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सांस्कृतिक परंपरा और एकजुटता से खुल रही नई संभावनाओं के दरवाज़े – जानिए कैसे!

 भारत और प्रवासी भारतीयों की साझा सांस्कृतिक परंपरा

1. विश्वभर में प्रवासी भारतीयों की सांस्कृतिक भागीदारी

सांस्कृतिक

1.1 गणेश उत्सव में रिकॉर्ड-तोड़ लड्डू नीलामी (हैदराबाद और विदेशों में)

हैदराबाद में गणेश महोत्सव के दौरान विभिन्न समुदायों ने लड्डू नीलामी आयोजित की, जिसमें 10 कि.ग्रा. का लड्डू 2.32 करोड़ रुपए में बिक गया—सभी धन धार्मिक और चैरिटेबल उद्देश्यों के लिए। इसी परंपरा का विस्तार विदेशी Telugu समुदायों में भी देखा गया—कैनेडा में 10 कि.ग्रा. लड्डू के लिए US$18,116 (लगभग ₹15.1 लाख), ऑस्ट्रेलिया में AUD 4,694 (करीब ₹2.55 लाख) में नीलामी हो चुकी है। यह महोत्सव भारतीय सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक पहुँच और समुदाय की एकजुटता का प्रतीक है।

1.2 Mississauga, कनाडा में गंगा आरती की प्रतिकृति पर सांस्कृतिक प्रतिक्रिया

कनाडा में Credit River किनारे भारतीयों द्वारा आयोजित गंगा आरती ने ऑनलाइन बहस को जन्म दिया। कुछ सामाजिक प्लेटफॉर्म्स ने इस सांस्कृतिक प्रदर्शन की सराहना की, वहीं अन्य ने इस पवित्र अनुष्ठान को नदी के बाहर करने पर सवाल उठाए। यह घटना प्रवासी बहुलता और भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों की भावनात्मक और वैश्विक व्याख्या का चिंतन है


2. कला, फिल्म और लोक कथा सांस्कृतिक उत्सवों की बहार

2.1 ‘Udaipur Tales’ – अंतर्राष्ट्रीय कहानी-कहानी (Storytelling) महोत्सव

उदयपुर में जनवरी 2025 में आयोजित 6वीं ‘Udaipur Tales’ कहानी महोत्सव ने लोककथा और मौखिक परंपराओं को पुनर्जीवित किया—जिसमें 13वीं सदी की “जुमलेबाज़ी” (Amir Khusrau से प्रेरित) जैसे कलात्मक रूप शामिल थे, साथ प्रमुख कथावाचक जैसे देवदत्त पटनायक, मीता वशिष्ठ उपस्थित थे। यह आयोजन सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मौखिक कला का आधुनिक प्रयोग दर्शाता

2.2 NIFFA – ऑस्ट्रेलिया में भारतीय फिल्म महोत्सव

2025 में ऑस्ट्रेलिया में पहली बार आयोजित National Indian Film Festival of Australia (NIFFA) ने सात शहरों—सिडनी, मेलबर्न, कैनबरा, आदि—में भारतीय सिनेमा की लौ लॉन्च की। 40 से अधिक फिल्मों के साथ इस महोत्सव ने ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों के बीच भारतीय संस्कृति और डायस्पोरा के पारस्परिक संबंध को मजबूत किया

2.3 North East & Imphal में फिल्म महोत्सवों की सांस्कृतिक महत्ता


3. वैश्विक उत्सव प्रवासी समुदायों की साझा विरासत

3.1 भारत में Pravasi Bharatiya Divas 2025 (ओडिशा)

जनवरी 2025 में भुवनेश्वर में आयोजित 18वाँ PBD, जिसमें 75 देशों से करीब 6,000 NRIs शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आरंभ किए गए कार्यक्रम का विषय था “Diaspora’s Contribution to a Viksit Bharat।” इस कार्यक्रम में पास-डीप डेस्टिनेशन्स और सांस्कृतिक आयोजनों का मिश्रण था—परी Beach Festival, पारंपरिक नृत्य, कुलीन लोक हस्तशिल्प, ड्रोन्स व लाइट शो सम्मिलित थे।

3.2 FIA NRI Conclave, भुवनेश्वर: कला और अर्थव्यवस्था का संगम

Pravasi Divas से पहले, FIA द्वारा Bhubaneswar में आयोजित 5वीं NRI Conclave ने सांस्कृतिक प्रदर्शन (Odissi, Ganesha Vandana) और व्यवसायिक चर्चाओं को जोड़ते हुए सत्र आयोजित किए। “Sarve Bhavantu Sukhinah” (May all be happy) थीम ने वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया।

3.3 Cupertino-Bhubaneswar Sister-City पहल

Cupertino और Bhubaneswar के बीच सौहार्दपूर्ण संपर्क ने साझा सांस्कृतिक कार्यक्रम और युवा नेतृत्व शिखर सम्मेलन को बढ़ा दिया। इसमें Konark Festival, Odisha Day, व सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल हैं। यह पहल स्थानीय और संयुक्त सांस्कृतिक पहलों को मजबूत करती है।


