भारतीय नौसेना का ऐतिहासिक ‘नाविका सागर परिक्रमा II’ अभियान महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल

नौसेना ने महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके नेतृत्व कौशल को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। ‘नाविका सागर परिक्रमा II’ अभियान, भारतीय नौसेना की महिलाओं द्वारा संचालित पहली लंबी समुद्री यात्रा है, जिसने न केवल समुद्री अभियानों में महिलाओं की भागीदारी को दर्शाया बल्कि महिला सशक्तिकरण का नया उदाहरण भी स्थापित किया।
अभियान का महत्व
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महिला नेतृत्व: अभियान के तहत सभी महत्वपूर्ण पदों पर महिलाएं ही कार्यरत थीं। इससे यह साबित होता है कि महिलाएं नौसैनिक अभियानों में पुरुषों के बराबर प्रदर्शन कर सकती हैं।
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प्रशिक्षण और कौशल: इस अभियान में नाविकाओं को उच्च स्तर की नौसैनिक प्रशिक्षण और संचालन कौशल का प्रदर्शन करना पड़ा, जो उनकी तैयारी और क्षमता को दर्शाता है।
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राष्ट्रीय गौरव: ‘नाविका सागर परिक्रमा II’ ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की नौसैनिक शक्ति और महिला सशक्तिकरण के संदेश को मजबूती दी।
भारतीय नौसेना ने 2025 में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘नाविका सागर परिक्रमा II’ (Navika Sagar Parikrama II) अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस अभियान में दो महिला अधिकारियों, लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए और लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के, ने भारतीय नौसेना के स्वदेशी नौकायन पोत INSV तारिणी पर सवार होकर दुनिया की समुद्री परिक्रमा की। यह मिशन भारतीय महिला सशक्तिकरण और समुद्री साहसिकता का प्रतीक बन गया है।
अभियान की शुरुआत और उद्देश्य
‘नाविका सागर परिक्रमा II’ अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर 2024 को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर गोवा के INS मंडोवी से हुई। इसका उद्देश्य भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता को प्रदर्शित करना और महिला अधिकारियों की साहसिकता को उजागर करना था। इस मिशन के तहत रूपा ए और दिलना के ने 23,400 समुद्री मील (लगभग 43,300 किलोमीटर) की यात्रा की, जो आठ महीने से अधिक समय तक चली।
यात्रा मार्ग और प्रमुख पड़ाव
इस ऐतिहासिक यात्रा में चार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों पर ठहराव शामिल थे:
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फ्रीमांटल, ऑस्ट्रेलिया – यहां पर उनका पहला अंतरराष्ट्रीय पड़ाव था।
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लाइटलटन, न्यूजीलैंड – यहां उन्होंने समुद्री परिस्थितियों का सामना किया और स्थानीय समुद्री समुदाय से मुलाकात की।
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पोर्ट स्टेनली, फॉकलैंड द्वीप – यहां उन्होंने दक्षिणी महासागर की चुनौतियों का सामना किया।
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केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका – यहां से वे अंतिम चरण के लिए रवाना हुए।
इन पड़ावों के दौरान, उन्होंने भारतीय समुदायों और समुद्री संस्थाओं के साथ संवाद स्थापित किया और भारतीय नौसेना की उपलब्धियों को साझा किया।
मिशन की चुनौतियाँ और सफलता
मिशन की चुनौतियाँ और सफलता
मिशन की चुनौतियाँ:
‘नाविका सागर परिक्रमा II’ अभियान महिलाओं के नेतृत्व में एक लंबी समुद्री यात्रा थी, इसलिए इसमें कई प्रकार की चुनौतियाँ सामने आईं:
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प्राकृतिक चुनौतियाँ:
समुद्र में मौसम अचानक बदल सकता है। तेज़ तूफ़ान, ऊँचे समुद्री लहरें और सीमित दृश्यता जैसी परिस्थितियों ने अभियान को कठिन बना दिया। नाविकाओं को इन स्थितियों में सुरक्षित संचालन के लिए उच्च सतर्कता और त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता थी। -
