ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो को 27 साल की सजा लोकतंत्र की रक्षा में ऐतिहासिक फैसला

परिचय
11 सितंबर 2025 को ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को तख्तापलट की साजिश रचने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप में 27 साल और 3 महीने की सजा सुनाई। यह फैसला ब्राजील के राजनीतिक इतिहास में मील का पत्थर है, क्योंकि यह पहला अवसर है जब किसी पूर्व राष्ट्रपति को लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के लिए दोषी ठहराया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
जायर बोल्सोनारो, जो 2019 से 2022 तक ब्राजील के राष्ट्रपति रहे, अपने विवादित और कट्टरपंथी राजनीतिक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में उनकी हार ने देश में राजनीतिक उथल-पुथल को जन्म दिया। हार के बाद, बोल्सोनारो और उनके समर्थकों ने कथित रूप से चुनाव परिणामों को चुनौती देने और सत्ता में बने रहने के लिए असामाजिक और हिंसक तरीकों की योजना बनाई।
इस योजना के तहत, सेना और पुलिस के कुछ हिस्सों के साथ मिलकर कथित रूप से एक तख्तापलट की साजिश रची गई। जांच में यह भी सामने आया कि चुनाव परिणामों को बदलने के लिए संगठनात्मक स्तर पर कई आपराधिक गतिविधियाँ की गईं, जिसमें सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करने की कोशिश शामिल थी।
बोल्सोनारो के खिलाफ ये आरोप केवल चुनाव हार की प्रतिक्रिया नहीं थे, बल्कि ब्राजील के लोकतंत्र को सीधे चुनौती देने वाली गतिविधियों से जुड़े थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में व्यापक जांच के बाद उन्हें दोषी ठहराया, जिससे यह फैसला ब्राजील के लोकतंत्र की रक्षा के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर बन गया।
2022 के राष्ट्रपति चुनाव में बोल्सोनारो की हार के बाद, उन्होंने सत्ता में बने रहने के लिए तख्तापलट की साजिश रची। उनकी योजना में राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा की हत्या की साजिश भी शामिल थी। बोल्सोनारो और उनके सहयोगियों ने मिलकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश की। इस साजिश में कई पूर्व मंत्री और सैन्य अधिकारी भी शामिल थे।
कोर्ट का फैसला और सजा
ब्राजील की सर्वोच्च न्यायालय, सुप्रीम फेडरल कोर्ट (STF), ने जायर बोल्सोनारो को 11 सितंबर 2025 को 27 साल और 3 महीने की सजा सुनाई। इस सजा के पीछे मुख्य कारण 2022 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद कथित रूप से सत्ता में बने रहने के लिए तख्तापलट की साजिश रचना था।
सुप्रीम कोर्ट ने पांच गंभीर आरोपों में उन्हें दोषी ठहराया:
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लोकतंत्र को समाप्त करने की कोशिश करना।
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संगठित आपराधिक समूह का हिस्सा होना।
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सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना।
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संविधानिक व्यवस्था को हिंसक तरीके से चुनौती देना।
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संवैधानिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसी गंभीर गतिविधियाँ।
इस मामले में पांच न्यायधीशों की समीक्षा हुई, जिसमें से चार ने बोल्सोनारो को दोषी पाया। एक न्यायधीश ने असहमत रहते हुए उन्हें बरी किया, लेकिन यह फैसले उनके खिलाफ अपील की संभावना को खत्म नहीं करता।
सजा में उनकी उम्र (70 वर्ष से अधिक) को ध्यान में रखते हुए कुछ रियायतें दी गई हैं। फिलहाल, बोल्सोनारो घर में नजरबंद हैं और उनके खिलाफ अन्य आरोप भी लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह 2030 तक किसी भी सार्वजनिक पद के लिए अयोग्य रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने बोल्सोनारो को पांच गंभीर आरोपों में दोषी पाया:
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तख्तापलट की साजिश रचना
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सशस्त्र आपराधिक संगठन का हिस्सा बनना
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लोकतांत्रिक संस्थाओं को हिंसक तरीके से कमजोर करने की कोशिश
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सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना
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संविधानिक व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश
इन आरोपों के तहत बोल्सोनारो को 27 साल और 3 महीने की सजा सुनाई गई। साथ ही, उन पर 376,000 ब्राजीलियाई रियाल (लगभग 70,000 अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना भी लगाया गया।
सहयोगियों की सजा
जायर बोल्सोनारो के खिलाफ फैसले के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने उनके कई सहयोगियों और सैन्य अधिकारियों को भी दोषी ठहराया। ये लोग कथित रूप से तख्तापलट की योजना बनाने और लोकतंत्र को कमजोर करने के प्रयासों में शामिल थे।
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सैन्य और पुलिस अधिकारी: कुछ उच्च रैंक के सैन्य अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों ने कथित रूप से चुनाव परिणामों को बदलने के लिए साजिश में मदद की। उन्हें संगठित अपराध और लोकतांत्रिक संस्थानों को नुकसान पहुँचाने के आरोप में सजा दी गई।
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राजनीतिक सहयोगी: बोल्सोनारो के निकट सहयोगियों ने मीडिया और राजनीतिक नेटवर्क के माध्यम से चुनाव परिणामों को अस्वीकार करने और जनता को भड़काने में भूमिका निभाई। कई को जेल की सजा और भविष्य में सार्वजनिक पदों के लिए अयोग्यता का आदेश दिया गया।
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सजा की अवधि और कानूनी स्थिति: सहयोगियों की सजा बोल्सोनारो की तुलना में अलग-अलग है, लेकिन सभी को लंबी जेल अवधि और राजनीतिक अयोग्यता का सामना करना होगा। कुछ मामलों में गिरफ्तारी के बजाय नजरबंदी या इलेक्ट्रॉनिक निगरानी लागू की गई है।
यह निर्णय दिखाता है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल पूर्व राष्ट्रपति को ही नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को भी लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशों के लिए जवाबदेह ठहराया। इससे ब्राजील में लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए एक मजबूत संदेश गया कि कोई भी व्यक्ति या समूह कानून से ऊपर नहीं है।
