बैठुकम्मा 2025 के आयोजन की झलक और वैश्विक आकर्षण

बैठुकम्मा (Bathukamma) तेलंगाना की एक प्रमुख पारंपरिक फूलों की त्योहार है, जिसे “मदर गॉडेस कम अलाइव” — यानी देवी गॉरु को जीवंत अनुभव देने वाली पूजा — के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार खासतौर पर महिलाओं की भागीदारी से सम्पन्न होता है; फूलों से बनी सुंदर संरचनाएँ बनाई जाती हैं, पूजा होती है, भक्ति गीत गाए जाते हैं, और सामूहिक मिलन, सामुदायिक सौहार्द, प्रकृति की सुंदरता आदि का जश्न मनाया जाता है।
बैठुकम्मा न सिर्फ भक्ति की अभिव्यक्ति है बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मर्म से भी जुड़ी हुई है। फूलों और मौसमी सामग्री का उपयोग, प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद, महिलाओं की भूमिका, सामूहिक उत्सव और सांस्कृतिक पहचान — ये सब इस त्योहार की विशेषताएँ हैं।
तारीखें और आयोजन की रूपरेखा – बैठुकम्मा 2025

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शुरुआत: इस वर्ष बैठेुकम्मा 2025 की शुरुआत 21 सितंबर 2025 को होगी।
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समापन: Saddula Bathukamma (बैठुकम्मा का बड़ा दिन) 29 सितंबर 2025 को होगा।
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समय अवधि: यह त्योहार नौ दिनों का है, पूरे राज्य में विभिन्न जिलों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे।
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मुख्य आयोजन स्थल और आकर्षण बिंदु: Thousand Pillar Temple, Warangal से शुरुआत; Tank Bund में ग्रैंड फ्लोरल परेड; LB Stadium में बड़ी बैठकुिम्मा; सार्वजनिक झांकियाँ; फ्लोटिंग बैठुकम्मा; विभिन्न जिलों में प्रतियोगिताएँ; सांस्कृतिक प्रदर्शन आदि।
इस वर्ष की नई पहलें और खास कार्यक्रम
बैठुकम्मा 2025 में सरकार और आयोजकों ने कुछ विशेष योजनाएँ और पहलें की हैं जो इस त्योहार को और भी बड़ा और विशेष बनाएँगी
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Rio Carnival-की तर्ज पर आयोजन
इस बार सरकार ने Bathukamma त्योहार को Rio Carnival की तरह वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कई आयोजन पेश किए हैं। यह न सिर्फ दिखावटी परेड होंगे, बल्कि सांस्कृतिक झांकियाँ, موسیقي, पुष्पोत्सव, और पर्यटन को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम होंगे। -
वर्ल्ड रिकॉर्ड की कोशिश
पर्यटन मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव ने कहा है कि इस वर्ष बैठुकम्मा समारोहों का पैमाना इतना बड़ा होगा कि एक Guinness World Record का प्रयास होगा। उदाहरण के लिए, LB Stadium पर बड़ी संख्या में महिलाओं की बैठकुिम्मा समागम आयोजित किया जाएगा। -
सरकारी और लोक-यात्रा व्यवस्था
राज्य सरकार ने विशेष बस सेवाएँ चलाई हैं — TGSRTC द्वारा 7754 विशेष बसों का प्रावधान किया गया है, जिनमें से कुछ में पूर्व-आरक्षण की सुविधा है, ताकि त्योहार के दिनों में यात्रा व्यवस्था आसान हो। -
इंदिरम्मा साड़ी योजना
महिलाओं के लिए साड़ी वितरण की योजना है — शासन ने स्व सहायता समूहों (Self Help Groups) की 65 लाख महिलाओं को दो साडियाँ देने की तैयारी की है। -
झीलों की बहाली
विशेष रूप से हैदराबाद के Bagh Amberpet के Bathukamma Kunta की बहाली का काम चल रहा है। इस झील को पहले प्रदूषण और अतिक्रमण की वजह से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था, लेकिन अब पुनरुद्धार किया जा रहा है। -
प्रतियोगिताएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम
विभिन्न जिलों में बैठुकम्मा प्रतियोगिताएँ होंगी, बेस्ट बैठुकम्मा चयन, ग्रैंड फ्लोरल परेड, सांस्कृतिक प्रदर्शनों के कार्यक्रम होंगे।
महत्व और सांस्कृतिक अर्थ
बैठुकम्मा सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह कई स्तरों पर सामाजिक और सांस्कृतिक अर्थ रखती है
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महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण
इस त्योहार में महिलाओं का अहम स्थान है — पूजा सामग्री तैयार करना, बैठुकम्मा सजाना, सामूहिक गाना, नृत्य आदि। इससे सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं और महिलाएँ अपनी सांस्कृतिक पहचान को गर्व से व्यक्त करती हैं। -
प्रकृति के साथ मेल
मौसमी फूल, प्राकृतिक सुगंध, सजीव रंग, भूमि-जल-पुष्प आदि का उपयोग, यह सब प्रकृति और पर्यावरण के प्रति प्रेम और संतुलन को दिखाता है। फूलों का बाद प्रयोग खाद तैयार करने के लिए होना (जैसे आपदाओं के बाद) पर्यावरण-अनुकूलता को बढ़ाता है। -
पर्यटन और अर्थव्यवस्था
हुआ है कि इस त्योहार के दौरान राज्य में और बाहर से पर्यटक आते हैं, होटल-व्यवसाय, यात्रा सेवा आदि को बढ़ावा मिलता है। नई बस सेवाएँ, आयोजन स्थलों के सजावट, झांकियाँ-प्रदर्शन आदि से स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। -
