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पंजाब में बाढ़ राहत और किसानों की समस्या – 2025 की पूरी जानकारी

पंजाब में बाढ़ राहत किसानों की आपत्ति और संघर्ष

पंजाब में 2025 की बाढ़ ने राज्य के किसानों को भीषण संकट में डाल दिया है। लगातार बारिश और नदियों के उफान के कारण लगभग 1,400 गांव जलमग्न हो गए, जिससे 3.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए और 3.71 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि डूब गई। इस विनाशकारी बाढ़ के बाद, राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने राहत पैकेज की घोषणा की, लेकिन किसानों और विपक्षी दलों ने इन उपायों को अपर्याप्त और अपमानजनक बताया है।


 राज्य सरकार की राहत योजनाएँ


केंद्र सरकार की राहत पैकेज पर विवाद

2025 की पंजाब बाढ़ के बाद केंद्र सरकार ने प्रभावित किसानों और आम जनता के लिए ₹1,600 करोड़ का राहत पैकेज घोषित किया। इस पैकेज का उद्देश्य बाढ़ से हुई फसल, घर और आधारभूत संरचना के नुकसान को कम करना था। हालांकि, इस पैकेज को लेकर किसानों और विपक्षी दलों में कई तरह की आलोचना और विवाद उत्पन्न हो गया।

  1. किसानों का आरोप – राशि अपर्याप्त

    • किसान यूनियनों का कहना है कि बाढ़ से हुए वास्तविक नुकसान का आकलन लगभग ₹20,000 करोड़ है, जबकि केंद्र सरकार ने केवल ₹1,600 करोड़ का पैकेज घोषित किया।

    • किसानों का मानना है कि यह राशि उनकी फसलों, भूमि और घरों की क्षति के मुकाबले बहुत कम है और उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिलेगी।

  2. सरकारी वितरण प्रक्रिया पर सवाल

    • कई किसान संघों ने यह भी कहा कि राहत राशि का वितरण पारदर्शी नहीं होगा।

    • उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और बैंकिंग प्रणाली में देरी या भ्रष्टाचार के कारण वास्तविक लाभार्थियों तक पैसा नहीं पहुंचेगा।

  3. राजनीतिक विरोध और बयानबाजी

    • आम आदमी पार्टी के पंजाब अध्यक्ष और अन्य राजनीतिक नेता इस पैकेज को “अपमानजनक” और “किसानों के साथ मजाक” बताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं।

    • कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी कहा कि पंजाब हमेशा देश की खाद्य सुरक्षा में योगदान देता रहा है, लेकिन इस आपदा के समय केंद्र ने इसकी उपेक्षा की।

  4. विशेष अनुरोध – सीधे बैंक खातों में राशि

    • किसानों और विपक्षी दलों की मांग है कि राहत राशि सीधे प्रभावित किसानों के बैंक खातों में जमा की जाए।

    • इससे यह सुनिश्चित होगा कि पैकेज का वास्तविक लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे और बिचौलियों के कारण राशि कम न हो।

  5. अन्य विवादित मुद्दे

    • राहत राशि के अलावा, पैकेज में बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी की दीर्घकालिक योजनाओं का उल्लेख नहीं है।

    • किसानों का कहना है कि केवल आर्थिक पैकेज पर्याप्त नहीं है, बल्कि बाढ़ के कारणों और संरचनात्मक समस्याओं का स्थायी समाधान भी जरूरी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के दौरे के दौरान ₹1,600 करोड़ का बाढ़ राहत पैकेज घोषित किया। लेकिन राज्य सरकार और किसानों ने इसे अपर्याप्त और अपमानजनक बताया है। किसान यूनियनों का कहना है कि यह राशि किसानों की वास्तविक क्षति की तुलना में नगण्य है। उन्होंने मांग की है कि यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डाली जाए।


 किसानों की आपत्ति और विरोध

1. राहत राशि अपर्याप्त – मुख्य आपत्ति


2. सरकारी वितरण प्रक्रिया पर सवाल


3. राजनीतिक समर्थन और विरोध


4. स्थानीय संघर्ष और जन जागरूकता


5. सकारात्मक पहलें और सहयोग

किसान यूनियनों और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के राहत पैकेज की आलोचना की है। आम आदमी पार्टी के पंजाब अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने इसे “अपमानजनक” करार दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पंजाब के लोगों के साथ क्रूर मजाक करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वास्तविक नुकसान लगभग ₹20,000 करोड़ का है, जबकि केंद्र ने केवल ₹1,600 करोड़ की घोषणा की है।

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की और इसे “धोखा” और “मजाक” बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब ने हमेशा देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन इस संकट के समय केंद्र ने उसकी उपेक्षा की है। The Times of India


 बाढ़ के कारण संरचनात्मक समस्याएँ

1. नहरों और जल निकासी प्रणाली की खराब स्थिति


2. पुराने पुल और सड़कें


3. अल्प विकसित जलाशय और बांध


 सहयोग और एकजुटता

राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और मेवात क्षेत्रों के समुदायों ने पंजाब के किसानों के लिए राहत सामग्री एकत्र की है। मस्जिदों और स्थानीय संगठनों ने खाद्यान्न, कपड़े और नकद दान एकत्र किए हैं। युवाओं ने ट्रैक्टरों और वाहनों के माध्यम से इन सामग्री को पंजाब भेजा है, जो आपसी सहयोग और एकजुटता का प्रतीक है।

पंजाब में आई बाढ़ ने किसानों के लिए एक गंभीर संकट उत्पन्न किया है। राज्य और केंद्र सरकारों की राहत योजनाएँ किसानों की वास्तविक क्षति के अनुपात में अपर्याप्त हैं। किसान यूनियनों और विपक्षी दलों की मांग है कि राहत राशि सीधे किसानों के खातों में डाली जाए और बाढ़ के कारणों की स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएं। साथ ही, राज्य और केंद्र सरकारों को मिलकर बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी की संरचनाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।

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