मानसिक और शारीरिक चुनौतियाँ:
लंबी अवधि तक समुद्र में रहना मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से चुनौतीपूर्ण होता है। confined space (सीमित जगह) में जीवन, लगातार समुद्री गतिविधियों और अनियमित नींद के कारण तनाव और थकान का सामना करना पड़ा। -
तकनीकी चुनौतियाँ:
नौसैनिक संचालन के दौरान जहाज की नेविगेशन, संचार और अन्य तकनीकी प्रणालियों का सटीक संचालन बेहद महत्वपूर्ण होता है। महिलाओं ने इन तकनीकी जिम्मेदारियों को पूरी दक्षता के साथ निभाया। -
टीम वर्क और नेतृत्व:
सभी चालक दल के सदस्यों का समन्वय बनाए रखना चुनौतीपूर्ण था। मिशन ने यह दिखाया कि महिलाएं टीम लीडर के रूप में समान क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति रखती हैं।
मिशन की सफलता:
इन सभी चुनौतियों के बावजूद, ‘नाविका सागर परिक्रमा II’ पूरी तरह सफल रही। इसकी सफलता के कुछ मुख्य बिंदु हैं:
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सुरक्षित और सफल यात्रा:
अभियान ने निर्धारित मार्ग और समय सीमा के अनुसार पूरी यात्रा पूरी की। किसी भी प्रकार की गंभीर दुर्घटना या तकनीकी विफलता नहीं हुई। -
महिला नेतृत्व की मिसाल:
यह अभियान साबित करता है कि महिलाएं उच्च दबाव वाले मिशनों को भी सफलतापूर्वक पूरा कर सकती हैं। -
प्रेरणा और संदेश:
मिशन ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की क्षमताओं को उजागर किया और युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। -
सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव:
यह अभियान न केवल नौसैनिक क्षेत्र में बल्कि समाज में भी महिलाओं के समान अधिकार और अवसरों के लिए एक सशक्त संदेश देता है।
इस मिशन में सबसे बड़ी चुनौती ड्रेक पैसिज (Drake Passage) को पार करना था, जो अपनी उथल-पुथल और तेज धाराओं के लिए प्रसिद्ध है। इसके बावजूद, रूपा ए और दिलना के ने अपनी साहसिकता और कौशल से इस चुनौती को पार किया। यह मिशन न केवल समुद्री साहसिकता का प्रतीक था, बल्कि भारतीय महिला अधिकारियों की क्षमता और दृढ़ संकल्प को भी दर्शाता है।
मिशन का समापन और सम्मान
29 मई 2025 को मर्मुगाओ, गोवा में आयोजित एक भव्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अभियान की सफलता पर ‘फ्लैग-इन’ समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह मिशन भारतीय महिला सशक्तिकरण और भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता का प्रतीक है। उन्होंने रूपा ए और दिलना के को उनकी साहसिकता और समर्पण के लिए बधाई दी।
मिशन का महत्व और प्रभाव
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महिला सशक्तिकरण में मील का पत्थर:
यह अभियान भारतीय नौसेना और पूरे देश के लिए महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन गया। पहली बार सभी प्रमुख नौसैनिक पदों पर महिलाएं नेतृत्व कर रही थीं, जिससे यह स्पष्ट संदेश गया कि महिलाएं किसी भी चुनौतीपूर्ण पेशे में पुरुषों के समान सक्षम हैं। -
राष्ट्रीय सुरक्षा और नौसैनिक क्षमताओं में वृद्धि:
मिशन ने यह भी दिखाया कि महिलाओं की भागीदारी से नौसैनिक संचालन और मिशन दक्षता में सुधार हो सकता है। यह नौसैनिक बलों के लिए एक सकारात्मक कदम है, जो विविधता और समान अवसर को बढ़ावा देता है। -
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि:
‘नाविका सागर परिक्रमा II’ ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की नौसैनिक शक्ति और महिलाओं के क्षेत्र में प्रगति का संदेश दिया। इससे भारत की छवि एक आधुनिक, सशक्त और समानता समर्थक राष्ट्र के रूप में मजबूत हुई।
मिशन का प्रभाव:
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युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा:
