संयुक्त राष्ट्र महासभा में वैश्विक मुद्दों पर चर्चा 79वें सत्र का विश्लेषण

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का 79वां सत्र 10 सितंबर 2024 से 9 सितंबर 2025 तक चला, जिसमें वैश्विक नेताओं ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। इस सत्र की अध्यक्षता कैमरून के पूर्व प्रधानमंत्री फिलेमोन येंग ने की। महासभा में जलवायु परिवर्तन, संघर्ष, सतत विकास, मानवाधिकार, और अंतर्राष्ट्रीय शांति जैसे प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
प्रमुख वैश्विक मुद्दे

1. जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट
जलवायु परिवर्तन को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी है। 79वें सत्र में जलवायु आपातकाल, समुद्र स्तर में वृद्धि, और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की गई। विश्व मौसम संगठन (WMO) ने “Early Warnings for All” पहल की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य 2027 तक हर व्यक्ति को मौसम संबंधी खतरों से पूर्व चेतावनी देना है।
2. संघर्ष और मानवीय संकट
सूडान, हैती, यूक्रेन, और गाजा पट्टी में जारी संघर्षों ने वैश्विक शांति और सुरक्षा को चुनौती दी है। महासभा में इन संघर्षों के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और शांति प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
3. सतत विकास लक्ष्य (SDGs) की प्राप्ति में चुनौतियाँ
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, बढ़ते कर्ज़, और विकास सहायता में कमी ने SDGs की प्राप्ति में बाधाएँ उत्पन्न की हैं। महासभा में इन चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित और प्रभावी उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
4. सुरक्षा परिषद में सुधार
यूएन सुरक्षा परिषद की संरचना और निर्णय प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर चर्चा हुई। कई देशों ने परिषद में अधिक प्रतिनिधित्व और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।
5. डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का वैश्विक शासन
डिजिटल विभाजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और वैश्विक डिजिटल शासन पर “Summit of the Future” में चर्चा की गई। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इन मुद्दों के लिए उपयुक्त वैश्विक शासन की आवश्यकता पर बल दिया।
🇮🇳 भारत की भूमिका
सत्र की थीम और नेतृत्व
सत्र की थीम थी: “विविधता में एकता, शांति की उन्नति, सतत विकास और हर जगह सभी के लिए मानव सम्मान”। कैमरून के पूर्व प्रधानमंत्री फिलेमोन यांग ने इस सत्र की अध्यक्षता की, जो अफ्रीका से महासभा के अध्यक्ष बनने वाले 13वें नेता थे। उनका नेतृत्व वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को प्रमुखता देने के लिए सराहा गया।
शांति और सुरक्षा
सत्र में यूक्रेन, गाजा, सूडान और हैती जैसे संघर्षों पर चर्चा की गई। यूएन महासभा ने सुरक्षा परिषद के वीटो अधिकारों के बावजूद इन मुद्दों पर संज्ञान लिया और समाधान की दिशा में कदम उठाए। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इन संघर्षों के व्यापक समाधान के लिए और प्रयासों की आवश्यकता है
सतत विकास और जलवायु परिवर्तन
महासभा में जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और तकनीकी असमानता जैसे मुद्दों पर सामूहिक रणनीतियों की आवश्यकता पर बल दिया गया। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि “यह समय केवल चर्चा का नहीं, बल्कि ठोस समाधान प्रस्तुत करने और उन पर अमल करने का है” ।
महिलाओं के अधिकार और लैंगिक समानता
बीजिंग घोषणा के 30 वर्ष पूरे होने पर, वैश्विक नेताओं ने महिलाओं के अधिकारों में धीमी प्रगति पर चिंता व्यक्त की। महासचिव ने पुरुष-प्रधान उद्योगों, पक्षपाती डेटा और भेदभावपूर्ण एल्गोरिदम के माध्यम से लैंगिक असमानताओं के बढ़ने की बात की Reuters।
🇮🇳 भारत का दृष्टिकोण
भारत ने महासभा में बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख और विकासशील देशों के हितों की रक्षा जैसे मुद्दों पर जोर दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं पर महासभा का नेतृत्व महत्वपूर्ण बताया और भारत की सक्रिय भागीदारी की बात की
भारत ने महासभा में सक्रिय भागीदारी की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन और पाकिस्तान पर टिप्पणी की और सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत ने जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
79वें UNGA सत्र ने वैश्विक मुद्दों पर गंभीर चर्चा की और समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया। जलवायु परिवर्तन, संघर्ष, और डिजिटल शासन जैसे विषयों पर आगे की कार्रवाई के लिए सदस्य देशों को एकजुट होने की आवश्यकता है। भारत ने इस सत्र में सक्रिय भूमिका निभाई और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अपना योगदान दिया।
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