सीपी राधाकृष्णन – एक परिचय
पूरा नाम: चिन्नप्पा पेरियार राधाकृष्णन
पद: भारत के 15वें उपराष्ट्रपति
शपथ ग्रहण: 12 सितंबर 2025
सीपी राधाकृष्णन भारतीय राजनीति के अनुभवी और सम्मानित नेता हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवा से की और धीरे-धीरे राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनके व्यक्तित्व में संयम, नीति-निर्माण में कुशलता और समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता झलकती है।
राधाकृष्णन ने शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके दृष्टिकोण में समानता, न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों का विशेष महत्व है। उपराष्ट्रपति के रूप में उनकी भूमिका न केवल संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) की अध्यक्षता करना है, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाना और राजनीतिक संतुलन बनाए रखना भी है।
उनकी प्रमुख विशेषताएँ:
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अनुभवी प्रशासक: लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव के साथ नीति-निर्माण में दक्ष।
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समानता और न्याय में विश्वास: समाज के सभी वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित करने में सक्रिय।
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संवेदनशील नेतृत्व: विवादों और राजनीतिक तनाव के समय संतुलित दृष्टिकोण अपनाने में सक्षम।
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शिक्षा और सामाजिक विकास में योगदान: शिक्षा और समाज सुधार के लिए कई पहल की।
सीपी राधाकृष्णन का चुनाव और शपथ ग्रहण भारतीय राजनीति में संवैधानिक स्थिरता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।
चंद्रपुरम पोनुसामी राधाकृष्णन, जिन्हें सीपी राधाकृष्णन के नाम से जाना जाता है, 4 मई 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में जन्मे थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा तिरुप्पुर में प्राप्त की और बाद में बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की डिग्री हासिल की। राधाकृष्णन का राजनीतिक जीवन भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़ा हुआ है, और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने 1998 और 1999 में लोकसभा चुनावों में कोयंबटूर से जीत हासिल की थी। इसके बाद, वे पार्टी के विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे और 2016 से 2020 तक कोयर बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे।
राज्यपाल के रूप में कार्यकाल
राधाकृष्णन ने 2023 में झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद, 31 जुलाई 2024 को उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल के दौरान, उन्होंने राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों में सक्रिय भूमिका निभाई।
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025
भारत में उपराष्ट्रपति का चुनाव हर 5 साल में होता है। 2025 का चुनाव भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के पद के लिए आयोजित किया गया। उपराष्ट्रपति का पद संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि वे राज्यसभा (संसद के उच्च सदन) के अध्यक्ष भी होते हैं और राष्ट्रपति के अस्थायी अनुपस्थित रहने पर उनके कर्तव्यों का निर्वाह करते हैं।
चुनाव प्रक्रिया
उपराष्ट्रपति का चुनाव भारत के निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इसमें शामिल हैं:
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संसद के दोनों सदन के सभी निर्वाचित सदस्य (लोकसभा और राज्यसभा)।
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राज्यसभा और लोकसभा के निर्वाचित सदस्य ही वोट डाल सकते हैं; राज्य सरकारों के प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं होते।
चुनाव में गोपनीय मतदान प्रणाली अपनाई जाती है और उम्मीदवारों के लिए बहुमत मत आवश्यक होता है। यदि कोई उम्मीदवार पहली बार बहुमत प्राप्त नहीं करता है, तो अधिकतम मत प्राप्त करने वाले दो उम्मीदवारों के बीच दूसरी पारी आयोजित की जाती है।
2025 के चुनाव की विशेषताएँ
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सीपी राधाकृष्णन को कई प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन मिला।
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चुनाव राजनीतिक संतुलन और पारदर्शिता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना गया।
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इस बार चुनाव में लोकप्रियता, अनुभव और संवैधानिक समझ को प्राथमिकता दी गई।
परिणाम
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सीपी राधाकृष्णन विजयी रहे और 12 सितंबर 2025 को उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
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उनका चुनाव इस बात का संकेत है कि भारतीय राजनीति में संवैधानिक स्थिरता और अनुभव को महत्व दिया जा रहा है।
चुनाव का महत्व
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उपराष्ट्रपति का चुनाव केवल एक पद के लिए नहीं, बल्कि संसद और लोकतंत्र की कार्यप्रणाली के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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यह चुनाव यह तय करता है कि राज्यसभा की अध्यक्षता और संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वाह किस प्रकार होगा।
उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव
2025 में उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की आवश्यकता पड़ी, जब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जुलाई में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में नामित किया। उनकी उम्मीदवारी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सहयोगी दलों ने समर्थन दिया।
शपथ ग्रहण समारोह
समारोह का आयोजन
12 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सीपी राधाकृष्णन को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी इस समारोह में शामिल हुए। यह समारोह भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और संस्थाओं की निरंतरता का प्रतीक था।
कार्यभार ग्रहण
शपथ ग्रहण के बाद, सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यभार की शुरुआत की। उन्होंने भारतीय संविधान की रक्षा और संसद की कार्यवाही में निष्पक्षता बनाए रखने की शपथ ली। उनका यह कार्यभार भारतीय राजनीति में एक नई दिशा और ऊर्जा का संकेत है।
उपराष्ट्रपति पद की भूमिका
संविधानिक महत्व
भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। यह पद भारतीय संसद के सभापति के रूप में कार्य करता है और राष्ट्रपति के अभाव में उनकी भूमिका निभाता है। उपराष्ट्रपति का कार्य संविधान की रक्षा करना, संसद की कार्यवाही में निष्पक्षता बनाए रखना, और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है।
सीपी राधाकृष्णन का दृष्टिकोण
सीपी राधाकृष्णन ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में कहा कि वे उपराष्ट्रपति के रूप में संविधान की रक्षा करेंगे और संसद की कार्यवाही में निष्पक्षता बनाए रखेंगे। उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और संस्थाओं की निरंतरता पर जोर दिया।
राजनीतिक यात्रा एक सिंहावलोकन
प्रारंभिक चरण
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राधाकृष्णन ने अपने करियर की शुरुआत शासन और प्रशासन के क्षेत्र से की।
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शिक्षा और समाज सुधार में उनकी गहरी रुचि रही, जिसने उन्हें सामाजिक न्याय और समानता के मुद्दों पर सक्रिय बनाया।
राजनीतिक उपलब्धियाँ
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विभिन्न राजनीतिक पदों पर रहते हुए उन्होंने नीति-निर्माण और प्रशासनिक सुधार में योगदान दिया।
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उनके नेतृत्व में कई सामाजिक और शैक्षिक पहलें शुरू की गईं, जिनका उद्देश्य समान अवसर और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देना था।
उपराष्ट्रपति बनने तक का सफर
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लंबे प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव के कारण उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए प्रमुख उम्मीदवार माना गया।
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उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों और सांसदों का समर्थन प्राप्त हुआ, जो उनकी संतुलित और निष्पक्ष नेतृत्व शैली को दर्शाता है।
नेतृत्व की विशेषताएँ
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संविधान के प्रति प्रतिबद्धता: सभी संवैधानिक कर्तव्यों का निष्पक्ष निर्वाह।
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संतुलित दृष्टिकोण: राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संतुलन बनाए रखना।
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सामाजिक और शैक्षिक पहल: समाज और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय योगदान।
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अनुभवी प्रशासक: नीति-निर्माण और शासन में गहरी समझ।
सीपी राधाकृष्णन की यह राजनीतिक यात्रा यह दर्शाती है कि अनुभव, निष्पक्षता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता के साथ नेतृत्व कैसे स्थापित किया जा सकता है। उनका चुनाव उपराष्ट्रपति पद पर उन्हें न केवल संसद के उच्च सदन की अध्यक्षता के लिए बल्कि देश में संवैधानिक स्थिरता बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण बनाता है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
सीपी राधाकृष्णन का जन्म 4 मई 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा तिरुप्पुर में प्राप्त की और बाद में बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की डिग्री हासिल की।
राजनीतिक करियर
राधाकृष्णन ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से की। 1974 में वे भारतीय जनसंघ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य बने। 1998 और 1999 में लोकसभा चुनावों में कोयंबटूर से जीत हासिल की। इसके बाद, वे पार्टी के विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे और 2016 से 2020 तक कोयर बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे।
राज्यपाल के रूप में कार्यकाल
राधाकृष्णन ने 2023 में झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद, 31 जुलाई 2024 को उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल के दौरान, उन्होंने राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों में सक्रिय भूमिका निभाई।
उपराष्ट्रपति बनने के बाद की संभावनाएँ
1. राज्यसभा की अध्यक्षता
उपराष्ट्रपति का सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य राज्यसभा (संसद के उच्च सदन) की अध्यक्षता करना है।
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सांसदों के बीच बहस और निर्णय प्रक्रिया को संतुलित करना।
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विधायी प्रक्रियाओं में निष्पक्षता बनाए रखना।
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संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दों पर संतुलित निर्णय देना।
2. संवैधानिक स्थिरता का रखरखाव
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राष्ट्रपति की अनुपस्थिति या असमर्थता में उनके कर्तव्यों का निर्वाह।
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संकट और राजनीतिक तनाव के समय लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखना।
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संवैधानिक मूल्यों और नियमों का पालन सुनिश्चित करना।
3. संसदीय सुधार और नवाचार
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राज्यसभा में कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने के लिए पहल करना।
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नीति-निर्माण और कानून निर्माण में सांसदों के सहयोग को बढ़ावा देना।
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शिक्षा, सामाजिक विकास और समानता के मुद्दों पर संसदीय चर्चा को प्रोत्साहित करना।
4. भविष्य की राजनीतिक संभावनाएँ
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कई बार उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार माना जाता है।
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उनकी संतुलित नेतृत्व शैली और अनुभव उन्हें देश के उच्चतम संवैधानिक पदों के लिए संभावित बनाता है।
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राजनीतिक दलों और जनता के बीच उनकी छवि एक निष्पक्ष और अनुभवी नेता के रूप में मजबूत है।
5. सामाजिक और शैक्षिक योगदान
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उपराष्ट्रपति के रूप में उनका अनुभव समाज और शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल शुरू करने में सहायक होगा।
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युवा नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन देना।
संविधान की रक्षा
सीपी राधाकृष्णन ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में कहा कि वे उपराष्ट्रपति के रूप में संविधान की रक्षा करेंगे और संसद की कार्यवाही में निष्पक्षता बनाए रखेंगे। उनका यह दृष्टिकोण भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।
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