उत्तरकाशी में कुदरत का कहर: धराली गांव में बादल फटा, दर्जनों लापता, तबाही का मंजर
बादल फटा और सब कुछ बदल गया…
5 अगस्त की शाम उत्तरकाशी के धराली गांव में क्लाउडबर्स्ट ने ऐसा तांडव मचाया कि पूरा इलाका एक झील बन गया। तेज़ बारिश और बादल फटने से केहरगंगा नदी में अचानक उफान आया, और उसके साथ बह गए – होटल, दुकानें, घर, सड़कें और लोगों की ज़िंदगियाँ।
भारी जान‑माल की क्षति
-
5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि संख्या बढ़ सकती है।
-
50 से 100 लोग लापता, जिनमें से 60 से ज़्यादा लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है।
-
50+ होटल और 40–50 घर बह गए।
बचाव में जुटी सेना, ITBP, NDRF और SDRF
-
भारतीय सेना की Ibex ब्रिगेड के साथ हेलिकॉप्टर (Chinook, Mi-17) राहत कार्य में लगे हैं।
-
अब तक 190 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 13 सैनिक भी शामिल हैं।
-
ऋषिकेश और देहरादून AIIMS में मेडिकल सहायता, हर्षिल और झालां में राहत शिविर बनाए गए
सरकार और प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया
-
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ज़ोन का दौरा किया और राहत कार्य को “War Footing” पर करने के निर्देश दिए।
-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति पर नजर रखते हुए हरसंभव सहायता का वादा किया।
-
गृह मंत्री अमित शाह ने 7 विशेष बचाव टीम भेजीं और स्थिति की निगरानी की।
पर्यावरण और भविष्य का डर
-
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लेशियल स्नाउट का टूटना इस आपदा का मुख्य कारण हो सकता है।
-
धराली क्षेत्र एको-सेंसिटिव जोन में आता है, लेकिन फिर भी 6000 से अधिक देवदार के पेड़ों की कटाई ने पारिस्थितिकी को कमज़ोर किया।
-
जलवायु परिवर्तन, अनियोजित निर्माण, और लगातार वनों की कटाई से यह इलाका बार-बार खतरे में आ सकता है।
पर्यटकों की जान आफत में
-
महाराष्ट्र के 149 चारधाम तीर्थयात्री, जिनमें पुणे के 24 पूर्व छात्र भी हैं, संपर्क से बाहर हैं।
-
लगभग 76 लोग सुरक्षित हैं, लेकिन शेष का पता नहीं।
-
सड़कों पर भूस्खलन, यात्रा मार्गों पर बाढ़, और यातायात ठप हो गया है।
ये सिर्फ त्रासदी नहीं, चेतावनी है…
धराली की घटना हमें क्या सिखाती है?
-
प्राकृतिक चेतावनी: हिमालय में जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर टूटना अब सामान्य होता जा रहा है।
-
पर्यावरणीय लापरवाही: पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और इको-ज़ोन में निर्माण कार्यों ने आपदा को और बड़ा बनाया।
-
प्रशासनिक चूक: पूर्वानुमान और अलर्ट सिस्टम समय पर काम करता, तो जानें बचाई जा सकती थीं।
🔍 मुख्य तथ्य संक्षेप में:
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| घटना | 5 अगस्त 2025, धराली गांव |
| कारण | बादल फटना / ग्लेशियर टूटना |
| मृतक | कम से कम 5, 50–100 लापता |
| राहत टीम | सेना, ITBP, NDRF, SDRF |
| पर्यटक संकट | 149 यात्री प्रभावित |
| प्रशासनिक प्रतिक्रिया | PM मोदी, CM धामी, गृहमंत्री शाह सक्रिय |
| चिंताएं | जलवायु, वन कटाई, अनियंत्रित निर्माण |
“अब भी नहीं चेते तो कब?”
धराली की त्रासदी एक सवाल छोड़ती है – क्या विकास की दौड़ में हम अपने पर्यावरण और जीवन दोनों को मिटा रहे हैं?
