भारत में उपराष्ट्रपति का पद संविधान के तहत महत्वपूर्ण है। यह पद न केवल राज्यसभा का सभापति होता है, बल्कि राष्ट्रपति के अस्थायी अनुपस्थिति में उनका कार्यभार भी संभालता है। हाल ही में, 21 जुलाई 2025 को, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद 9 सितंबर 2025 को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव आयोजित किया गया।
चुनाव की प्रक्रिया और उम्मीदवार
उपराष्ट्रपति का चुनाव भारत में संविधान द्वारा निर्धारित है और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। संविधान के अनुच्छेद 66 और 67 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव संपूर्ण संसद (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा किया जाता है, और इसमें सभी सदस्य गुप्त मतदान (Secret Ballot) के माध्यम से वोट डालते हैं।
इस चुनाव की खास बात यह है कि किसी भी पार्टी व्हिप का पालन करना अनिवार्य नहीं होता, यानी सांसद अपनी व्यक्तिगत राय और विवेक के आधार पर मतदान कर सकते हैं। इससे चुनाव में निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुष्टि होती है।
इस बार चुनाव का माहौल काफी रोचक रहा। सत्ताधारी गठबंधन NDA (National Democratic Alliance) ने सी. पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित किया। राधाकृष्णन महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रह चुके हैं और उनका प्रशासनिक अनुभव उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाता है।
वहीं, विपक्षी गठबंधन INDIA Alliance ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा। रेड्डी का न्यायिक और संवैधानिक अनुभव उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए एक मजबूत और सम्मानित उम्मीदवार बनाता है।
चुनाव की इस प्रक्रिया में उम्मीदवारों का नामांकन, मतदाता सूची की जाँच, और चुनाव आयोग द्वारा मतदाता कोटेशन सभी चरण बेहद व्यवस्थित तरीके से आयोजित किए जाते हैं। उम्मीदवारों को अपने चुनाव खर्चों का भी रिकॉर्ड रखना पड़ता है और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर चुनाव आयोग कड़ी कार्रवाई कर सकता है।
इसके अलावा, चुनाव में सुपरमेजरमेंट और लॉजिस्टिक प्रबंधन भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। सभी सदस्यों को मतदान के लिए समय पर आमंत्रित किया जाता है और मतदान स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं।
उपराष्ट्रपति का चुनाव भारत के संविधान के अनुच्छेद 67 के तहत होता है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मतदान करते हैं। इस बार, सत्ताधारी गठबंधन एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया, जबकि विपक्षी INDIA गठबंधन ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा।
चुनाव की तारीख और मतदान
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 की तारीख 9 सितंबर निर्धारित की गई थी। यह चुनाव संसद भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया और इसे भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण माना गया। चुनाव सुबह 10 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक चला।
मतदान प्रक्रिया अत्यंत सुव्यवस्थित थी। सभी सांसदों को मतदाता सूची (Electoral Roll) के अनुसार अपने वोट डालने के लिए आमंत्रित किया गया। इस बार का चुनाव गुप्त मतदान (Secret Ballot) के माध्यम से हुआ, जिससे हर सांसद स्वतंत्र रूप से अपने उम्मीदवार का चयन कर सके।
चुनाव में सभी सांसदों की उपस्थिति और मतदान की उच्च दर एक बड़ा आकर्षण रहा। लगभग 96% सांसदों ने मतदान में भाग लिया, जो लोकतंत्र की मजबूती और सांसदों की जिम्मेदारी को दर्शाता है।
चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने इस चुनाव को और महत्वपूर्ण बना दिया। मतदान स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि चुनाव सुचारू और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
चुनाव 9 सितंबर 2025 को संसद भवन में हुआ। मतदान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चला। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहला वोट डाला। मतदान गुप्त मतपत्र के माध्यम से हुआ, और सांसदों को पार्टी व्हिप जारी करने की अनुमति नहीं थी।
