“H-1B वीज़ा शुल्क वृद्धि 2025 अमेरिकी टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया और प्रभाव”

H-1B वीज़ा शुल्क वृद्धि क्या है नया नियम?

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निर्णय की घोषणा
19 सितम्बर 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक प्रेसिडेंशियल प्रोक्लेमेशन (Presidential Proclamation) पर हस्ताक्षर किए, जिसका नाम है “Restriction on Entry of Certain Nonimmigrant Workers. -
नया शुल्क कितना है
नया शुल्क US $100,000 होगा — यानी ऐसे नए H-1B वीज़ा पिटीशन (petition) के लिए जो 21 सितम्बर 2025 की पूर्वरात्रि (12:01 AM ईस्टर्न डेलाइट टाइम) के बाद दायर होंगे। -
किस पर लागू होगा यह शुल्क
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यह केवल नए आवेदन (new petitions) पर लागू होगा, न कि उन वीज़ा धारकों पर जो पहले से H-1B वीज़ा रख चुके हैं या जिनकी पिटीशन पहले ही दायर हो चुकी है।
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वीज़ा नवीकरण (renewals) या मौजूदा वीज़ा धारकों के मामले में यह शुल्क नहीं लगेगा।
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यह नियम उन फर्मों / नियोक्ताओं (“employers”) पर लागू है जो नए H-1B वर्कर्स के लिए आवेदन कर रहे हैं।
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शुरू होने की तिथि
यह नया नियम 21 सितम्बर 2025 की पूर्वरात्रि (12:01 AM ET) से प्रभावी होगा। -
उद्देश्य और अन्य प्रावधान
इस बदलाव के पीछे के कारणों में शामिल हैं:-
अमेरिकी श्रमिकों की सुरक्षा और यह सुनिश्चित करना कि H-1B वीज़ा “specialty occupation” यानी विशेषज्ञ क्षेत्रों के लिए हो, न कि कम वेतन वाले कामों के लिए।
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Department of Labor और Homeland Security को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे “prevailing wage” (वर्तमान बाजार वेतन) बढ़ाएँ और H-1B कार्यक्रम में सुधार हेतु नियम बनाएँ।
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क्या नहीं बदला
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मौजूदा H-1B वीज़ा धारकों को इस नए शुल्क से छूट मिलेगी।
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पुनर्जीवित आवेदन (renewals), या परिवर्तन-नियोक्ता (change of employer) की कुछ स्थितियों में नया शुल्क न लगे — हालांकि यह स्पष्ट नहीं कि हर तरह की स्थिति में ऐसा होगा या नहीं।
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वीज़ा धारकों की यात्रा (आना-जाना) प्रभावित नहीं होगी यदि उनकी वीज़ा पहले से जारी हो चुकी हो।
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सितंबर 2025 में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा आवेदन शुल्क में $100,000 की वृद्धि की घोषणा की। यह शुल्क केवल नए आवेदनों पर लागू होगा, और वर्तमान वीज़ा धारकों या नवीनीकरण पर इसका कोई असर नहीं होगा।
अमेरिकी टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया
नकारात्मक प्रतिक्रियाएँ
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Amazon, Microsoft, Google, JPMorgan Chase जैसी बड़ी कंपनियों ने इस कदम पर चिंता जताई है।
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उनका मानना है कि इससे टैलेंट पाइपलाइन प्रभावित होगी, क्योंकि विदेशी विशेषज्ञों को अमेरिका में काम पर रखना महँगा हो जाएगा।
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कई कंपनियों ने अपने H-1B कर्मचारियों को विदेश यात्रा से बचने की सलाह दी है, ताकि वे नए शुल्क के कारण अमेरिका वापसी में अटक न जाएँ।
सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ
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Nvidia के CEO Jensen Huang और OpenAI के CEO Sam Altman ने इस कदम को आंशिक रूप से सकारात्मक बताया।
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उनके अनुसार, इससे अमेरिका में टॉप-लेवल ग्लोबल टैलेंट ही आकर्षित होगा, जो इनोवेशन और R&D को मजबूत करेगा।
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उनका मानना है कि यह नीति क्वालिटी ओवर क्वांटिटी का दृष्टिकोण अपनाती है।
उद्योग में विभाजित दृष्टिकोण
