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“BSF की पहली 45 ‘ड्रोन कमांडो’ बैच की ट्रेनिंग शुरू सीमा सुरक्षा में नई तकनीक”

BSF की पहली ‘ड्रोन कमांडो’ बैच की ट्रेनिंग शुरू एक नई दिशा में कदम

भारत की सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अपनी पहली ‘ड्रोन कमांडो’ बैच की ट्रेनिंग शुरू कर दी है। यह कदम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अनुभवों और रूस-यूक्रेन युद्ध से मिली सीख के आधार पर उठाया गया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य BSF के जवानों को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करना है।


 BSF की ‘ड्रोन वारफेयर स्कूल’ की स्थापना

BSF ने मध्य प्रदेश के टेकनपुर में अपनी ‘ड्रोन वारफेयर स्कूल’ की स्थापना की है। यह स्कूल जवानों को ड्रोन संचालन, निगरानी, साइबर सुरक्षा, तकनीकी समन्वय और आपातकालीन स्थितियों में प्रतिक्रिया की ट्रेनिंग प्रदान करता है। इस स्कूल का उद्घाटन BSF के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने किया था। इसका उद्देश्य जवानों को ड्रोन तकनीक में दक्ष बनाना है ताकि वे सीमाओं की सुरक्षा में और प्रभावी भूमिका निभा सकें। Express


पहली बैच की ट्रेनिंग और लक्ष्य

 पहली बैच का आकार और चयन


 प्रशिक्षण की अवधि और पाठ्यक्रम


 लक्ष्य और भविष्य की योजना


रणनीतिक महत्व

पहले बैच में लगभग 45 जवानों को ड्रोन कमांडो और ड्रोन वारियर्स पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया गया है। यह बैच अब सीमाओं पर तैनात हो चुका है। दूसरे बैच की ट्रेनिंग जारी है, और वार्षिक आधार पर लगभग 500 जवानों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। The Tribune


 ड्रोन कमांडो की भूमिका

ड्रोन कमांडो की मुख्य भूमिका सीमाओं पर ड्रोन के माध्यम से निगरानी करना, घुसपैठ की पहचान करना और आवश्यकतानुसार कार्रवाई करना है। वे ड्रोन के माध्यम से वास्तविक समय की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे सीमा पर सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकता है।


 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की विशेषताएँ


 आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका

 सीमाओं पर निगरानी और सुरक्षा


 टोही और इंटेलिजेंस (Intelligence)


 कम जोखिम और कम नुकसान


 हमला और समर्थन


 साइबर और तकनीकी युद्ध


 वैश्विक दृष्टिकोण

ऑपरेशन सिंदूर और रूस-यूक्रेन युद्ध से यह स्पष्ट हुआ है कि युद्ध की प्रकृति बदल रही है। अब युद्ध में ड्रोन, रोबोट्स और अन्य तकनीकी उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका है। BSF ने इस बदलती हुई स्थिति को समझते हुए ड्रोन वारफेयर को अपनी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल किया है।


 भविष्य की दिशा

 बैचों की संख्या और विस्तार


तकनीकी उन्नयन और नवाचार


 सीमाओं पर वास्तविक तैनाती


वैश्विक मानकों के अनुसार तैयारियाँ


 आधुनिक युद्ध की तैयारियाँ

BSF की योजना है कि आने वाले वर्षों में ड्रोन कमांडो की संख्या में वृद्धि की जाए। इसके लिए प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी और नई तकनीकों को शामिल किया जाएगा। इससे BSF की क्षमता में वृद्धि होगी और वह सीमाओं की सुरक्षा में और प्रभावी भूमिका निभा सकेगी।

BSF की ‘ड्रोन कमांडो’ बैच की ट्रेनिंग शुरू होना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम भारत की सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया है। आधुनिक तकनीकों का समावेश BSF को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करेगा।

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