हैंडशेक विवाद — भारत और पाकिस्तान राजनीतिक टकराव की कहानी

खेल और राजनीति अक्सर अलग-अलग क्षेत्रों में माने जाते हैं, लेकिन कभी-कभी दोनों मिलकर ऐसा असर छोड़ते हैं कि खेल के मैदान पर भी राजनीतिक तनाव दिखाई देने लगता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है Asia Cup 2025 के दौरान, जब भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले के बाद पारंपरिक हैंडशेक (handshake) नहीं हुआ। यह घटना सिर्फ एक खेली प्रथा का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि किस तरह पुरानी दोस्ती और कूटनीतिक “खेल कूटनीति” के प्रतीक अब राजनीतिक तनावों की छाया में आ गये हैं।
इस ब्लॉग में हम समझेंगे
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घटना क्या हुई थी — पूरा वाकया
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राजनीतिक / ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
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दोनों टीमों और बोर्डों की प्रतिक्रिया
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विवाद के कारण और कानूनी / खेल-नियमों का पहलू
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आम जनता और मीडिया में उठी बहस
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भविष्य पर क्या असर होगा
घटना क्या हुई थी
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मैच विवरण: Asia Cup 2025 के ग्रुप ए मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को सात विकेट से हराया। इस मुकाबले के बाद की रस्मों में — जैसा कि क्रिकेट में आम है — दोनों टीमों के खिलाड़ियों और कप्तानों द्वारा हेंडशेक होना था।
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हैंडशेक न होने की स्थिति
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कारण (भारत का दावा) भारत के कप्तान Suryakumar Yadav ने कहा कि यह निर्णय टीम, BCCI और भारतीय सरकार की सहमति से लिया गया था। इसकी वजह Pahalgam में हुए आतंकवादी हमले का जिक्र है, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, और जिसे भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों से जोड़ा है।
राजनीतिक / ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
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भारत-पाकिस्तान रिश्तों में तनाव: दोनों देशों के बीच सीमांकन, आतंकवाद, कश्मीर विवाद, मिसाइल हमले आदि वजहों से लगातार तनाव बना रहता है। मई 2025 में भारत-पाक के बीच एक सैन्य झड़प हुई थी, जिसने तनाव और बढ़ा दिया।
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खेल कूटनीति (Cricket Diplomacy): लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट एक ऐसा माध्यम रहा है जो राजनीतिक दुश्मनी के बीच लोगों को जोड़ने की कोशिश करता रहा है। हैंडशेक और अन्य सम्मान प्रथाएँ इसी भावना का हिस्सा थीं।
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आक्रोश की स्थिति: Pahalgam हमला और उसकी पाकिस्तान-के समर्थन के आरोपों ने सार्वजनिक भावनाएँ भड़काई हैं। ऐसे समय में जब जनता सरकारों से जवाब चाहती है, तो प्रतीकों का महत्व बढ़ जाता है। हैंडशेक की घटना भी इसी श्रंखला का हिस्सा बन गई।
बोर्डों और टीमों की प्रतिक्रिया
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PCB (Pakistan Cricket Board) ने इस व्यवहार को “Unsportsmanlike” कहा, मैच रैफरी Andy Pycroft के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज की। बताया गया कि Pycroft ने पहले से नियम तय किया था कि टॉस के समय हैंडशेक न हो।
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भारत की ओर BCCI और टीम ने कहा कि यह निर्णय सरकार और बोर्ड की सलाह पर लिया गया था, और यह भावनात्मक प्रतिक्रिया थी — “कुछ चीज़ें खेल की भावना से ऊपर होती हैं।”
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मीडियाई और पूर्व खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया: पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी जैसे Rashid Latif और Shoaib Akhtar ने कहा कि खेल को राजनीति से प्रभावित नहीं करना चाहिए।
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ICC / ACC ने इस मामले को लेकर जांच की बात कही, और Pakistan Cricket Board की मांग थी कि Pycroft को टूर्नामेंट से हटा दिया जाए, लेकिन ICC ने इस मांग को खारिज कर दिया।
विवाद के कारण और नियम-नियमावली (Protocol) का दृष्टिकोण
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क्या नियम हैं हैंडशेक के लिए? क्रिकेट के नियमों (Laws of Cricket या ICC कोड ऑफ़ कंडक्ट) में यह स्पष्ट नहीं कि हैंडशेक अनिवार्य है। यह परंपरा है, खेल-अनुशासन / खेल की भावना का हिस्सा है लेकिन कानूनन लिखा प्रावधान नहीं।
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मैच रैफरी की भूमिका: Pycroft पर आरोप है कि उन्होंने कप्तान Salman Ali Agha से कहा कि टॉस के दौरान हैंडशेक न करें। लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि इस निर्देश की सूचना दोनों टीमों को मैच के बाद भी दी गई थी या नहीं।
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स्पोर्ट्समैनशिप बनाम राजनीतिक परिस्थितियाँ: यहाँ पर सवाल उठता है—क्या खेल के मैदान पर सम्मान और गरिमा स्थायी आधार पर बनाए रखी जा सकती हैं, जब राजनीतिक घटनाएँ और राष्ट्रीय सुरक्षा की भावनाएँ इतनी तीव्र हों?
