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श्री माता वैष्णो देवी यात्रा 14 सितंबर से पुन शुरू – यहाँ से पूरी जानकारी

श्री माता वैष्णो देवी यात्रा 14 सितंबर से पुन शुरू – एक विस्तृत मार्गदर्शिका

परिचय

श्री माता वैष्णो देवी मंदिर भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के त्रिकूट पर्वत पर स्थित एक प्रमुख हिन्दू तीर्थस्थल है। यह माता भगवती दुर्गा के अद्वितीय स्वरूप को समर्पित है और यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ दर्शन करने आते हैं। माता वैष्णो देवी को ‘शक्ति की देवी’ के रूप में पूजा जाता है और माना जाता है कि जो श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं, उनके सभी दुःख दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।

यह यात्रा मुख्य रूप से कटड़ा से शुरू होती है, जो जम्मू शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित है। कटड़ा से मंदिर तक का रास्ता लगभग 13 किलोमीटर लंबा है और यह पैदल या पोनी/बैटरी वाहन से तय किया जा सकता है। रास्ते में कई जगह श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थलों, चिकित्सा सुविधाओं और भोजनालयों की व्यवस्था की गई है।

माता वैष्णो देवी यात्रा का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। मान्यता है कि माता ने इस पर्वत पर अपनी तपस्या की थी और यहाँ उन्हें आदिकाल से ही शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता रहा है। यात्रा का यह मार्ग कठिनाई भरा होने के बावजूद, श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

सुरक्षा और सुविधाओं के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड नियमित रूप से मार्ग का निरीक्षण करता है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करता है। यह यात्रा न केवल धार्मिक अनुभव देती है, बल्कि आध्यात्मिक शांति और मानसिक संतोष भी प्रदान करती है।

श्री माता वैष्णो देवी की यात्रा भारत के सबसे पवित्र और लोकप्रिय तीर्थ स्थलों में से एक है। यह यात्रा जम्मू और कश्मीर राज्य के रियासी जिले के कटरा से शुरू होकर त्रिकुटा पर्वत की गुफा मंदिर तक जाती है। यह यात्रा भक्तों के लिए आस्था, भक्ति और साहस का प्रतीक मानी जाती है। हालांकि, 26 अगस्त 2025 को भारी बारिश और भूस्खलन के कारण यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी, लेकिन अब यह 14 सितंबर 2025 से पुनः शुरू होने जा रही है।


यात्रा स्थगन का कारण

श्री माता वैष्णो देवी यात्रा 26 अगस्त 2025 को जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित त्रिकूट पर्वत पर अर्धकुंवारी क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन के कारण अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी। इस हादसे में 34 श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई और 20 से अधिक घायल हुए। भूस्खलन के कारण 271 सीढ़ियाँ बह गईं, जिससे यात्रा मार्ग बाधित हो गया और रेल सेवाएँ भी प्रभावित हुईं।

इस घटना के बाद, प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा को स्थगित किया। राहत और बचाव कार्य जारी रहे, और मौसम में सुधार के बाद मार्ग की मरम्मत की गई। अब, 14 सितंबर से यात्रा फिर से शुरू होने जा रही है, बशर्ते मौसम अनुकूल रहता है।

26 अगस्त 2025 को जम्मू और कश्मीर के रियासी जिले में अत्यधिक बारिश और भूस्खलन के कारण वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भारी नुकसान हुआ। इस घटना में 34 श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई और 20 से अधिक घायल हो गए। इस भूस्खलन ने यात्रा मार्ग को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया, जिससे यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित करनी पड़ी। इसके अलावा, जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग भी कई स्थानों पर बंद हो गया था, जिससे यात्रा की स्थिति और भी जटिल हो गई।


यात्रा की पुन शुरुआत

श्री माता वैष्णो देवी यात्रा 26 अगस्त 2025 को कटरा के त्रिकूट पर्वत पर अर्धकुंवारी क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन के कारण अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी। इस हादसे में 34 श्रद्धालुओं की मृत्यु और 20 अन्य घायल हुए थे। भूस्खलन के कारण यात्रा मार्ग बाधित हो गया था, जिससे यात्रा स्थगित करनी पड़ी।

हालांकि, राहत और मरम्मत कार्यों के बाद, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने 12 सितंबर 2025 को घोषणा की कि यात्रा 14 सितंबर (रविवार) से पुनः शुरू होगी, बशर्ते मौसम अनुकूल रहे। मरम्मत कार्य लगभग पूरा हो चुका है, और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा की बहाली की जा रही है। श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और ट्रैक की स्थिति की जानकारी प्राप्त करें। Amar Ujala

यात्रा के दौरान सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करें और सुरक्षित यात्रा करें।

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने 12 सितंबर 2025 को घोषणा की कि यात्रा 14 सितंबर 2025 से पुनः शुरू होगी, बशर्ते मौसम अनुकूल रहे। इस निर्णय के बाद, प्रशासन ने यात्रा मार्ग की मरम्मत और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी। मार्ग पर आवश्यक मरम्मत कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, और मौसम की स्थिति की निगरानी की जा रही है। यात्रा की शुरुआत से पहले, श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए पंजीकरण और दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।


यात्रा के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश

  1. पंजीकरण और बुकिंग: श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए पूर्व पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। यह पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है।

  2. RFID ट्रैकिंग: यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और निगरानी के लिए RFID ट्रैकिंग प्रणाली लागू की जाएगी। यह प्रणाली श्रद्धालुओं की वास्तविक समय में स्थिति की जानकारी प्रदान करेगी।

  3. सुरक्षा उपाय: मार्ग पर सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी। साथ ही, चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी।

  4. मौसम की स्थिति: यात्रा मार्ग की स्थिति और मौसम की जानकारी के लिए श्रद्धालुओं को श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से अपडेट चेक करना चाहिए।

  5. स्वास्थ्य और फिटनेस: यात्रा के लिए शारीरिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है। मार्ग की लंबाई और चढ़ाई को ध्यान में रखते हुए, श्रद्धालुओं को अपनी शारीरिक स्थिति का मूल्यांकन करना चाहिए।


यात्रा मार्ग और सुविधाएं

1. मुख्य यात्रा मार्ग

2. सुरक्षा और मार्ग का निरीक्षण

3. विश्राम और भोजनालय सुविधाएँ

4. स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाएँ

वरात्रि के अवसर पर विशेष महत्व

14 सितंबर 2025 को यात्रा की पुनः शुरुआत नवरात्रि के पहले दिन से हो रही है, जो विशेष धार्मिक महत्व रखता है। नवरात्रि के दौरान माता वैष्णो देवी के दर्शन का विशेष महत्व है, और इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

श्री माता वैष्णो देवी यात्रा की पुनः शुरुआत श्रद्धालुओं के लिए एक शुभ संकेत है। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्रीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए और अपनी यात्रा को सुरक्षित और सुखद बनाना चाहिए।

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