दिल्ली में फेसबुक फ्रॉड सेवानिवृत्त शिक्षक से 11.77 लाख रुपये की ठगी

पीड़ित कौन हैं?
पीड़ित एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जिन्होंने अपना जीवन शिक्षण कार्य में बिताया। रिटायरमेंट के बाद वे सोशल मीडिया का उपयोग समय बिताने और अपने पुराने साथियों से संपर्क बनाए रखने के लिए करते थे। लेकिन उनकी यही आदत उन्हें धोखेबाजों का शिकार बना गई।
फ्रॉड कैसे हुआ?
यह फ्रॉड धीरे‑धीरे विश्वास जीतने और मनोवैज्ञानिक चालों के माध्यम से अंजाम दिया गया। सबसे पहले सेवानिवृत्त शिक्षक को फेसबुक पर एक फर्जी प्रोफ़ाइल से दोस्ती का अनुरोध मिला। प्रोफ़ाइल में दिख रही महिला ने अपनी तस्वीरें और जीवनशैली इतनी आकर्षक दिखाई कि शिक्षक का ध्यान उसकी ओर गया।
इसके बाद बातचीत शुरू हुई। महिला ने बहुत ही सहानुभूति और दोस्ताना अंदाज़ अपनाया। उसने शिक्षक की दिनचर्या, परिवार और आर्थिक स्थिति के बारे में सवाल किए ताकि वह उनकी मनोस्थिति समझ सके। विश्वास बनाने के लिए वह लगातार चैट करती रही, अपने “महंगे शौक” और “विदेश में जीवन” की कहानियाँ सुनाती रही।
जब शिक्षक का भरोसा बन गया, तब महिला ने बताया कि वह उन्हें महंगे गिफ्ट भेजना चाहती है, जिससे शिक्षक का मन और अधिक लुभा। यह आम मनोवैज्ञानिक तरीका है, जिसमें अपराधी व्यक्ति की इच्छाओं और अकेलेपन का फायदा उठाते हैं।
कुछ दिनों बाद शिक्षक को कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को कस्टम अधिकारी बताया और कहा कि पार्सल अटक गया है। पार्सल को छुड़ाने के लिए टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस चार्ज आदि के नाम पर पैसे माँगे गए। शुरुआत में छोटी रकम माँगी गई ताकि शिक्षक का भरोसा बढ़े। जैसे ही शिक्षक ने पैसे ट्रांसफर किए, अपराधियों ने बहाने बनाकर लगातार नई‑नई रकम माँगनी शुरू कर दी।
कई बार फोन पर दबाव बनाया गया कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो पार्सल वापस चला जाएगा या उन पर कानूनी कार्रवाई होगी। शिक्षक डर और लालच दोनों के बीच उलझते गए और उन्होंने कुल 11.77 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
इस पूरे फ्रॉड में निम्नलिखित तरीके अपनाए गए:
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फर्जी पहचान – प्रोफ़ाइल में इस्तेमाल की गई फोटो और जानकारी झूठी थी।
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मनोवैज्ञानिक खेल – सहानुभूति, दोस्ती और आकर्षक जीवनशैली दिखाकर भरोसा जीता गया।
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लालच – महंगे गिफ्ट भेजने का बहाना देकर व्यक्ति की इच्छा का फायदा उठाया गया।
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डर का वातावरण – कस्टम शुल्क, कानूनी कार्रवाई जैसी बातें कहकर दबाव बनाया गया।
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छोटे निवेश से शुरुआत – पहले कम पैसे लेकर विश्वास बढ़ाया और फिर बड़ी रकम वसूल की गई।
जानकारी के अनुसार, अपराधियों ने फेसबुक पर एक फर्जी प्रोफ़ाइल बनाई थी। प्रोफ़ाइल में खुद को किसी सरकारी संस्था से जुड़ा अधिकारी या निवेश सलाहकार बताया गया। धीरे-धीरे उन्होंने विश्वास अर्जित किया और पीड़ित को निवेश, योजनाओं और लाभ का झांसा दिया। उन्हें बताया गया कि अगर वे कुछ राशि निवेश करेंगे तो कुछ महीनों में अच्छा रिटर्न मिलेगा। इसी बहाने से उनसे कुल ₹11,77,000 की ठगी की गई।
अपराधियों की रणनीति
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पहले दोस्ती का अनुरोध भेजा गया।
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बातचीत में मददगार और सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाया गया।
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निवेश योजनाओं का लालच दिया गया।
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जल्दी लाभ का वादा कर विश्वास अर्जित किया गया।
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अंत में विभिन्न किस्तों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए गए।
क्यों फँसते हैं लोग?
