MUDA घोटाला पूरी कहानी, विवाद और वर्तमान स्थिति
मिस्सूरु शहरी विकास प्राधिकरण (Mysuru Urban Development Authority — MUDA) से जुड़े इस मामले ने सिर्फ कर्नाटक की राजनीति ही नहीं, बल्कि देशभर में सुर्खियाँ बटोरी हैं। इस मामले में आरोप हैं कि MUDA के ज़रिए जमीन-आवंटन (site allotment) की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुईं, और कई मामलों में लाभार्थियों की पहचान, दस्तावेज़ी प्रक्रिया और सरकारी आदेशों का उल्लंघन किया गया। आइए इस स्कैम की शुरुआत, मुख्य आरोपी, आरोप, जांच-प्रक्रिया और संभावित नतीजों को विस्तार से देखें।
1. MUDA क्या है?
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MUDA = Mysuru Urban Development Authority, जो कि मिस्सूरु और आसपास के इलाकों में शहरी विकास, सिविल साइटशिप, प्लॉट्स, लेआउट, ज़मीनी संरचनाएँ (infrastructure) आदि के लिए ज़िम्मेदार है। Wikipedia
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यह प्राधिकरण सार्वजनिक और निजी भूमि अधिग्रहण, आवंटन और विकास योजनाओं से जुड़ा होता है।
2. स्कैम की शुरुआत एवं आरोप
(i) 50:50 योजना (50-50 scheme)
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MUDA ने एक योजना लागू की थी, जिसे “50:50 सैद्धांतिक योजना” कह सकते हैं, जिसमें जहाँ जमीन अधिग्रहित की जाती है, वहाँ भूमि के मालिकों (land losers) को अधिग्रहित की गई ज़मीन के बदले विकसित की गई साइट (developed site) का 50% हिस्सा देने का प्रावधान था, और बाकी 50% MUDA के पास रहता था।आरोप है कि इस योजना का दुरुपयोग हुआ: कुछ लोगों को ऐसे प्लॉट्स दिए गए जो उनकी ज़मीन से अधिक मूल्य वाले थे, या नियमों का उल्लंघन कर उन्हें “विकसित साइट” मिल गई।
(ii) Parvathi (मुख्यमंत्री की पत्नी) का नाम
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विवाद का एक बड़ा केन्द्र है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी, पार्वती सिद्धारमैया को 14 प्लॉट आवंटित किए गए थे, जो आरोपियों का दावा है कि नियमों के विरुद्ध और ज़मीन के मालिक को मिलने वाली विकसित साइटों से अधिक मूल्य की थीं।
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ज़मीन “Kesare” गांव में थी — लगभग 3.16 एकड़; MUDA ने इसे अधिग्रहित किया और विकसित लेआउट बनाया गया, और बदले में विकसित साइट आवंटन किया गया।
(iii) आरोपों में क्या क्या शामिल है
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नियमों और सरकारी आदेशों का उल्लंघन।
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दस्तावेज़ी प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा, अधूरी या फर्जी जानकारी, और कुछ मामलों में अलॉटमेंट लेटर की डेट पीछे करना (backdating) जैसी चीजें।
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लाभार्थियों की पहचान में अनियमितताएँ, ज़मीन मालिकों को उचित मुआवज़ा न देना।
3. जांच और कानूनी कार्रवाई
(i) Lokayukta और अन्य शिकायतें
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कुछ नागरिक/सक्रिय कार्यकर्ता (activists) जैसे Snehamayi Krishna, T J Abraham, Pradeep Kumar आदि ने शिकायतें दर्ज करायी हैं कि इस मामले में बहुत बड़े धन-राशि की अनियमितताएँ हुई हैं।
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राज्य सरकार ने Justice P. N. Desai आयोग (Commission) की नियुक्ति की ताकि मामले की तकनीकी और दस्तावेज़ी जांच हो सके।
(ii) ED (Enforcement Directorate) की चली कार्रवाई
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पूर्व MUDA कमिश्नर G. T. Dinesh Kumar को ED ने PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के अंतर्गत गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर site allotments में अवैध लाभ प्राप्त किया।
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ED ने कई प्लॉट्स/संपत्तियों को जब्त किया है जो “front/dummy” नामों पर थीं, जिनका बाज़ार मूल्य करोड़ों रुपये का है। उदाहरण के लिए, 92 प्लॉट्स जो विभिन्न व्यक्तियों या सहकारी समितियों के नाम पर हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹100 करोड़ है।
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कुल जब्त संपत्तियों (immovable properties) की कीमत अब तक लगभग ₹400 करोड़ बतायी जा रही है।
(iii) सरकारी और राजनीतिक पहल
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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उन्होंने इस मामले में कोई भूमिका नहीं है, और आरोपों को ख़ारिज किया है।
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सुप्रीम कोर्ट / उच्च न्यायालय स्तर पर कुछ आदेश जारी हुए हैं जिनमें अचूक प्रमाण न होने के कारण कुछ अभियोग खारिज हो चुके हैं, या अभियुक्तों को राहत मिली है।
4. स्कैम की अर्थ-व्यवस्था पर प्रभाव और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
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विपक्षी दलों का दावा है कि यह स्कैम ₹3,000-₹4,000 करोड़ तक का हो सकता है, यदि सभी मामलों की जांच की जाए।
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जनप्रतिरोध और सामाजिक सक्रियता बढ़ी है। मीडिया और नागरिक समाज इस विषय पर चिंता जता रहे हैं कि जमीन मालिकों के हक़ का हनन हुआ है।
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बीजेपी सहित अन्य पार्टियों ने मुख्यमंत्री और MUDA अधिकारियों पर दबाव बनाया है कि मामले की पूरी जांच हो और दोषियों को सज़ा मिले।
5. वर्तमान स्थिति (सितंबर 2025 तक)
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G. T. Dinesh Kumar जो पूर्व MUDA कमिश्नर हैं, ED की हिरासत में हैं और PMLA कोर्ट में पेश किये जा चुके हैं।
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ED की कार्रवाइयों ने कई ज़मीनों और प्लॉट्स को जब्त कर लिया है। कुल जब्ती संपत्तियों की कीमत लगभग ₹400 करोड़ के आस-पास है।
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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खुद को आरोपों से अलग करने की कोशिश की है, कह कर कि उन्हें इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
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लोकायुक्त (Lokayukta) पुलिस की जांच, न्यायालय की सुनवाई जारी है; आयोग की रिपोर्टें आ चुकी हैं जिनमें कुछ अधिकारियों की भूमिका पर संकेत मिल चुके हैं।
MUDA घोटाला केवल एक सरकारी जमीन-allotment का मामला नहीं है; यह सार्वजनिक विश्वास, प्रशासनिक पारदर्शिता और नीति-निर्माण की प्रक्रिया पर एक बड़ा परीक्षा है। जब सरकारी योजनाएँ, जैसे “50:50 योजना”, इस प्रकार के विवादों का विषय बन जाती हैं, तो जनता की अपेक्षा होती है
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