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भारत में क्वांटम कंप्यूटिंग का विकास एक नई डिजिटल क्रांति 2025

 भारत में क्वांटम कंप्यूटिंग का विकास एक नई डिजिटल क्रांति

भारत ने 2025 में क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे देश की डिजिटल और वैज्ञानिक क्षमताओं में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है। सरकार की पहल, निजी क्षेत्र की भागीदारी और शैक्षिक संस्थानों के सहयोग से भारत अब क्वांटम तकनीक में वैश्विक नेता बनने की ओर अग्रसर है।


 राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM)भारत की डिजिटल क्रांति की नींव

भारत सरकार ने 2023 में ₹6,003.65 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य क्वांटम तकनीकों के विकास और अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना है। इस मिशन के तहत, क्वांटम कंप्यूटिंग, संचार, संवेदन और सामग्री विज्ञान जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता दी गई है।


 भारत का पहला पूर्ण-स्टैक क्वांटम कंप्यूटर ‘इंडस’

2025 में, भारतीय स्टार्टअप QpiAI ने ‘इंडस’ नामक 25-क्यूबिट क्वांटम कंप्यूटर का अनावरण किया, जो देश का पहला पूर्ण-स्टैक क्वांटम कंप्यूटर है। यह कंप्यूटर सुपरकंडक्टिंग तकनीक पर आधारित है और इसमें उन्नत क्वांटम प्रोसेसर, HPC सॉफ़्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म और AI-सक्षम समाधान शामिल हैं। इसकी स्थापना ने भारत को क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर प्रदान किया है। Wikipedia


 अमरावती क्वांटम वैली भारत की क्वांटम हब

अमरावती क्वांटम वैली का विचार


भारत की क्वांटम यात्रा में अमरावती की भूमिका

  1. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का समर्थन – अमरावती क्वांटम वैली इस मिशन को गति देने के लिए एक फोकल पॉइंट होगी।

  2. स्टार्टअप्स और कंपनियों के लिए हब – QNu Labs जैसे भारतीय स्टार्टअप्स और TCS, Infosys जैसी कंपनियां यहां क्वांटम प्रोजेक्ट्स स्थापित कर सकती हैं।

  3. शोध और नवाचार केंद्र – IITs, IISc और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से उच्च स्तरीय शोध।

  4. ग्लोबल सहयोग – IBM, Google, Microsoft जैसी विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर भारत को क्वांटम क्लाउड और हार्डवेयर रिसर्च का वैश्विक गंतव्य बनाना।


 संभावित लाभ

आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में भारत की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग वैली स्थापित की जा रही है, जो 2026 तक तैयार हो जाएगी। इस परियोजना में IBM और Tata Consultancy Services (TCS) के सहयोग से 156-क्यूबिट ‘Quantum System Two’ स्थापित किया जाएगा, जो भारत का सबसे बड़ा क्वांटम कंप्यूटर होगा। इस टेक पार्क में 90,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है और ₹5,000 करोड़ का निर्यात लक्ष्य रखा गया है।


 शैक्षिक और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका

क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में शैक्षिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (VTU), बेलागवी ने बेंगलुरु परिसर में क्वांटम कंप्यूटिंग केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है, जिससे छात्रों और संकाय को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।


 भारत की क्वांटम यात्रा वैश्विक परिप्रेक्ष्य

वैश्विक परिप्रेक्ष्य

  1. अमेरिका

    • Google ने 2019 में क्वांटम सुप्रीमेसी (Quantum Supremacy) हासिल करने का दावा किया।

    • IBM, Microsoft और Amazon जैसे दिग्गज क्वांटम क्लाउड सेवाओं में अग्रणी हैं।

  2. चीन

    • क्वांटम कम्युनिकेशन सैटेलाइट “Micius” के जरिए सुरक्षित संचार का परीक्षण।

    • चीन क्वांटम सुरक्षा और रक्षा में बड़े निवेश कर रहा है।

  3. यूरोप

    • “Quantum Flagship Program” के तहत अरबों यूरो का निवेश।

    • जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड्स क्वांटम हार्डवेयर रिसर्च में आगे।

  4. जापान और कनाडा

    • क्वांटम एल्गोरिद्म और सॉफ़्टवेयर विकास में सक्रिय भूमिका।

    • D-Wave (कनाडा) ने व्यावसायिक क्वांटम कंप्यूटर लॉन्च किया।


 भारत की क्वांटम यात्रा


 भारत की स्थिति वैश्विक तुलना में

भारत की क्वांटम तकनीक में प्रगति वैश्विक स्तर पर भी सराही जा रही है। क्वांटम कंप्यूटिंग बाजार 2025 में $1.79 बिलियन से बढ़कर 2030 तक $7.08 बिलियन तक पहुँचने की संभावना है, जिसमें भारत की घरेलू बाजार की वृद्धि दर 22.9% रहने का अनुमान है।


 भविष्य की दिशा

भारत की क्वांटम यात्रा में कई महत्वपूर्ण पहलें शामिल हैं:

भारत की क्वांटम कंप्यूटिंग यात्रा न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा, बल्कि स्वास्थ्य, कृषि, वित्त और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है। सरकार की रणनीतिक योजनाओं, उद्योग की भागीदारी और शैक्षिक संस्थानों के सहयोग से भारत जल्द ही क्वांटम तकनीक में वैश्विक नेता बनने की दिशा में अग्रसर है।

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