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यूरोपीय संघ (EU) की ऊर्जा नीति – उद्देश्य, चुनौतियाँ और भविष्य की 1 रणनीति

यूरोपीय संघ (EU) की ऊर्जा नीति – उद्देश्य, चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा

यूरोपीय संघ (EU) दुनिया का सबसे बड़ा आर्थिक ब्लॉक है और इसकी ऊर्जा नीति न केवल सदस्य देशों बल्कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर असर डालती है। EU की ऊर्जा नीति का मुख्य उद्देश्य है – ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटना, अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना

आज के समय में जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध, और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे गंभीर बन चुके हैं, तब EU की ऊर्जा नीति और भी महत्वपूर्ण हो गई है।


 EU की ऊर्जा नीति का इतिहास


1. प्रारंभिक दौर (1950s–1970s)


2. एकीकृत बाज़ार और पर्यावरण पर ध्यान (1980s–1990s)


3. क्योटो प्रोटोकॉल और नवीकरणीय ऊर्जा (2000s)


4. ऊर्जा संघ और ग्रीन डील (2010s)


5. वर्तमान और हालिया घटनाएँ (2020s–आज तक)

1. EU ऊर्जा नीति के प्रमुख उद्देश्य

  1. ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security)

    • बाहरी देशों, विशेषकर रूस और मध्य-पूर्व पर ऊर्जा निर्भरता को कम करना।

    • गैस, तेल और बिजली की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना।

  2. सतत विकास (Sustainability)

    • नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, हाइड्रो, बायोमास) के उपयोग को बढ़ावा देना।

    • ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में कटौती करना।

  3. प्रतिस्पर्धी ऊर्जा बाज़ार (Competitive Market)

    • ऊर्जा का मुक्त और एकीकृत यूरोपीय बाज़ार बनाना।

    • उपभोक्ताओं को सस्ती और पारदर्शी कीमतों पर ऊर्जा उपलब्ध कराना।

  4. ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency)

    • उद्योगों, परिवहन और घरेलू स्तर पर ऊर्जा उपयोग को अधिक कुशल बनाना।

    • “Energy Efficiency First” सिद्धांत को अपनाना।

  5. जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति

    • 2030 तक कम से कम 55% कार्बन उत्सर्जन में कमी।

    • 2050 तक यूरोप को “Carbon-Neutral Continent” बनाना।


2. EU की मौजूदा ऊर्जा नीति के प्रमुख लक्ष्य

(क) ऊर्जा सुरक्षा

(ख) ग्रीन डील और नेट-ज़ीरो

(ग) ऊर्जा बाज़ार का एकीकरण


3. रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव

1. भूराजनीतिक (Geopolitical) प्रभाव


2. आर्थिक प्रभाव


3. खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव


4. सैन्य और सुरक्षा प्रभाव


5. मानवीय प्रभाव


4. प्रमुख योजनाएँ और कार्यक्रम

  1. REPowerEU (2022) – रूसी ऊर्जा पर निर्भरता घटाने और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने की योजना।

  2. Fit for 55 (2021) – 2030 तक कार्बन उत्सर्जन 55% तक कम करने का लक्ष्य।

  3. Energy Union Strategy (2015) – ऊर्जा आपूर्ति की विविधता, एकीकृत बाज़ार और ऊर्जा दक्षता पर केंद्रित रणनीति।

  4. Just Transition Fund – उन क्षेत्रों और श्रमिकों की मदद करना जो कोयला और पारंपरिक ऊर्जा उद्योग पर निर्भर हैं।


5. अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy)


6. चुनौतियाँ

  1. राजनीतिक निर्भरता – रूस और मध्य-पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति।

  2. ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता – युद्ध और वैश्विक संकट से गैस और तेल महंगे हो जाते हैं।

  3. नवीकरणीय ऊर्जा की तकनीकी सीमाएँ – सौर और पवन ऊर्जा में स्टोरेज और ग्रिड की समस्या।

  4. सदस्य देशों के बीच मतभेद – कुछ देश (जैसे पोलैंड और हंगरी) अभी भी कोयले पर निर्भर हैं, जबकि अन्य (जैसे जर्मनी) परमाणु ऊर्जा के खिलाफ हैं।


7. भविष्य की दिशा

यूरोपीय संघ (EU) की ऊर्जा नीति वैश्विक स्तर पर एक मॉडल है जो ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ विकास को जोड़ती है। हालांकि राजनीतिक दबाव, आर्थिक अस्थिरता और तकनीकी सीमाएँ बड़ी चुनौतियाँ हैं, फिर भी EU का 2050 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य दुनिया के लिए एक प्रेरणा है।

भविष्य में यह नीति केवल यूरोप की ऊर्जा व्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक जलवायु और अर्थव्यवस्था को भी गहराई से प्रभावित करेगी।

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