India AI Mission 2.0 और Tata-Apple डील — पूरी जानकारी

भारत में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में सरकार की निवेश और पहलें तेज़ी से बढ़ रही हैं। उनमें से दो सबसे चर्चा में रहने वाले मुद्दे हैं
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India AI Mission 2.0 — यानी सरकार की अगली लागत/प्रोत्साहन योजनाएँ ताकि भारत खुद AI मॉडल विकसित करे, Compute संसाधन बढ़ाएँ, स्थानीय प्रतिभा को बढ़ावा दे आदि।
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Tata-Apple डील — जहाँ Tata कंपनी ने Apple के साथ अपने सप्लाई चेन/मैन्युफैक्चरिंग समझौते के ज़रिए बड़ा मुनाफ़ा कमाया है और भारत में Apple उत्पादन की बात बढ़ रही है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि ये दोनों पहलें क्या हैं, क्यों महत्वपूर्ण हैं, उनके संभावित प्रभाव, और चुनौतियाँ क्या हो सकती हैं।
India AI Mission क्या है?
पृष्ठभूमि
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IndiaAI Mission (भारत की AI मिशन) को मार्च 2024 में मंज़ूरी दी गई थी। इसके लिए ₹10,371.92 करोड़ (लगभग $1.2 बिलियन) की बजट राशि निर्धारित की गई है।
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इस मिशन के तहत कुल सात स्तंभ (pillars) बनाए गए हैं — जैसे Compute (GPU संसाधन), Datasets प्लेटफ़ॉर्म, ऐप्लिकेशन डेवलपमेंट, स्टार्टअप फाइनेंसिंग, AI-skills / FutureSkills, Innovation Centers आदि।
मिशन 2.0 / Cohort-2 की घोषणा
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“Cohort 2.0” में सरकार ने आठ और भारतीय कंपनियों को चुना है जो foundational AI मॉडल विकसित करेंगी, अर्थात् ऐसी बड़ी AI मॉडल्स जो विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए आधार बनेंगी, जैसे भाषा, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि में।
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इसके साथ सरकार Compute संसाधन (GPUs आदि) की पहुँच, डेटा सेट्स, और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है ताकि AI विकास देश में स्वदेशी तौर पर हो सके।
Compute संसाधन और इंप्रोवमेंट्स
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अभी तक Mission के तहत लगभग 34,333 GPUs की व्यवस्था हो चुकी है (दो ट्रैंश में).
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पहले ट्रैंश में लगभग 18,693 GPUs शामिल थे, जिनमें से 10,000+ लाइव हो चुके हैं।
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Compute संसाधन उपलब्ध कराने वाली कंपनियों में Yotta Data Services, Tata Communications, Jio Platforms, CtrlS Datacenters, NxtGen आदि शामिल हैं
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सरकार ने GPU hour उपयोग की लागत में लगभग 40% सब्सिडी देने की योजना बनाई है, ताकि स्टार्टअप, शोधकर्ता, अकादमिक संस्थाएँ आदि आसानी से संसाधन उपयोग कर सकें।
अन्य पहलें
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IndiaAI के तहत AIKosha जैसे डेटा सेट प्लेटफ़ॉर्म और Compute Portal जैसे प्लेटफार्म लॉन्च हो चुके हैं, जहाँ शोधकर्ता, छात्र, स्टार्टअप सब्सिडी और काम की सुविधा के तहत कंप्यूट संसाधन प्राप्त कर सकते हैं।नीति-निर्माता यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि AI मॉडल भारत-विशेष डेटा, भाषा विविधता और सांस्कृतिक संदर्भ को ध्यान में रखें, ताकि मॉडल बायस कम हों और उपयोगी हों।
Tata-Apple डील
यह डील तकनीकी, आर्थिक और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को दर्शाती है।
डील का स्वरूप
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Tata Electronics (Tata का उप-हिस्सा) ने Pegatron India के साथ साझेदारी की है, जो Apple के लिए उत्पाद बनाने वाला एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर है।
