ऑस्ट्रेलि, कनाडा और यूके ने फिलिस्तीन को आधिकारिक मान्यता दी एक ऐतिहासिक कूटनीतिक कदम

21 सितंबर 2025 को, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने संयुक्त रूप से फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य के रूप में आधिकारिक मान्यता दी। यह कदम वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतीक है और इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान की दिशा में एक नया अध्याय शुरू करता है।
🇬🇧 🇦🇺 🇨🇦 मान्यता की घोषणा
यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस निर्णय को “शांति की उम्मीद को जीवित रखने” और दो-राज्य समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मान्यता हमास को पुरस्कृत करने के लिए नहीं है, बल्कि यह फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों की पुष्टि है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस कदम का समर्थन किया, जिसमें फिलिस्तीन को 1967 की सीमाओं के भीतर एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दी गई।
वैश्विक प्रतिक्रिया
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21 सितंबर 2025 को, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, और ऑस्ट्रेलिया ने आधिकारिक रूप से फिलिस्तीन को एक राज्य के रूप में मान्यता दी है।
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इस कदम के पीछे उद्देश्य है दो-राज्य समाधान (Two-State Solution) को पुनर्जीवित करना और फिलिस्तीनियों के लोगों की “स्वायत्तता और संप्रभुता” की लंबी अवधि से चली आ रही चाह को मान्यता देना।
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तीनों देशों ने कहा है कि यह मान्यता हिंसा बंद करने, गाज़ा में मानवीय संकट को हल करने, और यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि फिलिस्तीनी राजनीतिक नेतृत्व लोकतांत्रिक हो, और हमास का इसमें कोई आधिकारिक भूमिका न हो। The Indian Express+3Al
इस निर्णय ने इजराइल और उसके समर्थकों की आलोचना को जन्म दिया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे “आतंकवाद को पुरस्कृत करने” जैसा बताया और चेतावनी दी कि वे वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों को एकतरफा रूप से इजराइल में शामिल कर सकते हैं। वहीं, फ्रांस, पुर्तगाल, बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग और माल्टा जैसे देशों ने भी इस मान्यता का समर्थन किया है, और उम्मीद की जा रही है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में और देशों द्वारा भी इसे मान्यता दी जाएगी
फिलिस्तीनी प्रतिक्रिया
फिलिस्तीन के विदेश मंत्री वरसेन आघाबेकियन शाहिन ने इसे “संप्रभुता की ओर एक अपरिवर्तनीय कदम” और दो-राज्य समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति बताया। उन्होंने इस कदम को ऐतिहासिक और न्यायपूर्ण बताया, जो फिलिस्तीनी लोगों की आकांक्षाओं की पुष्टि करता है।
🇺🇸 अमेरिकी प्रतिक्रिया
अमेरिका ने इस मान्यता का विरोध किया है, इसे “प्रदर्शनात्मक” और “अप्रभावी” बताते हुए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम इजराइल की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज करता है और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालता है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रिपब्लिकन नेताओं ने भी इस निर्णय की आलोचना की है।
भविष्य की दिशा
इस मान्यता के साथ, फिलिस्तीन को आधिकारिक रूप से मान्यता देने वाले देशों की संख्या 150 से अधिक हो गई है। यह कदम संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक व्यापक समर्थन का संकेत है। हालांकि, इस मान्यता का तत्काल प्रभाव फिलिस्तीनी क्षेत्रों में नहीं दिख सकता, लेकिन यह एक दीर्घकालिक शांति प्रक्रिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संभावित प्रभाव एवं चुनौतियाँ
संभावित फ़ायदे
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राजनीतिक दबाव: इस तरह की मान्यता से इज़राइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है कि वह वार्ता की स्थिति में आए और सीमावर्ती बस्तियों (settlements) को रोकने आदि पर विचार करे।
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फिलिस्तीनी नेतृत्व की स्थिति मजबूत होना: फिलिस्तीनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक मान्यता और अधिकारों के लिए बातचीत की शक्ति बढ़ सकती है।
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अतिरिक्त समर्थन और सहायता: अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से आर्थिक, राजनीतिक, और कानूनी सहायता प्राप्ति बेहतर हो सकती है।
चुनौतियाँ
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तत्काल प्रभाव सीमित: जमीन पर स्थितियों में बड़े बदलाव की संभावना अभी कम है; संघर्ष, युद्ध, अधिकारों की हनन की घटनाएँ अभी भी चल रही हैं।
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इज़राइल और अमेरिका की प्रतिक्रिया: इज़राइल ने इस कदम की तीखी आलोचना की है। अमेरिका ने भी कहा है कि फिलहाल मान्यता शांति प्रक्रिया को कठिन कर सकती है।
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साक्ष्य और शर्तें: ये मान्यताएँ अक्सर कुछ शर्तों से जुड़ी होती हैं — जैसे कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण में सुधार, चुनाव, आतंकवाद के साथ स्पष्ट दूरी आदि। अगर ये शर्तें पूरी नहीं हुईं तो आलोचना हो सकती है।
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूके द्वारा फिलिस्तीन को आधिकारिक मान्यता देना एक ऐतिहासिक और साहसिक कूटनीतिक कदम है। यह कदम इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतीक है और वैश्विक कूटनीति में एक नई दिशा का संकेत देता है।
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