फ़ाइबरमैक्सिंग: सच में फायदेमंद है या बस नया शौक?

आजकल हर जगह बस एक ही बात हो रही है – फाइबरमैक्सिंग। लोग खाने में रेशेदार चीज़ें ठूंस-ठूंस के भर रहे हैं, सोशल मीडिया पर ये नया ट्रेंड बन गया है।
अब सवाल ये उठता है कि क्या ये वाकई हमारी सेहत के लिए फायदेमंद है, या सिर्फ एक और हेल्थ ट्रेंड जो कुछ दिन में गायब हो जाएगा?
फ़ाइबरमैक्सिंग मतलब क्या होता है?
सिंपल भाषा में कहें तो, फाइबरमैक्सिंग का मतलब है – खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ा देना।
जैसे सलाद ज़्यादा खाना, हरे पत्तेदार साग, फल, दालें और साबुत अनाज को ज़्यादा लेना।
सोशल मीडिया पर लोग इसको लेकर इतने एक्टिव हैं कि जैसे फाइबर खा लेने से सब कुछ ठीक हो जाएगा।
क्या फाइबर खाना सही में फायदेमंद है?
हां, फाइबर शरीर के लिए बहुत ज़रूरी है।
खासतौर पर पेट और पाचन से जुड़ी दिक्कतों में यह रामबाण है।
फाइबर के कुछ बड़े फायदे:
-
पेट साफ़ रखने में मदद करता है
-
कब्ज, गैस, अपच से राहत देता है
-
वजन घटाने में मदद करता है
-
कोलेस्ट्रॉल और शुगर को कंट्रोल में रखता है
-
पेट भरा रहता है, बार-बार भूख नहीं लगती
कहां से मिले फाइबर? देसी तरीका अपनाइए
हर चीज़ के लिए सप्लीमेंट लेने की ज़रूरत नहीं है।
हमारे देसी खाने में फाइबर भरपूर मिलता है – बस थोड़ी समझदारी से खाना है।
फाइबर से भरपूर देसी चीजें:
-
गेहूं का आटा (चोकर वाला)
-
चना और उसकी दाल
-
हरी सब्जियां – पालक, मेथी, बथुआ
-
फल – अमरूद, पपीता, सेब
-
खीरा, मूली, गाजर (सलाद के रूप में)
-
ओट्स, मक्का, ज्वार, बाजरा
अब कुछ बातें जो ध्यान में रखनी चाहिए
हर चीज़ की एक लिमिट होती है। फाइबर ज़्यादा खाने से भी दिक्कत हो सकती है, जैसे:
-
अचानक ज़्यादा फाइबर लेने से पेट फूलना, गैस या डकार आ सकती है
-
पानी कम पीने से कब्ज और बढ़ सकता है
-
प्रोसेस्ड फाइबर सप्लीमेंट पर ज़्यादा भरोसा मत कीजिए
सुझाव:
-
धीरे-धीरे फाइबर की मात्रा बढ़ाएं
-
साथ में पानी पीते रहें
-
देसी, ताजा और घरेलू खाना प्राथमिकता में रखें
घर का खाना – सबसे बड़ी दवा
हमारे दादी-नानी के नुस्खे आज भी काम के हैं:
-
सत्तू का शरबत – गर्मी में ठंडक और फाइबर
-
पराठा मूली या गोभी का – स्वाद और सेहत दोनों
-
दाल और सब्जी में छिलके वाला इस्तेमाल
-
हफ्ते में एक दिन चना, राजमा, या छोले ज़रूर खाइए
निष्कर्ष – फाइबरमैक्सिंग कोई नई बात नहीं है
ये ट्रेंड चाहे अब आया हो, लेकिन हमारे गांवों में तो लोग पहले से ही ऐसा खाना खाते आ रहे हैं।
सिर्फ fancy नाम सुन के चौंकने की ज़रूरत नहीं है। बस इतना समझिए –
सही तरीके से, सही मात्रा में, सही खाना– यही असली सेहत की कुंजी है।
1 thought on “फ़ाइबरमैक्सिंग: सच में फायदेमंद है या बस नया शौक?”