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मध्य प्रदेश विधानसभा में जन विश्वास विधेयक-2.0 Voice Vote के ज़रिए हुआ पारित

जन विश्वास विधेयक 2.0: मध्य प्रदेश विधानसभा ने साधारण अपराधों को किया गैर-आपराधिक, अब सज़ा की जगह जुर्माना

जन विश्वास विधेयक

भोपाल:
मध्य प्रदेश विधानसभा में जन विश्वास विधेयक-2.0 (Jan Vishwas Bill 2.0) को आवाज़ मत (Voice Vote) के ज़रिए पारित कर दिया गया है। यह विधेयक राज्य के 16 विभिन्न कानूनों में लगभग 80 धाराओं को संशोधित करता है, जिससे अब कई मामूली अपराधों के लिए जेल की सज़ा की जगह अब सिर्फ जुर्माने का प्रावधान होगा।

यह बदलाव न केवल शासन को सरल और मानवीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि व्यापारिक माहौल को भी अधिक सहयोगी और भरोसेमंद बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

किन क्षेत्रों में हुए बदलाव?

जन विश्वास विधेयक के तहत जिन 16 अधिनियमों में संशोधन किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से मछली पालन अधिनियम, नगर पालिका अधिनियम, गोदाम अधिनियम, कृषि अधिनियम, और मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट शामिल हैं।

इन सभी अधिनियमों में अब ऐसे अपराध जो तकनीकी या प्रक्रियात्मक त्रुटियों की श्रेणी में आते हैं – जैसे कि समय पर दस्तावेज़ न भरना या नियमों की मामूली अनदेखी – उनके लिए अब जेल नहीं बल्कि आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।

सरकार का क्या है उद्देश्य?

राज्य सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य “अपराधमुक्त शासन व्यवस्था” (Ease of Doing Governance) और “व्यापार करने में आसानी” (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना है।

राज्य के विधि मंत्री ने विधानसभा में कहा,

“कई छोटे व्यापारी या आम नागरिक सिर्फ कागज़ी भूलों की वजह से आपराधिक मामलों में फंस जाते हैं। हमारा मक़सद ऐसे कानूनों को मानवीय और व्यवहारिक बनाना है।”

क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक एक सकारात्मक संकेत है, खासकर उन व्यवसायों और किसानों के लिए जो लंबे समय से सख्त नियमों की वजह से परेशान थे। अब वे बिना आपराधिक मामला झेले, नियमों का पालन कर सकेंगे और सुधार का अवसर मिलेगा।

वहीं आलोचकों का तर्क है कि जुर्माने की राशि पर निगरानी और अधिकारियों को दी गई शक्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है, वरना यह भी एक नई प्रकार की नौकरशाही में बदल सकता है।

निष्कर्ष

जन विश्वास विधेयक-2.0 को राज्य सरकार द्वारा एक “नया युग” बताया जा रहा है, जहां कानून सख्त नहीं, समझदारी भरे होंगे। अब देखना यह होगा कि इस बदलाव का असर ज़मीनी स्तर पर कैसा पड़ता है – क्या सच में जनता का विश्वास बढ़ेगा या यह सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाएगा?

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