मीडिया, जनता और सामाजिक प्रतिक्रिया
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मीडिया कवरेज यह विवाद सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। कुछ लोग भारत की कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं – कह रहे हैं कि यह आत्मसम्मान और पीड़ितों के प्रति सम्मान का तरीका है। कुछ आलोचक कह रहे हैं कि यह राजनीति को खेल में घुसाना है, और इससे खेल की मानसिकता कमजोर होगी।
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प्रस्तुतियों में विरोध / आलोचना कुछ लोग इस तरह की कार्रवाई को दिखावटी (performative) बता रहे हैं – कि यह सिर्फ एक नाटक है, और असली बदलाव नहीं।
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पाकिस्तान की नाराज़गी PCB अध्यक्ष Mohsin Naqvi ने कहा है कि भारत का व्यवहार खेल की भावना के खिलाफ है। पाकिस्तान की टीम ने प्रस्तुति समारोह (post-match presentation) से कप्तान को वापस बुलाया, और मीडिया वार्ता में पाकिस्तान की ओर से कम प्रतिक्रियाएँ दी गईं।
इस घटना की व्यापक मायने
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खेल-कूटनीति की क्रैशिंग भारत-पाकिस्तान मैचों में अक्सर क्रिकेट एक पुल की तरह काम करता है जो जनता के बीच संवाद और शिष्टाचार बनाए रखता है। अगर हैंडशेक जैसी परंपराएँ टूटें, तो वह पुल कमजोर होता दिखेगा।
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राष्ट्रीय भावना और लोकतांत्रिक दबाव भारत में Pahalgam हमले की घटना से जनता में आक्रोश है, और सरकार/टीम को लगता है कि इस तरह की कार्रवाई उचित है। लेकिन इससे खेल की सीमाएँ क्या होंगी, यह सवाल खड़ा होता है।
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में precedents भविष्य में दूसरे टीमों को भी इसी तरह की स्थिति से गुजरना पड़ सकता है अगर राजनीतिक तनाव हों। ICC और ACC जैसे बोर्डों के लिए यह मुश्किल दौर है – नियमों, खेल-मानवता और राजनीति के बीच संतुलन साधना होगा।
चुनौतियाँ और आलोचनाएँ
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खेल की भावना (Spirit of Cricket) पर चोट: क्रिकेट के नियमों में “sportsmanship” एक महत्वपूर्ण मूल्य है। हैंडशेक, सम्मान, सज्जन व्यवहार इसके हिस्से हैं। जब ये गायब हों, तो खेल का मान कम होता है।
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पर्याप्त संवाद न होना: रिपोर्ट्स कहती हैं कि मैच रैफरी ने शुरुआती टॉस के दौरान हाथ न मिलाने का निर्देश दिया था, लेकिन समाप्ति के समय इस बारे में पाकिस्तान टीम को सुस्पष्ट सूचना नहीं दी गई। इससे अपेक्षाएँ बन गई थीं जो पूरी नहीं हो सकीं। NDTV Sports
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राजनीतिक प्रयोग: आलोचक कह रहे हैं कि इस तरह के संवादात्मक प्रतीक सिर्फ राजनीतिक उद्देश्य से उपयोग किए जा रहे हैं — जनता में भावना जगाने या विरोध-प्रदर्शन के रूप में। इससे खेल का उद्देश्य बदल सकता है।
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खेल संबंधी विनियमों का अभाव: यदि नियमों में स्पष्टता न हो कि क्या क्या प्रथाएँ अनिवार्य हैं या सिर्फ परंपरागत, तो ऐसे विवाद भविष्य में बार-बार होंगे। नियमों की अस्पष्टता से हर मैच में ये घटनाएँ हो सकती हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
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ICC / ACC द्वारा नियमों की समीक्षा: संभव है कि इसके बाद ICC और ACC यह तय करें कि हैंडशेक जैसी रस्मों को स्पष्ट रूप से playing conditions (मैच की शर्तों) में शामिल करना चाहिए कि कब और कैसे होंगे।
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खेल के बीच राजनीतिक भावनाओं का प्रभाव कम या नियंत्रित करने की कोशिश होगी। बोर्ड स्तर पर समझौते या प्रोटोकॉल तैयार हो सकते हैं कि खिलाड़ियों को ऐसी भावनात्मक स्थिति में कैसे संभाला जाए।
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रणनीति-संवेदनशील फैसले: भारत और पाकिस्तान दोनों टीमों को यह देखना होगा कि क्या ऐसे प्रतीकात्मक कार्य लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम ला रहे हैं या केवल विद्रूप संभावनाएँ बढ़ाते हैं।
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प्रशिक्षण और संवाद: टीम प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि खिलाड़ियों को इस तरह की स्थितियों में कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए, मीडिया प्रबंधन कैसे करना चाहिए आदि, ताकि विवाद सीमित हो।
हैंडशेक का यह विवाद सिर्फ एक क्षणिक घटना नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों की तनावपूर्ण स्थिति किस तरह खेल के मैदानों तक फैल रही है।
जहाँ एक तरफ यह भारतीय खिलाड़ियों की भावनात्मक प्रतिक्रिया मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा सकता है कि खेल को राजनीति वहाँ तक सीमित न हो जहाँ सम्मान और खेल की गरिमा प्रभावित हो।
खेल सिर्फ जीत-हार का मुद्दा नहीं है, बल्कि सम्मान, शिष्टाचार, और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का भी विषय है। यदि ये मूल्य खोने लगें, तो सिर्फ रिकॉर्ड बुक में नाम नहीं होगा, बल्कि खेल की आत्मा भी प्रभावित होगी।
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