यह अभियान लाखों युवा महिलाओं को प्रेरित करता है कि वे किसी भी पेशेवर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं, चाहे वह समुद्री नौसेना जैसी चुनौतीपूर्ण जगह ही क्यों न हो। -
सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव:
मिशन ने समाज में यह संदेश फैलाया कि महिलाएं नेतृत्व और कठिन परिस्थितियों में समान योगदान दे सकती हैं। इससे लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता बढ़ी। -
भविष्य के नौसैनिक अभियानों पर असर:
अभियान की सफलता ने नौसेना को महिलाओं को और अधिक जिम्मेदार पदों पर नियुक्त करने और उन्हें उच्च स्तरीय प्रशिक्षण देने के लिए प्रेरित किया। इससे भविष्य में और अधिक महिला नेतृत्व वाले मिशन संभव होंगे। -
राष्ट्रीय गर्व और मीडिया प्रभाव:
अभियान की सफलता ने देशवासियों में गर्व की भावना पैदा की और मीडिया ने इसे व्यापक रूप से कवर किया। इससे भारतीय नौसेना और महिलाओं के योगदान का महत्व आम जनता के बीच और अधिक बढ़ा।
‘नाविका सागर परिक्रमा II’ अभियान ने न केवल भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता को प्रदर्शित किया, बल्कि यह भारतीय महिला अधिकारियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बना। इस मिशन ने यह सिद्ध कर दिया कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। यह अभियान भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अभियान की झलकियाँ
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महिलाओं का नेतृत्व
अभियान के दौरान जहाज के सभी मुख्य पदों पर महिलाएं कार्यरत थीं – कप्तान, अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ। यह नौसेना में महिला नेतृत्व की पहली पूरी तरह से संरचित झलक थी। -
लंबी समुद्री यात्रा
मिशन में नाविकाओं ने कई हजार किलोमीटर की समुद्री दूरी तय की। इसमें विविध जलवायु और समुद्री परिस्थितियों का सामना किया गया, जिसमें तूफ़ान और ऊँचे समुद्री लहरें शामिल थीं। -
तकनीकी और नौसैनिक कौशल का प्रदर्शन
अभियान के दौरान महिलाओं ने जहाज संचालन, नेविगेशन, संचार, और आपातकालीन परिस्थितियों में उत्कृष्ट कौशल दिखाया। यह दिखाता है कि महिलाएं किसी भी तकनीकी या चुनौतीपूर्ण भूमिका में पुरुषों के बराबर हैं। -
टीम वर्क और समन्वय
अभियान में सभी नाविकाओं ने टीम वर्क और समन्वय का शानदार प्रदर्शन किया। confined space में रहने और लगातार समुद्री गतिविधियों में भाग लेने के बावजूद, टीम ने बेहतरीन सहयोग और निर्णय क्षमता दिखाई। -
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता
अभियान ने मीडिया और अंतर्राष्ट्रीय नौसैनिक समुदाय में भारत की महिला सशक्तिकरण पहल को प्रमुखता से उजागर किया। इससे यह संदेश गया कि भारतीय महिलाएं किसी भी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं। -
प्रेरक अनुभव और कहानियाँ
नाविकाओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, जिसमें समुद्र में कठिन परिस्थितियों का सामना, तकनीकी चुनौतियाँ और टीम के साथ मिलकर मिशन को सफल बनाने की कहानियाँ शामिल हैं। यह युवा महिलाओं और नौसैनिक समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। -
सुरक्षा और सफलता का संदेश
अभियान पूरी तरह सुरक्षित और सफल रहा। किसी भी प्रकार की दुर्घटना या तकनीकी विफलता नहीं हुई, जो महिलाओं की दक्षता और साहस को दर्शाता है।
अधिक जानकारी और अभियान की झलकियाँ देखने के लिए निम्नलिखित वीडियो देखें:
INSV Tarini Crew Returns Home After An 8-Month Long Voyage
इस वीडियो में रूपा ए और दिलना के की साहसिक यात्रा और उनकी उपलब्धियों को देखा जा सकता है।
‘नाविका सागर परिक्रमा II’ अभियान भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। इस मिशन ने यह सिद्ध कर दिया कि महिलाएं किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। रूपा ए और दिलना के की साहसिकता और समर्पण ने भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नई मिसाल स्थापित की है।
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