बोल्सोनारो के अलावा, उनके कई करीबी सहयोगियों को भी सजा सुनाई गई:वॉल्टर ब्रागा नेटो: 26 साल की सजा और 152,000 रियाल का जुर्माना
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अल्मिर गार्नियर: 24 साल की सजा और 152,000 रियाल का जुर्माना
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ऑगस्टो हेलेनो: 21 साल की सजा और 128,000 रियाल का जुर्माना
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पाउलो सर्जियो नोगueira: 19 साल की सजा और 128,000 रियाल का जुर्माना
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अलेक्जेंड्रे रामाजेम: 16 साल और 1 महीने की सजा और 76,000 रियाल का जुर्माना
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एंडरसन टोरेस: 24 साल की सजा और 152,000 रियाल का जुर्माना
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मauro Cid: 2 साल की खुली जेल की सजा (सहयोग के कारण सजा में छूट)
सभी दोषियों को आठ साल तक चुनावी राजनीति से प्रतिबंधित किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
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सकारात्मक प्रतिक्रिया
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कई देशों ने ब्राजील की न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा की सराहना की।
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यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने लोकतांत्रिक संस्थानों की मजबूती को ऐतिहासिक कदम बताया।
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वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने इसे न्याय का उदाहरण और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक संदेश माना।
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नकारात्मक और आलोचनात्मक प्रतिक्रिया
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कुछ देशों और राजनेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।
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अमेरिका में कुछ कांग्रेसी नेताओं ने इस फैसले की आलोचना की और इसे “विच हंट” कहा।
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बोल्सोनारो के समर्थक समूहों ने भी इसे असंवैधानिक और पक्षपाती कदम बताया।
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अंतरराष्ट्रीय मीडिया की प्रतिक्रिया
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अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने इसे ब्राजील के लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक फैसला बताया।
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कुछ मीडिया हाउस ने इसे एक चेतावनी के रूप में दिखाया कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाले किसी भी व्यक्ति या समूह को कानूनी कार्रवाई से नहीं बचाया जा सकता।
इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस फैसले को “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया और ब्राजील सरकार से फैसले की समीक्षा करने की अपील की। वहीं, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा और अन्य नेताओं ने न्यायपालिका के इस फैसले का समर्थन किया और इसे लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। Reuters
लोकतंत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण कदम
ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को 27 साल की सजा सुनाना केवल एक कानूनी फैसला नहीं है, बल्कि यह देश में लोकतंत्र की सुरक्षा और संवैधानिक संस्थानों की मजबूती का प्रतीक भी है। इस फैसले को लोकतंत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण कदम माना जाने के कई कारण हैं:
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कानून की सर्वोच्चता स्थापित करना
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिखाता है कि कोई भी व्यक्ति—even पूर्व राष्ट्रपति—कानून से ऊपर नहीं है। लोकतंत्र में सत्ता में बैठे व्यक्ति को भी कानून के दायरे में रहना पड़ता है, और इस फैसले ने इसे स्पष्ट रूप से प्रमाणित किया। -
लोकतांत्रिक संस्थानों की सुरक्षा
बोल्सोनारो और उनके सहयोगियों द्वारा कथित तख्तापलट की साजिश ने ब्राजील की संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती दी थी। सजा सुनाने से यह संदेश गया कि किसी भी तरह की हिंसक या अवैध गतिविधियों से लोकतंत्र को कमजोर नहीं किया जा सकता। -
भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग पर रोक
यह फैसला यह भी दिखाता है कि सत्ता का दुरुपयोग और लोकतंत्र को कमजोर करने वाले प्रयासों पर कानूनी कार्रवाई संभव है। इससे भविष्य में राजनीतिक नेताओं और अधिकारियों को सजग रहने का संकेत मिलता है। -
सामाजिक और राजनीतिक चेतावनी
इस निर्णय ने जनता और राजनीतिक दलों को यह संदेश दिया कि लोकतंत्र की रक्षा में नागरिक और न्यायपालिका दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार के असंवैधानिक प्रयासों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। -
वैश्विक संदेश
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह फैसला लोकतंत्र की रक्षा का उदाहरण बना। इससे दुनिया भर के देशों में यह संदेश गया कि लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ न्यायपालिका निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
यह फैसला ब्राजील के लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश करेगा तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी। यह फैसला न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है।
ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को तख्तापलट की साजिश रचने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप में 27 साल और 3 महीने की सजा सुनाई गई है। यह फैसला ब्राजील के राजनीतिक इतिहास में मील का पत्थर है और लोकतंत्र की रक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह संदेश जाता है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश करने वालों को कड़ी सजा दी जाएगी।
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