अंतिम पंघल का झागेड रेसलिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक — कहानी, संघर्ष और भविष्य

नई दिल्ली / झागेड (क्रोएशिया) — सितंबर 2025 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत की महिला फ्रीस्टाइल रेसलर अंतिम पंघल ने वज़न श्रेणी 53 किलोग्राम में दमदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता। यह उनका लगातार दूसरा विश्व चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज है, और इस जीत ने उनकी प्रतियोगी तौर-तरीकों, मानसिक दृढ़ता और कुश्ती करियर में आने वाले समय की संभावनाओं को फिर से साबित कर दिया।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे
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अंतिम पंघल का बैकग्राउंड और करियर यात्रा
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झागेड में उनका मैच-मार्ग और मुकाबले
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इस जीत का भारतीय कुश्ती के लिए क्या मतलब है
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चुनौतियाँ, लिए गए सबक और अगले लक्ष्य
शुरुआत अंतिम पंघल कौन हैं?
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अंतिम पंघल का जन्म 31 अगस्त 2004 को हरियाणा के हिसार जिले के गाँव भगाना में हुआ।
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उन्होंने बचपन से ही कुश्ती में रुचि दिखाई और जल्दी-जल्दी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलताएँ प्राप्त करने लगीं।
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जूनियर स्तर पर उन्होंने कई खिताब जीते — U20 विश्व चैंपियनशिप में सफलताएँ, एशियाई चैम्पियनशिप में पदक, आदि।
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2024 के पेरिस ओलिंपिक में हालांकि निर्णय उनके पक्ष में नहीं गया; शुरुआती मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। यह उनके करियर के लिए एक बड़ा झटका था।
झागेड 2025 विश्व चैंपियनशिप में उनकी यात्रा

स्थान व तारीख
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प्रतियोगिता क्रोएशिया के शहर ज़ाग्रेब में हुई थी।
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महिला फ्रीस्टाइल 53 किग्रा श्रेणी में कुल 23 प्रतियोगी थे, विभिन्न देशों से।
मैच-मार्ग
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प्रारंभिक राउंड में अंतिम पंघल ने कड़ी तैयारी और तकनीकी कुश्ती से शुरुआत की। उनके पहले मुकाबलों में उन्होंने स्पष्ट बढ़त दिखाई। The
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क्वार्टरफाइनल में उनका मुकाबला चीन की ज़ांग जिन (Zhang Jin) से हुआ। यह मुक़ाबला विशेष रूप से रोमांचक था क्योंकि अंतिम चार सेकंडों में उन्होंने एक तख़्तीनडाउन कर के जीत दर्ज की।
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सेमीफाइनल मैच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिससे वो फाइनल से बाहर हो गईं।
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लेकिन कांस्य पदक के मुकाबले (ब्रॉन्ज मेडल प्लेऑफ) में उन्होंने स्वीडन की उप-23 विश्व चैंपियन एम्मा जॉना डेसीज़ मलमग्रेन को 9-1 के भारी स्कोर से मात दी।
विश्लेषण क्या विशेष था इस प्रदर्शन में?