4. सामाजिक सद्भाव और चुनौतियाँ प्रवासी भारतीय समुदायों की संवेदनशीलता

प्रवासी भारतीय समुदाय (NRI/PIO) जहाँ भी रहते हैं, वहाँ अपनी मेहनत, संस्कार और संस्कृति के माध्यम से एक सकारात्मक पहचान बनाते हैं। वे स्थानीय समाज में घुलमिलकर रहते हैं और भारतीय परंपराओं का मान बढ़ाते हैं। लेकिन इसके साथ-साथ उन्हें कई तरह की चुनौतियों और संवेदनशील परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ता है।

1. नस्लवाद और भेदभाव

कई देशों में भारतीय प्रवासियों को नस्लीय टिप्पणियों और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में हुए आप्रवासी-विरोधी प्रदर्शनों ने इस संवेदनशीलता को उजागर किया। भारत सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और NRIs की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

2. सांस्कृतिक पहचान का संतुलन

प्रवासी भारतीय दोहरी जिम्मेदारी निभाते हैं—एक तरफ वे स्थानीय समाज में शामिल होते हैं, दूसरी ओर वे अपनी भारतीय संस्कृति को भी जीवित रखते हैं। त्योहारों, भाषा, खानपान और पारंपरिक आयोजनों को बचाए रखना उनके लिए गर्व का विषय है, लेकिन कभी-कभी यही बातें उन्हें स्थानीय समाज से अलग भी कर देती हैं।

3. कानूनी और सामाजिक चुनौतियाँ

प्रॉपर्टी विवाद, टैक्स नियम, वीज़ा या नागरिकता संबंधी जटिलताएँ NRIs के लिए आम चुनौतियाँ हैं। कई बार उनकी शिकायतों के समाधान में देरी होती है, जिससे समुदाय में असंतोष फैलता है।

4.1 ऑस्ट्रेलिया में आप्रवासी-विरोधी आंदोलन और भारतीय समुदाय की प्रतिक्रिया

ऑस्ट्रेलिया में “March for Australia” विरोध के दौरान भारतीय प्रवासी समुदाय निशाने पर रहे। भारत सरकार ने प्रवासियों की सुरक्षा पर निगरानी का आश्वासन दिया। लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया में Australiyan प्रशासन ने स्थानीय नेताओं की ओर से समर्थन व्यक्त किया। 

4.2 विरोध प्रदर्शन में NRI की उपस्थिति से मिली प्रतिक्रिया

मेलबोर्न में एक NRI, जिसने विरोध प्रदर्शनों में भाग लेकर स्थानीय शक्ति का समर्थन करने की कोशिश की—उसे उपेक्षित और अपमानित किया गया। इस घटना ने विरोध के भीतर विरोधाभासी नजरिए और प्रवासी असंतोष को उजागर किया।


5. सांस्कृतिक सम्मान और प्रवासी योगदान

प्रवासी भारतीय केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी दुनिया भर में भारत की पहचान को मज़बूती देते हैं। जिस देश में वे रहते हैं, वहाँ भारतीय परंपराओं और जीवनशैली का सम्मान बढ़ाना उनका सबसे बड़ा योगदान है।

1. भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रचार

5.1 Rachana Awards: NRI उद्यमिता का सम्मान

Rachana Awards (2023–25) ने पांच विजेताओं को सम्मानित किया, जिनमें एक दुबई स्थित NRI उद्यमी — Pratap Mendonca — ने Indo-UAE व्यापार संबंधों को मजबूत करने में योगदान दिया। शोभा Mendonca को महिलाएं एवं समाज कल्याण में उनकी भूमिका के लिए अवार्ड मिला।

5.2 वर्चुअल और स्थानीय उत्सवों के माध्यम से सांस्कृतिक समागम

5.3 Vir Das का आधुनिक भारत के लिए आमंत्रण

कॉमेडियन Vir Das ने प्रवासी भारतीयों को उन रूढ़ियों से बाहर निकलने का आग्रह किया जो उनके माता-पिता की यादों पर आधारित हैं। उन्होंने NRIs को आधुनिक भारत देखने के लिए घर लौटने का आमंत्रण दिया, ताकि वे परिवर्तनशील और आधुनिक भारत को महसूस कर सकें।

5.4 प्रधानमंत्री मोदी का त्रिनिदाद और टोबैगो दौरा

प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार 1999 के बाद त्रिनिदाद और टोबैगो का दौरा किया, जहाँ उन्हें भोजपुरी छउताल नृत्य से स्वागत मिला। वहां उन्होंने प्रवासी भारतीयों के योगदानों को स्वीकार किया और भारत के साथ सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्स्थापित किया


 रोमांचक, सकारात्मक और सांस्कृतिक विविधता का प्रतिबिंब

यह समग्र लेख न केवल व्यापक जानकारी प्रदान करता है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि कैसे वैश्विक भारतीय समुदाय विविध संस्कृतियों, नई पहलों और बदलते दौरों में अपनी अस्मिता और साझा परंपरा को संरक्षित रख रहे हैं।

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