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Tata ने Pegatron के तमिल नाडु स्थित iPhone प्लांट का अधिकांश हिस्सा सौदा करके अपने नियंत्रण में ले लिया है। Pegatron अब तकनीकी/प्राविधिक सहायता देगा, वर्षों-पुरानी सप्लाई चेन का हिस्सा रहेगा।
आर्थिक असर
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भारत में Apple उत्पादों का उत्पादन बढ़ने के कारण Tata को बड़ा मुनाफ़ा हुआ है। उदाहरण के लिए, FY25 में Tata Electronics ने ₹23,112 करोड़ से अधिक की iPhone एक्सपोर्ट (US को) की है, जो कि उसकी कुल आय का एक बहुत बड़ा हिस्सा रहा। The Economic
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इस तरह से, Tata का कुल राजस्व बढ़ा है — FY25 में Tata Electronics की आय बढ़कर ₹75,367 करोड़ हुई, जबकि पिछले वर्ष (2023) की तुलना में बहुत कम थी।
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शुद्ध मुनाफा (net profit) भी बढ़ा है: FY25 में ₹2,339 करोड़ का मुनाफा हुआ, जबकि 2023 में यह सिर्फ ₹36 करोड़ था। यह वृद्धि बहुत बड़ी है।
क्यों है यह डील महत्वपूर्ण?
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Apple की सप्लाई चेन चीन से भारत की ओर शिफ्ट हो रही है, और Tata इस परिवर्तन का लाभ उठा रहा है।
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यह भारत में निर्माण (manufacturing) उद्योग और निर्यात को मजबूती देता है, रोज़गार बढ़ाएगा, और टेक्नोलॉजी स्पेस में भारत की विश्वसनीयता को बढ़ाएगा।
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Tata के पास अब उत्पादन क्षमता (manufacturing capacity) बढ़ी है, जिसका फायदा भारत की अर्थव्यवस्था को होगा, विशेषकर तमिल नाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में जहां यह प्लांट्स स्थित हैं।
दोनों पहलों का संयोजन और आपसी तालमेल
India AI Mission और Tata-Apple डील दोनों अलग-अलग पहलें हैं, लेकिन उनकी शक्ति मिलकर भारत के AI और टेक इकोसिस्टम को बहुत आगे ले जा सकती है
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इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना: IndiaAI Mission के GPU संसाधन, डेटा प्लेटफार्म और मॉडल विकास कार्यक्रम AI के लिए गहरी नींव तैयार कर रहे हैं। वहीं Tata-Apple के उत्पादन संयंत्र यह दिखाता है कि भारत केवल सॉफ्टवेयर/AI में ही नहीं, बल्कि हार्डवेयर और उत्पादन में भी सक्षम है।
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तालमेल: उदाहरण के लिए यदि Apple के उत्पादन प्लांट्स भारत में उत्पादन करते हैं, तो उन उत्पादों के लिए AI-सहायता प्रणालियाँ, क्वालिटी नियंत्रण, सप्लाई चेन प्रबंधन आदि भारत की AI क्षमता से बेहतर हो सकती है।
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रोज़गार और कौशल विकास: AI मिशन द्वारा लोगों को AI, डेटा साइंस, मॉडल-डेवलपमेंट आदि में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। Tata-Apple उत्पादन क्षेत्र में टेक्निकल और गैर-टेक्निकल दोनों तरह की नौकरियाँ बढ़ेंगी।
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निर्यात और विदेशी निवेश: Tata के उत्पादन प्लांट भारत में Apple के लिए कंपोनेंट उत्पादन व असेंबली कर रहे हैं, जिससे विदेशी निवेश बढ़ेगा, निर्यात बढ़ेगा, तथा तकनीकी आत्मनिर्भरता में इज़ाफा होगा।
चुनौतियाँ और जोखिम
हालाँकि ये पहलें अत्यंत सकारात्मक हैं, लेकिन कुछ चुनौतियाँ और जोखिम भी हैं जिन्हें नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता:
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आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की बाधाएँ
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विशेष हार्डवेयर (जैसे GPU, हाई-end मशीनें) अभी भी ज़्यादातर बाहर से आयात होती हैं। कस्टम ड्यूटी, लॉजिस्टिक्स, निर्यात/आयात नियम आदि समय लगाते हैं।
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कंपोनेंट्स की गुणवत्ता, समय पर डिलीवरी आदि में देरी हो सकती है।
