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अंतिम पंघल की जीत वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप 2025 में भारत को पहला पदक

अंतिम पंघल का झागेड रेसलिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक — कहानी, संघर्ष और भविष्य

नई दिल्ली / झागेड (क्रोएशिया) — सितंबर 2025 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत की महिला फ्रीस्टाइल रेसलर अंतिम पंघल ने वज़न श्रेणी 53 किलोग्राम में दमदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता। यह उनका लगातार दूसरा विश्व चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज है, और इस जीत ने उनकी प्रतियोगी तौर-तरीकों, मानसिक दृढ़ता और कुश्ती करियर में आने वाले समय की संभावनाओं को फिर से साबित कर दिया।

इस ब्लॉग में हम जानेंगे


शुरुआत अंतिम पंघल कौन हैं?


झागेड 2025 विश्व चैंपियनशिप में उनकी यात्रा

स्थान व तारीख

मैच-मार्ग


विश्लेषण क्या विशेष था इस प्रदर्शन में?

  1. मानसिक मजबूती (Mental Resilience): सेमीफाइनल हार के बाद भी अपनी टेंशन को संभाला और ब्रॉन्ज मैच में आत्मविश्वास के साथ उतरना यह दिखाता है कि उन्होंने मानसिक रूप से अच्छा काम किया।

  2. तकनीक और टैक्टिक्स: उनके मुकाबलों में टैकडाउन, काउंटर मूव्स, रेपेटेशन ने साफ दिखाया कि उन्होंने सिर्फ शक्ति नहीं, बल्कि रणनीति भी अच्छी तरह इस्तेमाल की। विशेषकर ब्रॉन्ज मुकाबले में शुरुआती देर से नियंत्रित बढ़त बनाना और फिर उसे बढ़ाना।

  3. लगातार प्रदर्शन: यह उनका दूसरा विश्व चैंपियनशिप ब्रॉन्ज है (पिछली बार 2023 में बेलग्रेड में)। इसने दिखाया कि वह उच्च स्तर पर स्थिरता बनाए रखने की क्षमता रखती हैं।

  4. भारत के लिए पहला पदक इस चैंपियनशिप में: इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के लिए यह पहला फ़्रीस्टाइल कुश्ती पदक है। अर्थात् टीम के लिए भी यह एक बड़ी राहत है क्योंकि भारत अन्य मुल्कों के मुकाबले अपेक्षाकृत कम पदक अर्जित कर पाया है।


महत्व भारतीय कुश्ती तथा महिला खेल के लिए


चुनौतीयाँ और सबक


भविष्य की संभावना और लक्ष्य

  1. गोल्ड मेडल की तैयारी अब जब उन्होंने लगातार 2 ब्रॉन्ज जीते हैं, अगला लक्ष्य होगा विश्व चैम्पियनशिप या एशियाई ओलिंपिक क्वालीफायर में गोल्ड लाने की तैयारी।

  2. ओलिंपिक प्रदर्शन सुधारना ओलिंपिक स्तर पर प्रदर्शन करना अंतिम खेल लक्ष्य है। पिछली बार शुरूआती हार से सीख लेकर अगली बार अधिक अनुभव और बेहतर रणनीति के साथ उतरना।

  3. कॉमनवेल्थ और एशियाई गेम्स में पदक बढ़ाना इन टूर्नामेंटों में भारी प्रतिस्पर्धा है, लेकिन सफलता यहाँ न केवल पदकों की संख्या बढ़ाएगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी देगी।

  4. प्रेरणा देना और प्रेरित करना अपनी सफलता से अन्य महिला पहलवानों को प्रेरित करना, ग्रामीण क्षेत्रों में और महिलाओं को कुश्ती की ओर आकर्षित करना।

  5. व्यावसायिक समर्थन व संसाधन: बेहतर कोचिंग, सुधारित ट्रेनिंग सुविधा, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों में भागीदारी — ये सभी अगले कदम होंगे।

अंतिम पंघल की कांस्य पदक जीत केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है — यह भारतीय कुश्ती की प्रगति का प्रतीक है। यह दिखाती है कि अगर नया मंथन हो, सही मार्गदर्शन हो, तो लड़कियां सीमाएँ तोड़ सकती हैं।

इस जीत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत के पास विश्व स्तर पर मुकाबला करने के लिए प्रतिभा है; बस संसाधन, लगातार प्रशिक्षण और बेहतर स्ट्रैटेजी की ज़रूरत है।

“हिम्मत और मेहनत के साथ हार के बाद भी उठ खड़े होना ही असली विजेता की पहचान है।”

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