पीयूष गोयल का यूएई दौरा 2025 – भारत-यूएई संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रिश्ते हमेशा से व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर आधारित रहे हैं। 18 सितंबर 2025 से शुरू हुआ केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का दो दिवसीय यूएई दौरा इसी रिश्ते को और मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि यह दौरा क्यों महत्वपूर्ण है, इसमें किन-किन मुद्दों पर चर्चा हो रही है, भारत और यूएई के बीच मौजूदा व्यापारिक रिश्ते क्या हैं और भविष्य में इससे दोनों देशों को क्या फायदे हो सकते हैं।
1. दौरे का मुख्य उद्देश्य
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व्यापार और निवेश बढ़ाना – दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) को और मज़बूत करना।
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ऊर्जा सहयोग – तेल और गैस की आपूर्ति के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सोलर और ग्रीन हाइड्रोजन में नए अवसर तलाशना।
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टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सहयोग – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इकोनॉमी और स्टार्टअप इकोसिस्टम में साझेदारी बढ़ाना।
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प्रवासी भारतीयों की भूमिका – भारतीय समुदाय से संवाद कर उनकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना।
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वैश्विक मंच पर साझेदारी – रक्षा, सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जैसी रणनीतिक चुनौतियों पर सहयोग मजबूत करना।
इस प्रकार, दौरे का मुख्य उद्देश्य सिर्फ़ आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाना नहीं था, बल्कि ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, सुरक्षा और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी नए आयाम देना था।
पीयूष गोयल का यह दौरा मुख्य रूप से भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की प्रगति की समीक्षा और उसे नए क्षेत्रों तक ले जाने के लिए किया जा रहा है।
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भारत और यूएई ने 2022 में CEPA पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिला।
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इस समझौते का लक्ष्य था कि अगले 5 वर्षों में आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर से ऊपर ले जाया जाए।
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दौरे के दौरान गोयल कई उच्च-स्तरीय बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं ताकि निवेश, ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे और टेक्नोलॉजी सहयोग पर ठोस कदम उठाए जा सकें।
2. भारत-यूएई व्यापारिक संबंधों की वर्तमान स्थिति
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व्यापार का आकार – 2024-25 में भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 85 अरब डॉलर से अधिक पहुँच गया है, जिससे यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया है।
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निर्यात और आयात –
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CEPA समझौता (2022) – भारत और यूएई के बीच हुए Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) ने व्यापार को नई गति दी है। इससे कई उत्पादों पर टैरिफ घटे हैं और व्यापार का दायरा बढ़ा है।
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निवेश सहयोग – अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) और अन्य यूएई निवेशक भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप्स और रियल एस्टेट में बड़े निवेश कर रहे हैं।
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सेवा क्षेत्र का योगदान – आईटी, फिनटेक और हेल्थकेयर सेक्टर में भी दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी उभर रही है।
कुल मिलाकर, भारत-यूएई व्यापारिक संबंध न केवल वस्तुओं के आदान-प्रदान तक सीमित हैं, बल्कि निवेश, सेवाओं और टेक्नोलॉजी सहयोग तक फैल चुके हैं।
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यूएई, भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
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2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 85 अरब डॉलर तक पहुँच गया।
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भारत, यूएई से मुख्य रूप से कच्चा तेल, सोना, पेट्रोकेमिकल्स आयात करता है, जबकि यूएई को गहने-आभूषण, खाद्य उत्पाद, मशीनरी, वस्त्र और IT सेवाएँ निर्यात करता है।
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दुबई और अबू धाबी जैसे शहर भारतीय व्यवसायियों और प्रवासी भारतीयों के लिए व्यापार और रोजगार का प्रमुख केंद्र हैं।
3. दौरे के प्रमुख मुद्दे
(i) निवेश और बुनियादी ढाँचा
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भारत, विशेषकर गुजरात और महाराष्ट्र में, यूएई निवेशकों को औद्योगिक गलियारों और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का न्योता दे रहा है।
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यूएई की कंपनियाँ भारत के ग्रीन एनर्जी और स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी निवेश की इच्छुक हैं।
(ii) ऊर्जा सुरक्षा
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भारत की तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा यूएई से पूरा होता है।
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दौरे में लंबी अवधि के ऊर्जा समझौते पर चर्चा हो रही है ताकि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
(iii) डिजिटल और टेक्नोलॉजी सहयोग
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फिनटेक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
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भारत के डिजिटल भुगतान प्लेटफ़ॉर्म (जैसे UPI) को यूएई में लागू करने पर भी बातचीत चल रही है।
(iv) MSME और स्टार्टअप सहयोग
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छोटे और मझोले उद्यम (MSME) भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
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यूएई के बाज़ार में भारतीय MSMEs के लिए एक्सपोर्ट अवसर बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
4. यूएई दौरे में प्रमुख कार्यक्रम
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उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें – पीयूष गोयल ने यूएई के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रियों और शीर्ष सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की।
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व्यापार एवं निवेश सम्मेलन – भारत-यूएई बिज़नेस फोरम में दोनों देशों के उद्योगपतियों और निवेशकों ने भाग लिया, जहाँ नए व्यापारिक समझौते और निवेश अवसरों पर चर्चा हुई।
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ऊर्जा एवं नवीकरणीय परियोजनाएँ – ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर एनर्जी और ऑयल सप्लाई से जुड़े समझौते पर बातचीत हुई।
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टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सहयोग – भारतीय स्टार्टअप्स और यूएई निवेशकों के बीच B2B मीटिंग्स आयोजित की गईं।
