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“Homebound सेंसरशिप 1 विवाद – भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि पर उठे सवाल”

 “Homebound” पर सेंसरशिप विवाद – भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि को लेकर उठे सवाल

फिल्म इंडस्ट्री में सेंसरशिप हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, और हाल ही में भारतीय फिल्म “Homebound” को लेकर यह चर्चा का विषय बन गया है। निर्देशक नीरज घायवान की यह फिल्म, जो भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि के रूप में चयनित हुई है, को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से रिलीज़ के लिए मंजूरी पाने में कई बदलावों का सामना करना पड़ा।


 फिल्म का परिचय

“Homebound” एक हिंदी-भाषी ड्रामा फिल्म है, जो 2020 में न्यू यॉर्क टाइम्स में प्रकाशित पत्रकार बशरत पीर के लेख “Taking Amrit Home” पर आधारित है। यह फिल्म दो दोस्तों की कहानी है, जो कोविड-19 महामारी के दौरान अपने घर लौटने की कोशिश करते हैं। फिल्म में ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जान्हवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। निर्देशक नीरज घायवान की यह फिल्म, जो उनके पहले निर्देशन “Masaan” के बाद आई है, ने कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 में “Un Certain Regard” श्रेणी में प्रीमियर किया था।

Homebound एक भारतीय सामाजिक-ड्रामा फिल्म है, जिसे निर्देशक नीरज घायवान ने बनाया है और निर्माता करण जौहर हैं। यह फिल्म भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि के रूप में चयनित की गई है और इसमें ईशान खट्टर, जान्हवी कपूर और विशाल जेठवा मुख्य भूमिकाओं में हैं।

फिल्म की कहानी न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार बशारत पीर के 2020 के लेख पर आधारित है। यह कहानी आधुनिक भारतीय समाज की जटिलताओं, सामाजिक मुद्दों और पारिवारिक संघर्षों को उजागर करती है। Homebound में दर्शाया गया है कि किस प्रकार अलग-अलग पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के लोग अपने “घर” और पहचान की तलाश में संघर्ष करते हैं।

फिल्म का संदेश साझा घर और मानवता की भावना पर केंद्रित है। नीरज घायवान के निर्देशन में यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि सामाजिक जागरूकता और संवेदनशील मुद्दों पर प्रकाश डालती है।

इसके साथ ही, फिल्म ने रिलीज़ से पहले सेंसर बोर्ड (CBFC) से 11 बदलाव की सिफारिशें प्राप्त कीं, जिनमें धार्मिक दृश्यों, सांस्कृतिक संदर्भ और क्रिकेट मैच के दृश्य शामिल थे। इस वजह से फिल्म पर सेंसरशिप विवाद भी छिड़ा, जो इसे और अधिक चर्चा में ला गया।


 सेंसरशिप की मांगें

फिल्म की भारत में रिलीज़ से पहले, CBFC ने फिल्म में 11 बदलावों की मांग की। इनमें से प्रमुख थे:

इन बदलावों के बाद, फिल्म की कुल रनटाइम 122 मिनट (2 घंटे 2 मिनट) रह गई है। India Today


 फिल्म के निर्माता और कलाकार

“Homebound” का निर्माण धर्मा प्रोडक्शंस के करण जौहर, आदर पूनावाला, अपूर्व मेहता और सोमेन मिश्रा ने किया है। फिल्म के कार्यकारी निर्माता के रूप में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता मार्टिन स्कॉर्सेसी का नाम जुड़ा है। फिल्म में ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जान्हवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं।

निर्माता
Homebound की निर्माण टीम में प्रमुख रूप से करण जौहर शामिल हैं, जो बॉलीवुड के जाने-माने निर्माता और निर्देशक हैं। उन्होंने इस फिल्म को धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले प्रस्तुत किया है। करण जौहर ने फिल्म को भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

निर्देशक
फिल्म का निर्देशन नीरज घायवान ने किया है, जो अपनी संवेदनशील और सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पहले भी Masaan जैसी फिल्मों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना प्राप्त की है।।


 अंतरराष्ट्रीय पहचान

“Homebound” ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में भी अपनी पहचान बनाई है। कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 में “Un Certain Regard” श्रेणी में प्रीमियर के बाद, फिल्म को टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भी स्क्रीन किया गया। यह फिल्म भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि के रूप में चयनित हुई है, जो भारतीय सिनेमा के लिए गर्व की बात है।


 विवाद और आलोचनाएँ

CBFC द्वारा की गई छंटाई और बदलावों ने फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों के बीच बहस छेड़ दी है। कुछ आलोचकों का मानना है कि सेंसरशिप ने फिल्म की वास्तविकता और संदेश को कमजोर किया है। एक क्रू मेंबर ने इसे “फिल्म के कुछ हिस्सों को नष्ट कर दिया” बताया है।

इसके अतिरिक्त, फिल्म के पहले पोस्टरों में मार्टिन स्कॉर्सेसी का नाम नहीं था, जिसे बाद में जोड़ा गया। यह बदलाव भी सेंसरशिप के प्रभाव को दर्शाता है।

“Homebound” की सेंसरशिप ने भारतीय सिनेमा में कला और सेंसरशिप के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर किया है। जहां एक ओर फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम रोशन किया है, वहीं दूसरी ओर घरेलू रिलीज़ में सेंसरशिप ने फिल्म की वास्तविकता को प्रभावित किया है। यह विवाद दर्शाता है कि भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कला और सेंसरशिप के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

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