesar Prison में फाँसी दी गई।गिरफ्तारी, सुनवाई, और सजा की अपील आदि की कानूनी प्रक्रिया के बारे में ईरानी मीडिया की रिपोर्ट यह है कि वह पूरी तरह हुई। लेकिन मानवाधिकार संगठन इस दावे को स्वीकार नहीं करते।
विरोध, आलोचना और दावे
-
अदालत की निष्पक्षता पर सवाल: मानवाधिकार संगठन (जैसे Iran Human Rights) ने कहा है कि शाहबाज़ी को निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली।
-
बाध्य-स्वीकृति (Forced Confession): दावा है कि उन पर दबाव डालकर, संभवतः यातनाएँ दी गईं, ताकि वह जासूसी स्वीकार करें। Al
-
परिवार की सूचना नहीं: बताया गया है कि उनके परिवार को अंतिम समय की जानकारी नहीं दी गई, और उन्हें मौत की सजा लागू करने से पहले सूचना नहीं हुई।
प्रेक्ष्य: राजनीतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का टकराव
-
ईरान और इज़रायल के बीच लंबे समय से छुपा संघर्ष (shadow war) है जिसमें जासूसी, हत्याएँ, ड्रोन हमले आदि शामिल हैं। ऐसे मामलों को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखा जाता है।
-
ईरान की सरकार इन मामलों में कठोर निर्णय लेने के पीछे यह तर्क देती है कि ऐसे आरोपितों को दंड देना आवश्यक है ताकि देश के आतंरिक और बाह्य खतरों से सुरक्षा हो सके।
-
लेकिन विरोधियों का कहना है कि यह एक तरीका है विरोध और असंतोष को दबाने का, खासकर उन स्थितियों में जब आर्थिक हालात खराब हैं और जनता असंतुष्ट है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
1. पश्चिमी देश और मानवाधिकार संगठन
-
अमेरिका और यूरोपीय संघ ने इस फाँसी की आलोचना की और इसे “न्यायिक पारदर्शिता की कमी” तथा “मानवाधिकारों का उल्लंघन” बताया।
-
कई मानवाधिकार संगठनों (जैसे Amnesty International, Human Rights Watch) ने कहा कि ईरान में अक्सर ऐसे मामलों में ज़बरन स्वीकारोक्ति (forced confession) और अन्यायपूर्ण मुकदमे होते हैं।
-
आलोचकों का कहना है कि यह कदम सिर्फ़ राजनीतिक संदेश देने के लिए उठाया गया है।
2. इज़रायल की प्रतिक्रिया
-
इज़रायल ने आधिकारिक तौर पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की है, लेकिन इज़रायली मीडिया और सुरक्षा विश्लेषकों ने इसे ईरान का “प्रचार हथियार” करार दिया।
-
इज़रायल के भीतर इसे मॉसद के लिए एक चुनौती और साथ ही एक प्रॉक्सी टकराव का हिस्सा माना जा रहा है।
3. संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय निकाय
-
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चिंता जताई है और ईरान से मृत्युदंड पर रोक लगाने की अपील की है।
-
UN की ओर से यह भी कहा गया कि ऐसे मामलों में पारदर्शी और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया ज़रूरी है।
4. रूस और चीन जैसी ताकतें
-
रूस और चीन आमतौर पर ईरान की नीतियों का सीधा विरोध नहीं करते। उन्होंने इसे ईरान का “आंतरिक मामला” कहकर चुप्पी साधी या तटस्थ प्रतिक्रिया दी।
-
हालांकि, अप्रत्यक्ष रूप से वे पश्चिमी आलोचना को “दोहरा मापदंड” कह सकते हैं, क्योंकि पश्चिमी देश भी गुप्त अभियानों और मौत की सज़ाओं में शामिल रहे हैं।
5. क्षेत्रीय देश (मध्य-पूर्व)
-
खाड़ी देशों (जैसे सऊदी अरब, UAE) ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वे इसे ईरान-इज़रायल तनाव का हिस्सा मानते हैं और दूरी बनाए रखना चाहते हैं।
-
लेबनान, सीरिया और यमन जैसे ईरान-समर्थक गुटों ने इसे इज़रायल के खिलाफ “क़ानूनी कार्रवाई” बताकर समर्थन दिया।
-
अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाएँ इस तरह की फाँसियों को अक्सर अंवधानहीन निष्क्रियता (lack of due process) और कृत्रिम/दबाव उपरांत स्वीकृत स्वीकारोक्ति (confession) के आधार पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
-
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अन्य देशों ने ऐसी घटनाओं को लेकर आत्म-चिंता व्यक्त की है क्योंकि ये मानवाधिकार मानकों के अनुरूप नहीं लगती। (हालाँकि सभी विवरण सार्वजनिक नहीं हैं)।
संभावित प्रभाव और आगे क्या हो सकता है
-
ईरान-इज़रायल तनाव में वृद्धि
-
यह घटना दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे “शैडो वॉर” (गुप्त युद्ध) को और गहरा सकती है।
-
इज़रायल की तरफ से गुप्त अभियानों या साइबर हमलों की आशंका बढ़ सकती है।
-
-
मानवाधिकार विवाद
-
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की आलोचना तेज़ होगी, खासकर पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों द्वारा।
-
ईरान की न्यायिक प्रणाली पर सवाल और बढ़ेंगे।
-
-
क्षेत्रीय अस्थिरता
-
मध्य-पूर्व (Middle East) में पहले से मौजूद अस्थिर माहौल और बिगड़ सकता है।
-
इससे ईरान के पड़ोसी देशों में भी सुरक्षा और खुफिया गतिविधियों का दबाव बढ़ सकता है।
-
-
राजनयिक असर
-
पश्चिमी देशों (विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय संघ) और ईरान के रिश्तों पर नकारात्मक असर होगा।
-
ईरान-रूस और ईरान-चीन के रिश्तों पर इसका अलग असर पड़ सकता है — क्योंकि वे अक्सर ऐसे मामलों में ईरान का समर्थन करते हैं।
-
आगे क्या हो सकता है
-
और गिरफ्तारियाँ
-
ईरान आगे और लोगों को “इज़रायल या पश्चिम के लिए जासूसी” के आरोपों में गिरफ्तार कर सकता है।
-
-
कड़े सुरक्षा कदम
-
ईरान अपने रक्षा प्रतिष्ठानों और साइबर नेटवर्क को और सख़्ती से मॉनिटर करेगा।
-
Mossad और अन्य विदेशी खुफिया एजेंसियों पर नकेल कसने की कोशिश की जाएगी।
-
-
इज़रायल की प्रतिक्रिया
-
इज़रायल प्रत्यक्ष रूप से नहीं, बल्कि गुप्त तरीके से जवाबी कदम उठा सकता है।
-
क्षेत्रीय प्रॉक्सी संघर्ष (जैसे लेबनान, सीरिया, गाज़ा) और बढ़ सकते हैं।
-
-
जनमत और अंदरूनी राजनीति
-
ईरानी सरकार इस सज़ा को अपनी “मजबूत छवि” दिखाने के लिए प्रचारित करेगी।
-
लेकिन देश के अंदर असंतोष और मानवाधिकार मुद्दों को लेकर विरोध भी बढ़ सकता है।
-
-
इस तरह की सजा से और लोगों में डर और सतर्कता बढ़ेगी; संभव है कि ईरान में अन्य आरोपी भी ऐसे मामलों में सज़ा-ए-मौत का सामना करें। Al
-
यह मामला न्यायिक पारदर्शिता की कमी और मानवीय अधिकारों पर विवादों को और बढ़ाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव और आलोचनाएँ तेज होंगी।
-
इज़रायल-ईरान संबंधों में तनाव और भी बढ़ सकता है, विशेषकर अगर इज़रायल पर लगे आरोप सच्चाई मंच पर साबित हों या ईरान इस तरह के मामलों को मीडिया में और उजागर करे।
-
ईरान के अंदर भी राजनीतिक विपक्ष, अधिकार कार्यकर्ताओं और आम जनता में इस तरह की फाँसियों और निर्भरताओं की प्रक्रिया पर असंतोष बढ़ेगा।
ईरान में बाबक शाहबाज़ी की फाँसी सिर्फ एक व्यक्तिगत मामला नहीं है बल्कि यह देखाता है कि कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में राज्य भारी कदम उठा सकता है और कैसे मानवाधिकार और न्याय प्रक्रिया की पारदर्शिता अहम है।
यह स्थिति दर्शाती है कि न्याय व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत है — आरोप, सुनवाई, सुरक्षा, पारिवारिक सूचना और अपील सभी चीजों का ठीक से निर्वाह होना चाहिए।
Next –