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उच्च निवेश लागत
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हार्डवेयर, उत्पादन संयंत्र, कर्मचारियों की भर्ती और प्रशिक्षण, ऊर्जा खर्च आदि पर बड़ा निवेश करना होता है।
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सरकारी सब्सिडी और प्रोत्साहन हों तो मदद मिलती है, लेकिन वे सभी लागत नहीं कवर कर पाते।
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नीति एवं विनियमन (Policy & Regulation)
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डेटा संरक्षण (Data Protection), निजता (Privacy), जनहित एवं AI Ethics जैसे विषयों पर स्पष्ट नियम चाहिए।
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विदेशी निवेश, निर्यात नियम, टैक्स नीति आदि में अस्थिरता हो सकती है।
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मानव संसाधन व कौशल की कमी
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जितना AI मॉडल्स, मशीन लर्निंग इत्यादि में टेक्निकल प्रशिक्षण चाहिए, उतना अभी भारत में व्यापक पैमाने पर नहीं है।
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उत्पादन प्लांट्स के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और निरंतर सुधार की ज़रूरत होगी।
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प्रतिस्पर्धा और विश्व मानदंड
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वैश्विक स्तर पर AI और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बहुत तेज़ है। भारत को तेज़ी से अपडेटेड हार्डवेयर, वैश्विक गुणवत्ता मानको (standards) का पालन करना होगा।
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लागत, समय, नवाचार (innovation) आदि में पीछे नहीं होना चाहिए।
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संभावित प्रभाव और भविष्य की संभावनाएँ
India AI Mission 2.0 और Tata-Apple डील मिलकर निम्नलिखित असर डाल सकते हैं
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AI स्वायत्तता (AI Sovereignty) भारत खुद अपने AI मॉडल विकसित करने लगेगा, विदेशी मॉडल्स पर निर्भरता कम होगी। भाषा, संस्कृति, उपयोगकर्ता डेटा आदि भारतीय संदर्भ में बेहतर काम करेंगे।
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उत्पादन एवं निर्यात वृद्धि Apple जैसे ब्रांड्स द्वारा भारत में उत्पादन बढ़ने से निर्यात में इज़ाफा होगा। इसके साथ ही उत्पादन गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) नेटवर्क मजबूत होगा।
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रोजगार सृजन AI-मॉडल डेवलपमेंट, डेटा साइंस, हार्डवेयर उत्पादन, क्वालिटी नियंत्रण आदि में नई नौकरियाँ बनेंगी।
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तकनीकी नवाचार (Innovation): AI एप्लिकेशन, स्मार्ट सिटी, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि क्षेत्रों में तेजी से नए समाधान उत्पन्न होंगे।
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अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर टेक्नोलॉजी पर आधारित आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी, GDP में योगदान इजाफा होगा, स्टार्टअप संस्कृति को बल मिलेगा।
India AI Mission 2.0 और Tata-Apple की डील दोनों ही भारत के लिए मील के पत्थर हैं। AI Mission देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, वहीं Tata-Apple का उत्पादन समझौता सप्लाई चेन, निर्यात और मैन्युफैक्चरिंग में भारत की भूमिका को और सशक्त कर रहा है।
अगर ये दोनों पहलें सफल हों – नीति, निवेश, गुणवत्ता, और मानव संसाधन की चुनौतियों का सामना करते हुए – तो आने वाले वर्षों में भारत सिर्फ सॉफ़्टवेयर देश नहीं रहेगा, बल्कि AI-हरेक क्षेत्र में नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बन सकता है।
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