राजनीतिक और सामाजिक एकता
त्योहार के इस बड़े पैमाने पर मनाने से सामाजिक एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है। विभिन्न समुदायों की भागीदारी, राज्य-स्थानीय सरकारों की योजनाएँ सभी इस त्योहार को एक प्रतीक बनाती हैं कि संस्कृति और परंपरा के माध्यम से लोग जुड़ सकते हैं।
वैश्विक आकर्षण और बाहरी दृष्टिकोण
बैठुकम्मा 2025 को सिर्फ स्थानीय त्योहार के रूप में नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक ब्रांड के रूप में उभरने की योजनाएँ हैं
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सरकार चाहती है कि यह त्योहार “रियो कार्निवल-स्तर” का प्रतीक बने, ताकि यह अंतर्राष्ट्रीय तौर पर देखा जाए और विदेशी पर्यटकों में रुचि पैदा हो।
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विशेष प्रचार माध्यमों में उड़ान पत्रिकाएँ (in-flight magazines) शामिल की जाएँगी जैसे Air India और IndiGo की पत्रिकाएँ, जिससे यात्रा कर रहे लोग इस त्योहार के बारे में जानें।
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विशेष पर्यटन पैकेज, सांस्कृतिक पर्यटन कार्यक्रम, झीलों और मंदिरों के आसपास की सजावट, आयोजन स्थलों की सजावट आदि ऐसे तत्व होंगे जो पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।
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विदेशों में रहने वाले तेलंगाना समुदाय (diaspora) भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं (उदा. Detroit Telangana Community का Bathukamma Vaibhavam) ताकि उनसे जुड़ी युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति नहीं भूले। DTC USA
चुनौतियाँ और संभावित समस्याएँ
जितनी बड़ी योजनाएँ, उतनी ही चुनौतियाँ भी होंगी
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भारी भीड़ और अव्यवस्था
ज्यादा संख्या में लोग जुटेंगे — पारगमन, सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, स्थान चयन आदि व्यवस्था की मांग होगी। -
पर्यावरणीय दबाव
फूलों की बड़ी संख्या, झीलों एवं स्थलों का संवेदनशीलता, पानी एवं जल निकासी की व्यवस्था, कचरा प्रबंधन आदि पर दबाव पड़ेगा। -
अनुशासन और कानून व्यवस्था
सुरक्षा, सामाजिक अशांति, ध्वनि प्रदूषण, सार्वजनिक स्थानों पर व्यवस्थित अनुमति आदि से संबंधित मुद्दों का सामना करना पड़ सकता है — जैसे कि Charminar-Bhagyalakshmi मंदिर पर निर्वाचन या अनुमति से जुड़े फैसले। -
संसाधन प्रबंधन
बस सेवा, यातायात सुविधाएँ, सार्वजनिक शौचालय, पानी पीने-की व्यवस्था आदि समय रहते सुनिश्चित करना होगा। -
पारंपरिक मूल्यों और ग्लोबल-मार्केटिंग का संतुलन
जब त्योहार को अधिक व्यावसायिक या पर्यटन केंद्र बनाते हैं, तो पारंपरिक संवेदनशीलताएँ प्रभावित हो सकती हैं — देवी पूजा, स्थानीय नियम, प्रथाएँ आदि।
सुझाव से और बेहतर हो सकता है बैठुकम्मा 2025
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आयोजकों को स्थानीय नागरिकों, महिला समूहों और पारंपरिक कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि त्योहार की आत्मा बनी रहे।
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कचरा प्रबंधन और पर्यावरण सर्विसेज को मजबूत करें: लों के बाद उनके निपटान का प्रबंध, जल स्रोतों की सुरक्षा आदि।
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सार्वजनिक सुविधाएँ जैसे पानी, शौचालय, स्वास्थ्य तंबू, यातायात मार्गों का चिह्न आदि पहले से व्यवस्थित हों।
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सामाजिक मीडिया के साथ-साथ डिजिटल इंटरैक्शन का उपयोग करें — लाइव स्ट्रीमिंग, फोटो-वीडियो शेयरिंग, विश्वभर के लोगों को जोड़ने के माध्यम से दृश्यता बढ़ाना।
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पर्यटक-उन्मुख जानकारी और गाइडेड टूर पैकेज तैयार हों — जहाँ लोग बैठुकम्मा के इतिहास, फूलों के प्रकार, पूजा विधि आदि जान सकें।
बैठुकम्मा 2025 केवल फूलों की सजावट या पारंपरिक पूजा नहीं है; यह एक समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव है जो महिलाओं, प्रकृति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को एक साथ जोड़ता है। इस वर्ष की योजनाएँ — Rio-Carinval जैसा पैमाना, वर्ल्ड रिकॉर्ड की कोशिशें, बड़े-बस यात्रा प्रबंध, झिलमिलाती झांकी, संसद-स्तरीय प्रचार — ये सब यह दिखाते हैं कि बैठुकम्मा को सिर्फ राज्य का त्योहार नहीं बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक प्रतीक बनाने की कोशिश की जा रही है।
यदि यह सफल हो गया, तो बैठुकम्मा 2025 आने वाले वर्षों में भारत की सांस्कृतिक पर्यटन मैप पर एक प्रमुख स्थान बनाएगा, विदेशी और घरेलू पर्यटक, युवा और बुजुर्ग सभी हिस्सेदार बनेंगे, और परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्थापित होगा।
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