मतदान के आंकड़े और परिणाम
मतदान में लगभग 96% मतदान हुआ। चुनाव के परिणाम शाम 6 बजे के बाद घोषित किए गए। सी. पी. राधाकृष्णन को 422 वोट मिले, जबकि बी. सुदर्शन रेड्डी को 319 वोट मिले। इस प्रकार, राधाकृष्णन ने 103 वोटों से जीत हासिल की।
चुनाव प्रक्रिया में मतपत्रों की गिनती बेहद सावधानी और पारदर्शिता के साथ की गई। मतदान समाप्त होने के बाद मतपत्रों को सुरक्षित बैलट बॉक्स में संग्रहित किया गया और गिनती स्थल पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए। प्रत्येक मतपत्र को चयनित उम्मीदवार के पक्ष में या विपक्ष में सही तरीके से गिना गया, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
इस चुनाव में सत्ताधारी NDA के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन और विपक्षी INDIA गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रही। परिणामों की घोषणा के समय राजनीतिक माहौल बहुत ही उत्साहपूर्ण और तनावपूर्ण था।
अंतिम परिणाम इस प्रकार रहे:
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सी. पी. राधाकृष्णन – 422 वोट
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बी. सुदर्शन रेड्डी – 319 वोट
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अमान्य/रद्द मत – कुछ संख्या में
इस प्रकार, सी. पी. राधाकृष्णन ने 103 वोटों की बढ़त से जीत हासिल की और भारत के अगले उपराष्ट्रपति के रूप में अपना नाम दर्ज कराया।
यह परिणाम न केवल NDA के लिए राजनीतिक सफलता थी, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को भी उजागर करता है। चुनाव के बाद नेताओं ने अपने-अपने भाषणों में लोकतंत्र की महत्वता पर जोर दिया और नए उपराष्ट्रपति को बधाई दी।
इस चुनाव के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि भारतीय संसद में सदस्यों का मतदान व्यवहार और राजनीतिक रणनीति किस प्रकार प्रभावित करती है। मतदान के दौरान किसी भी दल ने अत्यधिक दबाव नहीं डाला और सांसदों ने स्वतंत्र रूप से अपने मत का प्रयोग किया। यह लोकतांत्रिक मूल्यों की एक मिसाल माना जा सकता है।
उपराष्ट्रपति पद की भूमिका
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उपराष्ट्रपति राज्यसभा की समितियों का नेतृत्व करते हैं।
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संवैधानिक मसलों पर संपर्क और परामर्श प्रदान करते हैं।
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राज्यसभा में विधायी प्रक्रियाओं की निगरानी और निर्णयों की पुष्टि सुनिश्चित करते हैं।
इस प्रकार, उपराष्ट्रपति पद केवल औपचारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक, संवैधानिक और प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पद लोकतंत्र की मजबूती, संसदीय प्रक्रिया की पारदर्शिता और संविधान के सम्मान को बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
उपराष्ट्रपति का पद केवल एक सम्मानजनक पद नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक तंत्र का एक स्तंभ भी है, जो देश के लोकतंत्र को स्थिरता और दिशा प्रदान करता है
उपराष्ट्रपति का पद भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण है। यह न केवल राज्यसभा का सभापति होता है, बल्कि राष्ट्रपति के अस्थायी अनुपस्थिति में उनका कार्यभार भी संभालता है। इसके अतिरिक्त, उपराष्ट्रपति की भूमिका संविधान के अनुच्छेद 67 के तहत निर्धारित है।
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 ने भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ लिया। इस चुनाव ने न केवल संविधानिक प्रक्रिया को दर्शाया, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती को भी उजागर किया। सी. पी. राधाकृष्णन की जीत ने एनडीए की स्थिति को मजबूत किया, जबकि विपक्षी गठबंधन के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण संकेत था। आगे आने वाले समय में, उपराष्ट्रपति की भूमिका और उनके निर्णय भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाए रखेंगे।
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