बेंगलुरु में ₹23 लाख किराया मांगने पर कनाडाई इन्फ्लुएंसर भड़के, बोले—न्यूयॉर्क-लंदन से भी महंगा!

Caleb Friesen कौन हैं?
Caleb एक कनाडाई डिजिटल क्रिएटर और ट्रैवल व्लॉगर हैं, जो भारत के कल्चर, फूड और सोशल इश्यूज़ पर बेबाक वीडियो बनाते हैं। भारत में रहते हुए उनकी वीडियोज़ को काफी लोकप्रियता मिली है, खासकर यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर।
📌 मुख्य बातें (Key Highlights):
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कनाडा के इन्फ्लुएंसर Caleb Friesen ने बेंगलुरु में किराए को बताया “अत्यधिक”
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₹23 लाख एडवांस की मांग पर की न्यूयॉर्क, लंदन, दुबई से तुलना
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सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और गंभीर बहस दोनों शुरू
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स्थानीय रेंट सिस्टम और सिक्योरिटी डिपॉजिट की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे
📰 इंट्रो: टेक सिटी या रेंट सिटी?
कभी “India’s Silicon Valley” कहे जाने वाला बेंगलुरु अब सोशल मीडिया पर “Rent Valley” बन चुका है। वजह है एक वायरल वीडियो, जिसमें कनाडाई इन्फ्लुएंसर Caleb Friesen ने ₹23 लाख एडवांस किराए की मांग पर हैरानी जताई। उनका दावा है कि ऐसा किराया उन्होंने न्यूयॉर्क, लंदन या दुबई में भी नहीं देखा।
🎥 Caleb Friesen का बयान: “This is beyond insane!”
Caleb ने अपने वीडियो में कहा,
“मैं दुनिया भर में रह चुका हूँ, लेकिन बेंगलुरु में जो रेंट स्ट्रक्चर है, वो कहीं से भी सामान्य नहीं लगता। ₹23 लाख एडवांस? यह तो न्यूयॉर्क से भी महंगा है!”
उन्होंने बताया कि बेंगलुरु के एक मकान मालिक ने उनसे एक साल का किराया एडवांस में मांगा—जो भारतीय रेंट कल्चर में आम बात मानी जाती है, लेकिन विदेशी लोगों के लिए यह चौंकाने वाला है।
🧑💻 वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर रिएक्शन की बाढ़
Caleb का यह वीडियो देखते ही देखते लाखों लोगों तक पहुंच गया। कुछ यूज़र्स ने उनकी बात को सही बताया, जबकि कुछ ने भारत की रेंट डिपॉजिट पॉलिसी का बचाव किया।
🔥 प्रतिक्रियाओं में क्या कहा गया:
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“₹23 लाख में तो हम यहाँ फ्लैट खरीद लेते।”
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“बिलकुल सही कहा, बेंगलुरु अब अफॉर्डेबल नहीं रहा।”
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“इन्हें भारत की रेंटल पॉलिसी समझनी चाहिए। विदेशी हैं, इसलिए अधिक मांगा गया होगा।”
📊 बेंगलुरु रेंटल मार्केट: क्या कहती है रिपोर्ट?
2024–25 की प्रॉपर्टी रिपोर्ट्स के अनुसार, बेंगलुरु के Koramangala, Indiranagar, और Whitefield जैसे इलाकों में रेंट पिछले दो वर्षों में 30% तक बढ़ चुका है। IT सेक्टर की वापसी और वर्क फ्रॉम ऑफिस ट्रेंड के कारण किरायों में तेज़ उछाल देखा गया है।
👉 कुछ मकान मालिक 10 से 12 महीने तक का किराया एडवांस में मांगते हैं, जो औसतन ₹5 लाख से ₹20 लाख तक जाता है।
Caleb Friesen का यह मामला सिर्फ एक किराए की शिकायत नहीं, बल्कि बेंगलुरु के तेज़ी से महंगे होते शहरी जीवन की तस्वीर पेश करता है। क्या रेंट कंट्रोल, ट्रांसपेरेंसी और विदेशी निवासियों के लिए एक अलग सिस्टम की ज़रूरत है?
आपका क्या कहना है?
क्या Caleb की बात जायज़ है? क्या बेंगलुरु का रेंट सिस्टम वाकई अंतरराष्ट्रीय शहरों से भी महंगा हो गया है?
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