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सोशल मीडिया पर अजनबियों पर जल्दी विश्वास कर लेना।
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जल्दी पैसे कमाने की लालसा।
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तकनीकी जानकारी की कमी।
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मनोवैज्ञानिक तरीके से भरोसा जीतना।
स्थान: गुरुग्राम, हरियाणा
तारीख: 10 सितंबर 2025
दिल्ली से सटे गुरुग्राम जिले के फरुखनगर क्षेत्र में एक सेवानिवृत्त शिक्षक से फेसबुक फ्रॉड के माध्यम से 11.77 लाख रुपये की ठगी की घटना सामने आई है। यह घटना साइबर अपराधियों के बढ़ते प्रभाव और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर करती है।
घटना की शुरुआत
दिल्ली में यह फेसबुक फ्रॉड की घटना बहुत ही सामान्य तरीके से शुरू हुई, जिससे यह और भी खतरनाक बन गई। बताया जा रहा है कि सेवानिवृत्त शिक्षक, जो अपने परिवार के साथ शांत जीवन जी रहे थे, सोशल मीडिया पर समय बिताते थे। एक दिन उन्हें फेसबुक पर एक फर्जी प्रोफ़ाइल से दोस्ती का अनुरोध मिला। प्रोफ़ाइल पर दिख रही महिला का नाम और तस्वीर आकर्षक थी। उसके बारे में लिखा गया था कि वह विदेश में रहती है, महंगे शौक रखती है और जीवनशैली के बारे में बातें कर रही थी।
शिक्षक ने पहले तो इस रिक्वेस्ट को स्वीकार करने में संकोच किया, लेकिन बातचीत शुरू होने के बाद महिला ने बहुत ही भरोसेमंद तरीके से बातचीत की। वह उनके परिवार, शौक, सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन और आर्थिक स्थिति के बारे में पूछती रही। धीरे-धीरे शिक्षक को लगा कि वह एक अच्छी मित्र है जो अकेलेपन में साथ दे रही है।
कुछ दिनों बाद महिला ने बताया कि वह उन्हें एक महंगा गिफ्ट भेजना चाहती है – जैसे कि महंगे गैजेट्स, घड़ियाँ और अन्य सामान। इसके लिए उन्होंने कहा कि गिफ्ट विदेश से भेजा जाएगा और उसे कस्टम ड्यूटी के कारण कुछ शुल्क चुकाना होगा। फिर एक दिन फोन आया, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को कस्टम अधिकारी बताकर कहा कि पार्सल दिल्ली एयरपोर्ट पर अटका है। अगर शुल्क नहीं दिया गया तो पार्सल लौट जाएगा।
शिक्षक ने बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए बार-बार रकम ट्रांसफर कर दी। शुरू में ₹50,000 माँगे गए, फिर ₹2 लाख, फिर ₹5 लाख। हर बार नया बहाना बनाकर कहा गया कि शुल्क चुकाना जरूरी है, नहीं तो सामान वापस चला जाएगा। शिक्षक ने भरोसा करते हुए कुल 11.77 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए।
जब काफी समय बीत गया और न गिफ्ट आया न कोई स्पष्ट जानकारी, तब शिक्षक को शक हुआ। उन्होंने महिला से संपर्क किया, लेकिन वह गायब हो गई। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं। घटना की शुरुआत एक सामान्य सोशल मीडिया दोस्ती से हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह विश्वास जीतकर बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान में बदल गई।
रामनिवास, 58 वर्षीय सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक, ने 20 जुलाई को फेसबुक पर एक महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार की। महिला ने खुद को इंग्लैंड की निवासी विक्टोरिया फिलिप बताया और भारत घूमने आने की इच्छा जताई। कुछ दिनों बाद, महिला ने रामनिवास से संपर्क किया और बताया कि वह मुंबई एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन डिपार्टमेंट द्वारा रोकी गई है। उसने कहा कि उसे एयरपोर्ट पर पकड़े जाने के कारण टैक्स और सिक्योरिटी शुल्क के रूप में पैसे की आवश्यकता है।