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बड़ी टेक कंपनियाँ लागत बढ़ने से परेशान हैं, लेकिन स्टार्टअप्स और AI/सेमीकंडक्टर क्षेत्र की कुछ कंपनियाँ इसे प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मान रही हैं।
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कुल मिलाकर, यह शुल्क वृद्धि अमेरिका के टेक सेक्टर में नीति और बिज़नेस रणनीतियों पर गहरी बहस छेड़ रही है।
इस निर्णय के बाद, अमेरिकी टेक कंपनियों ने मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दी हैं
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नकारात्मक प्रतिक्रिया: Amazon, Microsoft, और Google जैसी कंपनियों ने अपने H-1B कर्मचारियों को विदेश यात्रा से बचने की सलाह दी है, यह चिंता जताते हुए कि बिना नए शुल्क का भुगतान किए वे पुनः अमेरिका में प्रवेश नहीं कर पाएंगे ।
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सकारात्मक प्रतिक्रिया: Nvidia के CEO Jensen Huang और OpenAI के CEO Sam Altman ने इस कदम का स्वागत किया है, इसे अमेरिका में शीर्ष वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए एक सकारात्मक कदम मानते हुए ।
भारतीय IT कंपनियों पर प्रभाव
बढ़ी हुई संचालन लागत
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नए H-1B वीज़ा आवेदनों पर अतिरिक्त $100,000 शुल्क लागू होने से कंपनियों की ऑपरेशनल लागत बढ़ जाएगी।
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छोटे और मिड-साइज IT सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए यह एक भारी वित्तीय दबाव बना सकता है।
भर्ती और परियोजनाओं पर असर
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कंपनियों को अब अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
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कुछ परियोजनाओं में देरी या कर्मचारियों के स्थानांतरण में रुकावट आने की संभावना है।
वैकल्पिक रणनीतियाँ
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कंपनियाँ अब कनाडा, यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे देशों में ऑनशोरिंग और आउटसोर्सिंग बढ़ाने पर विचार कर रही हैं।
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डिजिटल प्रोजेक्ट्स और क्लाउड-बेस्ड सर्विसेज के माध्यम से ऑफशोर मॉडल पर निर्भरता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
संभावित जोखिम
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“ब्रेन ड्रेन” का खतरा बढ़ सकता है क्योंकि अमेरिकी बाजार में काम करने की आकर्षक संभावना कम हो सकती है।
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कर्मचारियों को नौकरी की असुरक्षा का सामना करना पड़ सकता है, जिससे टैलेंट रिटेंशन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भारत की प्रमुख IT कंपनियाँ जैसे TCS, Infosys, और Wipro, जो H-1B वीज़ा पर अमेरिकी ग्राहकों के लिए सेवाएँ प्रदान करती हैं, इस शुल्क वृद्धि से प्रभावित होंगी। यह वृद्धि उनके संचालन लागत को बढ़ा सकती है और व्यापार मॉडल को पुनः मूल्यांकन करने की आवश्यकता उत्पन्न कर सकती है The
संभावित परिणाम और भविष्य की दिशा
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प्रतिभा पलायन अमेरिका में कार्य करने के इच्छुक विदेशी पेशेवरों के लिए यह निर्णय एक बाधा उत्पन्न कर सकता है, जिससे “ब्रेन ड्रेन” की संभावना बढ़ सकती है।
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नौकरी की असुरक्षा नए शुल्क के कारण कंपनियाँ H-1B वीज़ा धारकों को नौकरी से निकालने या स्वदेश भेजने पर विचार कर सकती हैं।
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वैकल्पिक मार्ग कंपनियाँ कनाडा और लैटिन अमेरिका जैसे देशों में नजदीकी आउटसोर्सिंग या ऑनशोरिंग पर विचार कर सकती हैं।
H-1B वीज़ा शुल्क में $100,000 की वृद्धि अमेरिकी टेक उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती प्रस्तुत करती है। यह निर्णय अमेरिकी कंपनियों, भारतीय IT उद्योग और वैश्विक प्रतिभाओं के लिए नए अवसरों और चुनौतियों का संकेत देता है। भविष्य में, कंपनियाँ अपनी भर्ती रणनीतियों और वैश्विक संचालन मॉडल में आवश्यक परिवर्तन कर सकती हैं।
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