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भारतीय प्रवासी समुदाय से संवाद – पीयूष गोयल ने दुबई और अबू धाबी में भारतीय समुदाय को संबोधित किया और उनकी समस्याओं एवं योगदान पर चर्चा की।
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रणनीतिक साझेदारी वार्ता – रक्षा, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर भी विचार-विमर्श हुआ ताकि दोनों देश वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना कर सकें।
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दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स में भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल और यूएई उद्यमियों के साथ बैठक।
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अल-धफरा आर्थिक फोरम में मुख्य भाषण, जिसमें भारत की “मेक इन इंडिया” और “स्टार्टअप इंडिया” पहल की जानकारी साझा की जाएगी।
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भारतीय प्रवासी समुदाय से संवाद, जिसमें भारत सरकार की नई नीतियों की जानकारी दी जाएगी।
5. भारत के लिए संभावित लाभ
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निवेश में बढ़ोतरी – यूएई से भारत में बुनियादी ढाँचे, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश आएगा।
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रोजगार सृजन – नए निवेश और व्यापारिक समझौतों से भारत में युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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ऊर्जा सुरक्षा – कच्चे तेल और LNG की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
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निर्यात में वृद्धि – भारत के आभूषण, कृषि उत्पाद और IT सेवाओं के लिए बड़ा बाज़ार खुलेगा।
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डिजिटल सहयोग – भारतीय फिनटेक कंपनियों के लिए पश्चिम एशिया में बड़ा अवसर उपलब्ध होगा।
6. यूएई के लिए लाभ
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मजबूत व्यापारिक भागीदारी – भारत, यूएई का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत के साथ व्यापार करने से यूएई को स्थायी और बड़ा उपभोक्ता बाजार मिलता है।
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आर्थिक विविधीकरण – यूएई तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है। भारत के साथ टेक्नोलॉजी, आईटी, फिनटेक और रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग से उसकी अर्थव्यवस्था विविध और स्थिर बन रही है।
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भारतीय प्रवासी समुदाय का योगदान – लगभग 35 लाख भारतीय प्रवासी यूएई में काम कर रहे हैं। ये प्रवासी न सिर्फ़ यूएई की श्रमशक्ति का बड़ा हिस्सा हैं बल्कि उनके कौशल से यूएई की सेवाएँ और उद्योग मजबूत होते हैं।
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निवेश के अवसर – भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप्स और रियल एस्टेट में निवेश करके यूएई को दीर्घकालिक लाभ मिलता है।
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वैश्विक मंच पर सहयोग – भारत के साथ गठबंधन से यूएई की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक स्थिति और मजबूत होती है।
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सांस्कृतिक और पर्यटन लाभ – भारतीय पर्यटक और त्योहार यूएई की सांस्कृतिक विविधता को बढ़ाते हैं और पर्यटन क्षेत्र में बड़ा राजस्व लाते हैं।
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भारत के विशाल उपभोक्ता बाज़ार तक पहुँच।
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भारतीय IT, फार्मा और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश के अवसर।
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खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुओं की स्थिर आपूर्ति।
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सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधों को मज़बूती।
7. भारत-यूएई रिश्तों का ऐतिहासिक महत्व
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प्राचीन काल से व्यापारिक रिश्ते – गुजरात और मालाबार तट के व्यापारी मोती, मसाले और कपड़े यूएई तक पहुँचाते थे, जबकि खाड़ी क्षेत्र से मोती और खजूर भारत आते थे।
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सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव – दोनों देशों की सभ्यताओं ने एक-दूसरे पर गहरा प्रभाव डाला है। अरबी भाषा और इस्लामी संस्कृति भारत में, वहीं भारतीय संस्कृति और खानपान खाड़ी देशों में लोकप्रिय रहे।
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तेल युग के बाद संबंधों की नई शुरुआत – 1970 के दशक में तेल उद्योग के उभार के साथ लाखों भारतीय श्रमिक यूएई गए और वहाँ की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाई।
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कूटनीतिक साझेदारी – 1971 में यूएई के गठन के बाद भारत सबसे पहले इसे मान्यता देने वाले देशों में शामिल था। तब से लगातार द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत होते गए।
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व्यापार और प्रवासी भारतीय – आज भारत-यूएई के बीच व्यापार 85 अरब डॉलर से अधिक का है और लगभग 35 लाख भारतीय प्रवासी यूएई की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं।
भारत-यूएई रिश्तों का यह ऐतिहासिक महत्व बताता है कि दोनों देश सिर्फ़ आर्थिक साझेदार नहीं बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय दृष्टि से भी गहराई से जुड़े हुए हैं।
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यूएई में करीब 35 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो वहाँ की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं।
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भारतीय त्योहार, भोजन और संस्कृति ने यूएई में अपनी गहरी छाप छोड़ी है।
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दोनों देशों के बीच रिश्ते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, रणनीतिक और मानवीय हैं।
8. भविष्य की संभावनाएँ
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आने वाले समय में भारत और यूएई मिलकर ग्लोबल सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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दोनों देश मिलकर ग्रीन हाइड्रोजन और सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर सकते हैं।
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डिजिटल कॉमर्स, ब्लॉकचेन और AI के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और विकास (R&D) सहयोग की संभावना है।
पीयूष गोयल का यह यूएई दौरा केवल व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक और सांस्कृतिक साझेदारी को भी मज़बूती देने वाला है। भारत और यूएई के बीच बढ़ते संबंध यह संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में दोनों देश वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रमुख साझेदार बनकर उभरेंगे।
भारत को ऊर्जा और निवेश का लाभ मिलेगा, जबकि यूएई को भारत के विशाल बाज़ार और प्रतिभा का। यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों में एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत है।
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