भारत की सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अपनी पहली ‘ड्रोन कमांडो’ बैच की ट्रेनिंग शुरू कर दी है। यह कदम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अनुभवों और रूस-यूक्रेन युद्ध से मिली सीख के आधार पर उठाया गया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य BSF के जवानों को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करना है।
BSF की ‘ड्रोन वारफेयर स्कूल’ की स्थापना
BSF ने मध्य प्रदेश के टेकनपुर में अपनी ‘ड्रोन वारफेयर स्कूल’ की स्थापना की है। यह स्कूल जवानों को ड्रोन संचालन, निगरानी, साइबर सुरक्षा, तकनीकी समन्वय और आपातकालीन स्थितियों में प्रतिक्रिया की ट्रेनिंग प्रदान करता है। इस स्कूल का उद्घाटन BSF के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने किया था। इसका उद्देश्य जवानों को ड्रोन तकनीक में दक्ष बनाना है ताकि वे सीमाओं की सुरक्षा में और प्रभावी भूमिका निभा सकें। Express
पहली बैच की ट्रेनिंग और लक्ष्य

पहली बैच का आकार और चयन
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पहली बैच में लगभग 45 जवानों को शामिल किया गया है।
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चयन प्रक्रिया बेहद कड़ी थी; जिसमें शारीरिक दक्षता, तकनीकी समझ और मानसिक तैयारी पर विशेष ध्यान दिया गया।
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यह बैच मध्य प्रदेश के टेकनपुर में स्थापित BSF के ड्रोन वारफेयर स्कूल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है।
प्रशिक्षण की अवधि और पाठ्यक्रम
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प्रशिक्षण की अवधि लगभग 5 से 6 सप्ताह है।
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पाठ्यक्रम में शामिल हैं
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ड्रोन संचालन और उड़ान तकनीक – ड्रोन को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से उड़ाने की ट्रेनिंग।
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निगरानी और टोही (Surveillance & Reconnaissance) – सीमा पर ड्रोन के माध्यम से वास्तविक समय में निगरानी।
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साइबर सुरक्षा – ड्रोन संचालन में हैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस से बचाव।
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तकनीकी समन्वय – ड्रोन और अन्य उपकरणों के बीच तालमेल और डेटा शेयरिंग।
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आपातकालीन प्रतिक्रिया – संकट की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई।
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लक्ष्य और भविष्य की योजना
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इस बैच का मुख्य लक्ष्य है सीमाओं पर निगरानी और सुरक्षा में सुधार।
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जवानों को ड्रोन तकनीक में दक्ष बनाकर सीमाओं पर घुसपैठ, संदिग्ध गतिविधियों और खतरों की पहचान करना।
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भविष्य में BSF हर साल लगभग 500 जवानों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखती है।
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नई तकनीकें और ड्रोनों के मॉडल भी प्रशिक्षण में शामिल किए जाएंगे, जिससे जवानों की क्षमता और बढ़ेगी।
रणनीतिक महत्व
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यह प्रशिक्षण BSF को आधुनिक युद्ध और साइबर युग की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करता है।
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पहली बैच की सफलता के बाद ड्रोन कमांडो की संख्या बढ़ाई जाएगी और अन्य बैचों की ट्रेनिंग भी जारी रहेगी।
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इसका प्रभाव न केवल भारत की सीमा सुरक्षा पर पड़ेगा, बल्कि जवानों की तकनीकी दक्षता और युद्ध रणनीति में सुधार भी होगा।
पहले बैच में लगभग 45 जवानों को ड्रोन कमांडो और ड्रोन वारियर्स पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया गया है। यह बैच अब सीमाओं पर तैनात हो चुका है। दूसरे बैच की ट्रेनिंग जारी है, और वार्षिक आधार पर लगभग 500 जवानों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। The Tribune
ड्रोन कमांडो की भूमिका
ड्रोन कमांडो की मुख्य भूमिका सीमाओं पर ड्रोन के माध्यम से निगरानी करना, घुसपैठ की पहचान करना और आवश्यकतानुसार कार्रवाई करना है। वे ड्रोन के माध्यम से वास्तविक समय की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे सीमा पर सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकता है।
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की विशेषताएँ
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ड्रोन संचालन जवानों को ड्रोन उड़ाने की तकनीक सिखाई जाती है।
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निगरानी सीमा पर ड्रोन के माध्यम से निगरानी करना।
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साइबर सुरक्षा ड्रोन के संचालन में साइबर खतरों से बचाव।
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तकनीकी समन्वय ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों के बीच समन्वय।
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आपातकालीन प्रतिक्रिया आपातकालीन स्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका
सीमाओं पर निगरानी और सुरक्षा
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ड्रोन वास्तविक समय (real-time) वीडियो और डेटा प्रदान करते हैं, जिससे सीमाओं पर घुसपैठ या संदिग्ध गतिविधियों का तुरंत पता लगाया जा सकता है।
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BSF जैसे बलों के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सीमाओं पर सैनिकों की संख्या कम करते हुए सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है।
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ड्रोन कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में भी निगरानी कर सकते हैं, जहाँ मानव सैनिकों का पहुंचना कठिन होता है।
