नेपाल में जनसत्ता विरोधी प्रदर्शन 2025 एक ऐतिहासिक युवा विद्रोह

नेपाल में 2025 में हुए जनसत्ता विरोधी प्रदर्शन (Gen Z Protests) ने देश की राजनीति और समाज को गहरे तरीके से प्रभावित किया। यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से युवा वर्ग द्वारा किया गया, जिन्होंने भ्रष्टाचार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश और सरकारी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। यह आंदोलन न केवल नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, बल्कि यह दक्षिण एशिया में युवा आंदोलनों की दिशा को भी प्रभावित करने वाला था।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
नेपाल में 2025 के जनसत्ता विरोधी प्रदर्शन के पीछे कई गहरे राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक कारण थे। यह आंदोलन केवल अचानक सड़कों पर उतरने वाला विरोध नहीं था, बल्कि वर्षों से जमा हुए असंतोष और युवाओं की नाखुशी का परिणाम था।
1️⃣ राजनीतिक अस्थिरता
नेपाल ने 2008 में राजशाही को समाप्त कर लोकतंत्र स्थापित किया, लेकिन इसके बाद लगातार राजनीतिक अस्थिरता बनी रही। दल-बदल, भ्रष्टाचार और सत्ता के केंद्रीकरण ने जनता और खासकर युवाओं के बीच निराशा पैदा की। युवा वर्ग ने महसूस किया कि उनकी आवाज संसद या सरकार तक पहुँच नहीं पा रही है।
2️⃣ भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी
सरकारी तंत्र में व्यापक भ्रष्टाचार, नौकरशाही में लापरवाही और सरकारी परियोजनाओं में अनियमितताएँ युवाओं के लिए चिंता का विषय बन गईं। उन्हें लगा कि उनकी मेहनत और अवसरों का सही उपयोग नहीं हो रहा और उनके भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
3️⃣ रोजगार और शिक्षा के मुद्दे
युवा वर्ग, खासकर स्नातक और मास्टर डिग्री धारक, रोजगार की कमी और अवसरों की असमानता से परेशान थे। शिक्षा का स्तर बढ़ने के बावजूद रोजगार नहीं मिलने की समस्या ने युवा असंतोष को और बढ़ा दिया।
4️⃣ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध
2025 में सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर अचानक प्रतिबंध लगा दिया। यह कदम युवाओं के लिए किसी अलार्म के समान था। सोशल मीडिया नेपाल में युवा वर्ग की मुख्य आवाज़ और राजनीतिक सक्रियता का माध्यम था। इसके बंद होने से उन्हें यह महसूस हुआ कि उनकी अभिव्यक्ति को दबाया जा रहा है।
नेपाल में 2008 में राजशाही के समाप्त होने के बाद से लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित की गई थी। हालांकि, समय के साथ भ्रष्टाचार, राजनीतिक अस्थिरता और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी जैसी समस्याएँ बढ़ने लगीं। 2025 में, प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली की सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर प्रतिबंध लगा दिया, जिससे युवाओं में असंतोष फैल गया। सरकार का यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में देखा गया।
आंदोलन का आरंभ और विस्तार
सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के बाद, काठमांडू और अन्य शहरों में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। ये प्रदर्शन बिना किसी केंद्रीय नेतृत्व के थे, जिसमें युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ “हिंदू राष्ट्र की बहाली” जैसे नारे भी लगाए, जो राजशाही समर्थक समूहों के विचारों को दर्शाते थे।
प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू के माईतिगढ़ मंडला और न्यू बनेश्वर जैसे स्थानों पर एकत्र होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके कारण पुलिस ने आंसू गैस और रबर बुलेट्स का इस्तेमाल किया। इस हिंसा में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हुए।
हिंसा और सरकार की प्रतिक्रिया
1️⃣ हिंसा का प्रारंभ
प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू के मुख्य इलाकों, जैसे माईतिगढ़ मंडला और न्यू बनेश्वर, में सड़कों पर जुलूस निकालना शुरू किया। पुलिस के विरोध के बावजूद उन्होंने सरकारी कार्यालयों और प्रमुख स्थानों पर आगजनी की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन और प्रधानमंत्री के आवास की ओर भी बढ़ने की कोशिश की।
2️⃣ सुरक्षा बल की प्रतिक्रिया
सरकार ने स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों को तैनात किया। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, रबर बुलेट्स और जलती हुई सुरक्षात्मक बैरियर का इस्तेमाल किया गया। इसके बावजूद कई इलाकों में हिंसा फैलती रही और सांप्रदायिक तनाव भी बढ़ गया।
3️⃣ मानव और संपत्ति का नुकसान:इस हिंसा में कम से कम 19 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए। सरकारी और निजी संपत्तियों को भी काफी नुकसान पहुंचा। सड़कें जाम हो गईं और स्थानीय व्यवसाय प्रभावित हुए। स्कूल, कॉलेज और अन्य सार्वजनिक संस्थान अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए।
4️⃣ सरकार की प्रतिक्रिया और कदम
प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली और गृह मंत्री रमेश लेखच ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास किए, लेकिन लगातार बढ़ती हिंसा और जनता के विरोध के चलते प्रधानमंत्री ने 9 सितंबर 2025 को इस्तीफा दे दिया।
प्रदर्शनकारियों की हिंसक गतिविधियों में प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के आवासों को आग लगा दी गई। इसके परिणामस्वरूप, प्रधानमंत्री ओली ने 9 सितंबर 2025 को इस्तीफा दे दिया। गृह मंत्री रमेश लेखच भी इस्तीफा देने वाले मंत्रियों में शामिल थे। सरकार ने काठमांडू में कर्फ्यू लागू किया और सेना को तैनात किया। स्कूलों को बंद कर दिया गया और इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया।
आंदोलन का नेतृत्व और उद्देश्य
इस आंदोलन का नेतृत्व मुख्य रूप से युवा वर्ग ने किया, जिन्हें “जनसत्ता विरोधी” के रूप में जाना गया। इन युवाओं ने सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ अभियान चलाया और भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता फैलाने का प्रयास किया। उनका मुख्य उद्देश्य एक पारदर्शी और जवाबदेह सरकार की स्थापना था।
मीडिया और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
मीडिया ने इस आंदोलन को व्यापक रूप से कवर किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान नेपाल की राजनीतिक स्थिति पर गया। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने पुलिस की हिंसा की निंदा की और सरकार से संयम बरतने की अपील की। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटाने के बाद भी आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को जारी रखा। The Times of India
नेपाल में 2025 में हुए जनसत्ता विरोधी प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि युवा वर्ग अब मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने भ्रष्टाचार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाया। इस आंदोलन ने यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से युवा अपनी आवाज उठा सकते हैं और सत्ता को चुनौती दे सकते हैं।
हालांकि सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटा लिया, लेकिन आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें पूरी नहीं हुईं। यह आंदोलन नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ था और यह दर्शाता है कि युवा वर्ग अब बदलाव की ओर अग्रसर है।
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