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मानसिक मजबूती (Mental Resilience): सेमीफाइनल हार के बाद भी अपनी टेंशन को संभाला और ब्रॉन्ज मैच में आत्मविश्वास के साथ उतरना यह दिखाता है कि उन्होंने मानसिक रूप से अच्छा काम किया।
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तकनीक और टैक्टिक्स: उनके मुकाबलों में टैकडाउन, काउंटर मूव्स, रेपेटेशन ने साफ दिखाया कि उन्होंने सिर्फ शक्ति नहीं, बल्कि रणनीति भी अच्छी तरह इस्तेमाल की। विशेषकर ब्रॉन्ज मुकाबले में शुरुआती देर से नियंत्रित बढ़त बनाना और फिर उसे बढ़ाना।
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लगातार प्रदर्शन: यह उनका दूसरा विश्व चैंपियनशिप ब्रॉन्ज है (पिछली बार 2023 में बेलग्रेड में)। इसने दिखाया कि वह उच्च स्तर पर स्थिरता बनाए रखने की क्षमता रखती हैं।
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भारत के लिए पहला पदक इस चैंपियनशिप में: इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के लिए यह पहला फ़्रीस्टाइल कुश्ती पदक है। अर्थात् टीम के लिए भी यह एक बड़ी राहत है क्योंकि भारत अन्य मुल्कों के मुकाबले अपेक्षाकृत कम पदक अर्जित कर पाया है।
महत्व भारतीय कुश्ती तथा महिला खेल के लिए
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प्रेरणा का स्रोत: युवा लड़कियों और महिला खिलाड़ियों के लिए यह एक मिसाल है। ख़ासकर उन जगहों से जहाँ संसाधन कम हों, लेकिन इच्छाशक्ति और मेहनत हों।
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खेलों में बराबरी की लड़ाई महिला मुकाबलों में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से प्रगति की है — अंतिम पंघल जैसे चेहरों ने इसे और मजबूती दी है।
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अंतरराष्ट्रीय मान्यता विश्व स्तर पर लगातार पदकों से भारत की कुश्ती टीम की प्रतिष्ठा बढ़ेगी। इससे प्रशिक्षक, संसाधन, कोचिंग स्तर आदि में निवेश संभव होगा।
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वर्ल्ड मेडलिस्ट की सूची में नाम भारत की पूर्व विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने वाली महिला पहलवानों की संख्या बढ़ी है। अंतिम की इस जीत ने उन्हें उन कुछ चुनिंदा महिला पहलवानों में शामिल कर दिया है जो विश्व स्तर पर लगातार प्रदर्शन कर रही हैं।
चुनौतीयाँ और सबक
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ओलिंपिक में नाकामी का दबाव पेरिस 2024 में पहले राउंड में बाहर होना हो सकता है कि उनकी मानसिकता पर असर डाले, लेकिन उन्होंने इसे अपनी प्रेरणा बनाया।
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मेडिल की कमी-पूरी उम्मीदें विश्व चैंपियनशिप या अन्य बड़े टूर्नामेंट में जब expectations बढ़ती हैं, तो दबाव भी बढ़ता है। इस तरह के मुकाबलों में अनुभव काम आता है, जो कि अंतिम पा रही हैं।
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तकनीकी उन्नयन शारीरिक ताकत के साथ-साथ तकनीक, ट्रेनिंग, फिटनेस और पोषण पर ध्यान देना होगा ताकि फाइनल तक पहुंचने की क्षमता मजबूत हो।
भविष्य की संभावना और लक्ष्य
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गोल्ड मेडल की तैयारी अब जब उन्होंने लगातार 2 ब्रॉन्ज जीते हैं, अगला लक्ष्य होगा विश्व चैम्पियनशिप या एशियाई ओलिंपिक क्वालीफायर में गोल्ड लाने की तैयारी।
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ओलिंपिक प्रदर्शन सुधारना ओलिंपिक स्तर पर प्रदर्शन करना अंतिम खेल लक्ष्य है। पिछली बार शुरूआती हार से सीख लेकर अगली बार अधिक अनुभव और बेहतर रणनीति के साथ उतरना।
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कॉमनवेल्थ और एशियाई गेम्स में पदक बढ़ाना इन टूर्नामेंटों में भारी प्रतिस्पर्धा है, लेकिन सफलता यहाँ न केवल पदकों की संख्या बढ़ाएगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी देगी।
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प्रेरणा देना और प्रेरित करना अपनी सफलता से अन्य महिला पहलवानों को प्रेरित करना, ग्रामीण क्षेत्रों में और महिलाओं को कुश्ती की ओर आकर्षित करना।
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व्यावसायिक समर्थन व संसाधन: बेहतर कोचिंग, सुधारित ट्रेनिंग सुविधा, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों में भागीदारी — ये सभी अगले कदम होंगे।
अंतिम पंघल की कांस्य पदक जीत केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है — यह भारतीय कुश्ती की प्रगति का प्रतीक है। यह दिखाती है कि अगर नया मंथन हो, सही मार्गदर्शन हो, तो लड़कियां सीमाएँ तोड़ सकती हैं।
इस जीत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत के पास विश्व स्तर पर मुकाबला करने के लिए प्रतिभा है; बस संसाधन, लगातार प्रशिक्षण और बेहतर स्ट्रैटेजी की ज़रूरत है।
“हिम्मत और मेहनत के साथ हार के बाद भी उठ खड़े होना ही असली विजेता की पहचान है।”
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