टोही और इंटेलिजेंस (Intelligence)
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आधुनिक युद्ध में सटीक जानकारी (accurate intelligence) सबसे महत्वपूर्ण हथियार है।
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ड्रोन हवाई कैमरों, इन्फ्रारेड सेंसर और थर्मल इमेजिंग का उपयोग कर दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाते हैं।
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इससे कमांडर को निर्णय लेने में तेजी और सटीकता मिलती है।
कम जोखिम और कम नुकसान
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ड्रोन मानव जीवन को जोखिम में डाले बिना खतरनाक मिशनों में भेजे जा सकते हैं।
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खतरनाक क्षेत्रों में पैदल सैनिक भेजने की तुलना में ड्रोन ज्यादा सुरक्षित और सटीक विकल्प हैं।
हमला और समर्थन
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कई आधुनिक ड्रोन केवल निगरानी तक सीमित नहीं हैं; कुछ हमले करने और लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम हैं।
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BSF जैसे बल फिलहाल निगरानी और टोही पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, लेकिन भविष्य में ड्रोन हथियारों के साथ भी इस्तेमाल हो सकते हैं।
साइबर और तकनीकी युद्ध
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ड्रोन संचालन में साइबर सुरक्षा की अहम भूमिका है।
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दुश्मन द्वारा ड्रोन को हैक करने या इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस करने का खतरा रहता है।
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इसलिए ड्रोन कमांडो को साइबर सुरक्षा, तकनीकी समन्वय और आपातकालीन परिस्थितियों में प्रतिक्रिया की ट्रेनिंग दी जाती है।
वैश्विक दृष्टिकोण
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रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य अंतरराष्ट्रीय संघर्षों ने दिखाया कि ड्रोन युद्ध का भविष्य हैं।
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कई देशों की सेनाएँ ड्रोन तकनीक में निवेश बढ़ा रही हैं और इसे प्रमुख युद्ध रणनीति का हिस्सा बना रही हैं।
ऑपरेशन सिंदूर और रूस-यूक्रेन युद्ध से यह स्पष्ट हुआ है कि युद्ध की प्रकृति बदल रही है। अब युद्ध में ड्रोन, रोबोट्स और अन्य तकनीकी उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका है। BSF ने इस बदलती हुई स्थिति को समझते हुए ड्रोन वारफेयर को अपनी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल किया है।
भविष्य की दिशा
बैचों की संख्या और विस्तार
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आने वाले वर्षों में BSF ड्रोन कमांडो की संख्या बढ़ाने की योजना बना रही है।
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हर साल नए बैचों के प्रशिक्षण से जवानों को लगातार तकनीकी और रणनीतिक दक्षता दी जाएगी।
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उद्देश्य यह है कि हर प्रमुख सीमा पर पर्याप्त ड्रोन कमांडो तैनात हों।
तकनीकी उन्नयन और नवाचार
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BSF नई तकनीकों और उन्नत ड्रोन मॉडल को प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल कर रही है।
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इसमें AI (Artificial Intelligence) आधारित ड्रोन, autonomous UAVs और advanced surveillance drones शामिल हैं।
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जवानों को ड्रोन संचालन, निगरानी और साइबर सुरक्षा में मास्टरी दी जाएगी।
सीमाओं पर वास्तविक तैनाती
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ड्रोन कमांडो की ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य सीमाओं पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ाना है।
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प्रशिक्षण के बाद, जवानों को वास्तविक क्षेत्र में तैनात किया जाएगा ताकि घुसपैठ, संदिग्ध गतिविधियां और सुरक्षा खतरों का तुरंत पता लगाया जा सके।
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यह BSF की मोबाइल और तकनीकी क्षमता को भी बढ़ाएगा।
वैश्विक मानकों के अनुसार तैयारियाँ
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BSF अन्य देशों की सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ड्रोन युद्ध तकनीकों और रणनीतियों का अध्ययन कर रही है।
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यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय सीमा सुरक्षा बल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सक्षम बने।
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भविष्य में BSF को रियल टाइम डेटा एनालिटिक्स, इंटेलिजेंस गेदरिंग और ड्रोन ऑपरेशन्स में अग्रणी बनाने पर जोर होगा।
आधुनिक युद्ध की तैयारियाँ
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आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका बढ़ती जा रही है।
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BSF की तैयारी न केवल निगरानी तक सीमित रहेगी, बल्कि आवश्यकतानुसार टैक्सटिक मिशन और संकट प्रबंधन में भी ड्रोन कमांडो की भूमिका अहम होगी।
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यह भविष्य की सीमा सुरक्षा और युद्ध रणनीति को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाएगा।
BSF की योजना है कि आने वाले वर्षों में ड्रोन कमांडो की संख्या में वृद्धि की जाए। इसके लिए प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी और नई तकनीकों को शामिल किया जाएगा। इससे BSF की क्षमता में वृद्धि होगी और वह सीमाओं की सुरक्षा में और प्रभावी भूमिका निभा सकेगी।
BSF की ‘ड्रोन कमांडो’ बैच की ट्रेनिंग शुरू होना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम भारत की सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया है। आधुनिक तकनीकों का समावेश BSF को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करेगा।
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