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“IIT बॉम्बे का ‘दक्ष’ मिशन 2025 में भारत की अंतरिक्ष विज्ञान में नई छलांग”

IIT बॉम्बे का ‘दक्ष’ मिशन भारत की अंतरिक्ष विज्ञान में नई छलांग

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे ने 22 सितंबर 2025 को अपने महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन ‘दक्ष’ की घोषणा की। यह मिशन भारत को गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आईआईटी बॉम्बे का ‘दक्ष’ मिशन भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश को गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी बनाने की दिशा में है। इस मिशन का नेतृत्व प्रोफेसर वरुण भालेराव कर रहे हैं, जो आईआईटी बॉम्बे के भौतिकी विभाग में कार्यरत हैं। यह परियोजना भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI), फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी (PRL), और इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IUCAA) जैसे प्रमुख संस्थानों के सहयोग से विकसित की जा रही है।


मिशन ‘दक्ष’ का उद्देश्य

‘दक्ष’ मिशन का मुख्य उद्देश्य दो अत्याधुनिक उपग्रहों का निर्माण और प्रक्षेपण करना है, जो दुनिया के सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष टेलीस्कोप से लैस होंगे। ये टेलीस्कोप 1.81 मिलियन क्यूबिक मेगापार्सेक्स (cMpc³) के क्षेत्र का अध्ययन करने में सक्षम होंगे, जो NASA के Fermi Gamma Ray Telescope की क्षमता से लगभग पांच गुना अधिक है।

मिशन ‘दक्ष’ की प्रमुख विशेषताएँ

मिशन की स्थिति और भविष्य की दिशा

‘दक्ष’ मिशन के लिए प्रयोगशाला मॉडल का प्रदर्शन सफलतापूर्वक किया जा चुका है, और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पूर्ण मिशन प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के लिए एक अध्ययन टीम गठित की है। यदि अनुमोदन प्राप्त होता है, तो ये सैटेलाइट्स तीन वर्षों के भीतर तैयार हो सकते हैं। Daijiworld

इस मिशन के सफल होने से भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलेगी और देश की वैज्ञानिक क्षमताओं में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।


वैज्ञानिक लक्ष्य

मिशन के प्रमुख वैज्ञानिक लक्ष्य निम्नलिखित हैं:


तकनीकी विशेषताएँ


सहयोगी संस्थाएँ

इस मिशन में IIT बॉम्बे के अलावा निम्नलिखित प्रमुख संस्थाएँ भी शामिल हैं:


मिशन की आवश्यकता

वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में तेजी से हो रही प्रगति के बीच, ‘दक्ष’ मिशन भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मिशन न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की ओर भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

IIT बॉम्बे का ‘दक्ष’ मिशन भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में एक नई पहचान दिलाने की क्षमता रखता है। यह मिशन भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता और समर्पण का प्रतीक है, जो वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।

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