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सूर्य-ग्रहण के प्रभाव 21 सितंबर 2025 — समसप्तक योग और राशियों पर असर की पूरी जानकारी

 सूर्य-ग्रहण के प्रभाव — वैज्ञानिक, धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण

सूर्य-ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। यह घटना न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में भी इसका गहरा प्रभाव माना गया है।

21 सितंबर 2025 को होने वाला सूर्य-ग्रहण खास माना जा रहा है क्योंकि इस दौरान सूर्य और शनि के बीच समसप्तक योग बन रहा है, जो कुछ राशियों पर नकारात्मक असर डाल सकता है। आइए सूर्य-ग्रहण के प्रभाव को विस्तार से समझते हैं।


 सूर्य-ग्रहण क्या है?


 वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रभाव

  1. खगोलीय अध्ययन सूर्य-ग्रहण खगोलशास्त्रियों के लिए अनुसंधान का महत्वपूर्ण अवसर होता है।

  2. सौर गतिविधियाँ इस दौरान सूर्य के कोरोना और सतह पर विशेष अध्ययन किया जाता है।

  3. पर्यावरण पर असर

    तापमान में अचानक गिरावट देखी जाती है।

    • पशु-पक्षियों का व्यवहार बदल जाता है।

    • पौधों की गतिविधियों में भी फर्क आता है।


 धार्मिक मान्यताएँ

भारतीय संस्कृति में सूर्य-ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता। इसे “सूतिकाल” कहा जाता है।


ज्योतिषीय दृष्टिकोण से प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य-ग्रहण को अत्यंत महत्वपूर्ण घटना माना गया है क्योंकि यह मानव जीवन और ग्रहों की दशाओं को प्रभावित करता है।


सूर्य-ग्रहण 2025 का ज्योतिषीय महत्व

21 सितंबर 2025 का सूर्य-ग्रहण कन्या राशि और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा।


राशियों पर प्रभाव

 चार राशियों पर संभावित प्रभाव

नीचे उन चार राशियों के बारे में बताया गया है जिन पर ग्रहण + समसप्तक योग का विशेष प्रभाव पड़ सकता है, और किस प्रकार के असर हो सकते हैं:

राशि कौन-सी स्थिति बनती है संभावित समस्याएँ / चुनौतियाँ
मेष (Aries) छठे भाव में ग्रहण लगने का योग है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ, आमदनी में उतार-चढ़ाव, काम-काज में तनाव, घरेलू रिश्तों में खटास संभव है।
सिंह (Leo) ग्रहण का प्रभाव दूसरे भाव में है। करियर में अस्थिरता, काम में बाधाएँ, वरिष्ठों/सहकर्मियों से टकराव, आत्मविश्वास में कमी हो सकती है।
कन्या (Virgo) यह ग्रहण उनकी अपनी राशि में हो रहा है। मानसिक तनाव बढ़ सकता है, पारिवारिक व घरेलू नातों में असमंजस्य हो सकता है, निर्णय लेने में झिझक/विलंब हो सकता है। Maharashtra Times+1
कुंभ (Aquarius) आठवें भाव में ग्रहण लगने का योग बताया गया है। छुपी समस्याएँ उभर सकती हैं, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ खासकर पेट या आंत से जुड़ी, मेहनत का फल तुरंत न मिलना, मानसिक चिंता। Maharashtra Times+1

 शुभ प्रभाव

  1. वृषभ (Taurus) आर्थिक लाभ और रुके हुए कार्य पूरे होंगे।

  2. सिंह (Leo) मान-सम्मान में वृद्धि और कार्यक्षेत्र में सफलता।

  3. धनु (Sagittarius) विदेश यात्रा और शिक्षा में प्रगति।

  4. मीन (Pisces) पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक प्रगति।

 अशुभ प्रभाव

  1. मेष (Aries) स्वास्थ्य समस्याएँ और मानसिक तनाव।

  2. कर्क (Cancer) पारिवारिक विवाद और आर्थिक नुकसान।

  3. तुला (Libra) करियर में अड़चनें और दांपत्य जीवन में तनाव।

  4. मकर (Capricorn) धन हानि और नौकरी में अस्थिरता।


सूर्य-ग्रहण के दौरान सावधानियाँ

  1. गर्भवती महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिए।

  2. ग्रहण के दौरान भोजन और पानी का सेवन वर्जित है।

  3. ग्रहण के समय मंत्र जप, ध्यान और स्तोत्र पाठ करना शुभ होता है।

  4. बच्चों और बुजुर्गों को ग्रहण देखने से बचना चाहिए।

  5. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान करना चाहिए।


 ग्रहण दोष निवारण उपाय

  1. सूर्य मंत्र का जप करें: “ॐ आदित्याय नमः”

  2. स्नान के बाद भगवान विष्णु या सूर्य देव की पूजा करें।

  3. गरीबों को अन्न, वस्त्र और दान करें।

  4. तुलसी को जल अर्पित करें और गाय को रोटी खिलाएँ।

  5. ग्रहण काल में मौन रहकर ध्यान करें।


 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

सूर्य-ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक, धार्मिक और ज्योतिषीय तीनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

21 सितंबर 2025 का सूर्य-ग्रहण कुछ राशियों के लिए चुनौतियाँ लेकर आएगा, वहीं कुछ राशियों के लिए नए अवसर भी लाएगा। इसलिए इस दिन सही सावधानी और उपाय अपनाकर जीवन को संतुलित किया जा सकता है।

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