ठगी की प्रक्रिया
महिला के कहने पर, रामनिवास ने 28 से 30 जुलाई के बीच विभिन्न माध्यमों से कुल 11,77,499 रुपये की राशि ट्रांसफर की। इसमें SBI, Canara Bank, YES Bank, IDBI Bank और RBL Bank के माध्यम से की गई ट्रांजेक्शंस शामिल हैं। इन ट्रांजेक्शंस में से कुछ प्रमुख हैं:
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SBI से ₹37,500 और ₹25,000 की दो ट्रांजेक्शंस
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Canara Bank से ₹60,000 और ₹95,000 की दो ट्रांजेक्शंस
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YES Bank और IDBI Bank से RTGS के माध्यम से ₹3,00,000 और ₹2,80,000 की ट्रांजेक्शंस
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RBL Bank से ₹4,999 की ट्रांजेक्शन
इन ट्रांजेक्शंस के माध्यम से, रामनिवास ने महिला के कहने पर पैसे ट्रांसफर किए, यह सोचकर कि वह वास्तव में मुसीबत में है।
पुलिस की कार्रवाई
सेवानिवृत्त शिक्षक द्वारा साइबर ठगी का एहसास होते ही उन्होंने दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। सबसे पहले उन्होंने एफआईआर दर्ज कर मामले की गंभीरता के अनुसार प्राथमिक जांच शुरू की।
पुलिस ने सबसे पहले शिक्षक द्वारा दिए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबर और लेन-देन की पूरी जानकारी जुटाई। ये खाते कई बार अलग-अलग नामों से खोले गए थे और अधिकतर फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर बनाए गए थे। पुलिस ने संबंधित बैंक शाखाओं से जानकारी मांगी और ट्रांजैक्शन का पूरा रिकॉर्ड निकाला।
साथ ही, पुलिस ने उस फेसबुक प्रोफ़ाइल की भी जांच शुरू की। पाया गया कि प्रोफ़ाइल में उपयोग की गई तस्वीरें इंटरनेट से डाउनलोड कर फर्जी प्रोफ़ाइल बनाई गई थी। प्रोफ़ाइल का आईपी एड्रेस विदेश से लॉग इन होने के संकेत दे रहा था, जबकि कुछ बार इसे भारत से भी एक्सेस किया गया था।
इसके अलावा, पुलिस ने साइबर क्राइम पोर्टल के माध्यम से अन्य राज्यों और देशों से संपर्क किया ताकि नेटवर्क में शामिल अन्य अपराधियों की पहचान की जा सके। तकनीकी टीम ने फोन नंबर ट्रेस किए और संदिग्ध खातों को फ्रीज़ करने की प्रक्रिया शुरू की।
फेसबुक फ्रॉड के प्रति जागरूकता
✅ किसी अनजान व्यक्ति से दोस्ती या बातचीत शुरू करने से पहले प्रोफ़ाइल की जाँच करें।
✅ निवेश, लोन, नौकरी या कोई आर्थिक लाभ का दावा करने वाले लिंक पर क्लिक न करें।
✅ दोबारा पुष्टि किए बिना किसी को पैसे ट्रांसफर न करें।
✅ सोशल मीडिया पर साझा की गई निजी जानकारी सीमित रखें।
✅ संदेह होने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
✅ वेबसाइट का URL, बैंक डिटेल्स और दस्तावेज़ सत्यापित करें।
✅ डिजिटल सुरक्षा ऐप और एंटीवायरस का उपयोग करें।
यह घटना सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी की गंभीरता को दर्शाती है। फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अजनबियों से दोस्ती करना और व्यक्तिगत जानकारी साझा करना खतरनाक हो सकता है। विशेष रूप से वृद्ध व्यक्तियों को इस प्रकार की धोखाधड़ी से बचने के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर अपराधी सोशल मीडिया का उपयोग करके लोगों को निशाना बना रहे हैं। रामनिवास जैसे शिक्षित और समझदार व्यक्ति भी इस धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं। इसलिए, सोशल मीडिया पर अजनबियों से दोस्ती करते समय सतर्कता और सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है।
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