1. भारत में बाढ़ की स्थिति
भारत में मानसून के मौसम में बाढ़ एक नियमित प्राकृतिक आपदा के रूप में सामने आती है, लेकिन 2025 में स्थिति विशेष रूप से गंभीर रही। पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन की वजह से भारी बारिश की तीव्रता और अवधि में वृद्धि हुई है, जिससे नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
उत्तर भारत
उत्तर प्रदेश, बिहार, और उत्तराखंड में गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई गाँव जलमग्न हो गए हैं। बिजनौर जिले में गंगा नदी की 200 मीटर लंबी एंबैंकमेंट बहने से लगभग 40 गाँवों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हुआ। बाढ़ के कारण सड़कों, पुलों और बिजली नेटवर्क को भी भारी नुकसान हुआ, जिससे राहत कार्यों में बाधा आई।
पश्चिमी भारत
गुजरात के बनासकांठा जिले में 36 घंटे की लगातार बारिश ने 13 गाँवों को कट-ऑफ कर दिया। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत शिविर स्थापित किए, लेकिन 500 से अधिक लोग विस्थापित हुए। इस क्षेत्र में कृषि भूमि भी पूरी तरह पानी में डूब गई, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा।
पूर्वी भारत
पश्चिम बंगाल और असम में भी ब्रह्मपुत्र और उसके सहायक नदियों का जलस्तर सामान्य से अधिक बढ़ा। असम के कई जिले बाढ़ की चपेट में आए और राहत कार्य तेजी से चलाए गए। इस दौरान कई क्षेत्रों में लोगों को नावों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
कारण और प्रभाव
-
लगातार भारी बारिश और मानसून की तीव्रता बढ़ना।
-
नदी के किनारों पर एंबैंकमेंट और बांधों का कमजोर होना।
-
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकासी की कमी।
-
कृषि और बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नदियों के किनारों पर पुनर्निर्माण और जल प्रबंधन के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाएँ और भी घातक हो सकती हैं।
सितंबर 2025 में भारत के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ की घटनाएँ देखने को मिलीं। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गंगा नदी के किनारे की 200 मीटर लंबी एंबैंकमेंट बह जाने से 40 से अधिक गाँवों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया।
गुजरात के बनासकांठा जिले में 36 घंटे की मूसलधार बारिश के कारण 13 गाँव पूरी तरह से कट गए, जिससे 500 से अधिक लोग विस्थापित हुए।
2. पाकिस्तान में बाढ़ की स्थिति
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भी मानसून की भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। चेनाब, सतलुज, और रावी नदियों के आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं।
3. तूफान “तापाह” का प्रभाव
प्रमुख प्रभाव
भारी बारिश और बाढ़
तापाह के कारण लुज़ोन प्रांत के कई जिले बाढ़ की चपेट में आए। नदियों का जलस्तर सामान्य से कई गुना बढ़ गया, जिससे सड़कों और पुलों को नुकसान पहुँचा। अनेक गाँवों में लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए।
सितंबर 2025 में फिलीपींस में आए तूफान “तापाह” (पूर्व में “लैनी”) ने भीषण तबाही मचाई। हालांकि यह तूफान अब उष्णकटिबंधीय तूफान में बदल चुका है, फिर भी इसके प्रभाव से कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ हुईं। Facebook
4. भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति
भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनी हुई है। दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में प्रदूषण स्तर WHO मानकों से कई गुना अधिक है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत में वायु गुणवत्ता मानकों का पालन किया जाए, तो औसतन भारतीय नागरिक 3.5 वर्ष अधिक जीवन जी सकते हैं।
5. जलवायु परिवर्तन के दीर्घकालिक प्रभाव
जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनियमितताएँ बढ़ रही हैं, जिससे बाढ़, सूखा, और तूफान जैसी घटनाएँ अधिक頻 होने लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कार्बन उत्सर्जन में कमी नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में इन घटनाओं की तीव्रता और आवृत्ति में वृद्धि होगी।
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। भारत और पाकिस्तान जैसे विकासशील देशों में संसाधनों की कमी और बुनियादी ढांचे की कमजोरियों के कारण इन आपदाओं का प्रभाव अधिक गंभीर होता है। इसलिए, सरकारों, नागरिक समाज, और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को मिलकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
Next –
